डॉ. कफील खान ने IMA सहित 5 फोरम को पत्र लिखकर लगाई मदद की गुहार, UP सरकार नहीं कर रही बहाल

डॉ काफिल खान (फाइल फोटो)
डॉ काफिल खान (फाइल फोटो)

डॉक्टर कफ़ील खान ने इंडियन मेडिकल एसोसिएसश्न (IMA), इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स (IAP), नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (NNF), प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट्स फोरम (PMSF) और मेडिकल सर्विस सेंटर (MSC) को पत्र लिख कर अपने निलम्बन को ख़त्म कराने में मदद मांगी है.

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लखनऊ. गोरखपुर (Gorakhpur) के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) के निलंबित डॉक्टर कफील खान (Dr Kafeel Khan) ने अब अपने निलंबन की कार्रवाई को लेकर प्रयास शुरू कर दिए हैं. डॉ कफील खान ने इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसएशन (IMA) सहित 5 फोरमों को पत्र भेजकर गुजारिश की है कि वे उनके निलंबन को समाप्त करवाने में मदद करें. कफील खान ने आरोप लगाया कि जिस ऑक्सीजन कांड में अन्य निलंबित डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया, उसी में उनकी बहाली नहीं की जा रही है.

डॉक्टर कफ़ील खान ने इंडियन मेडिकल एसोसिएसश्न (IMA), इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स (IAP), नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (NNF), प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिस्ट्स फोरम (PMSF) और मेडिकल सर्विस सेंटर (MSC) को पत्र लिख कर अपने निलम्बन को ख़त्म कराने में मदद मांगी है. डॉक्टर कफ़ील खान का कहना है कि वो बीआरडी मेडिकल त्रासदी के बाद कोर्ट और 9 अलग-अलग जांच में उन्हें क्लीन चिट मिलने के बावजूद से पिछले 3 वर्षों से निलम्बित हैं.

बाकी डॉक्टरों को कर दिया है बहाल
उन्होंने कहा है कि बाक़ी डॉक्टर जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ऑक्सीजन त्रासदी में निलम्बित हुए थे, उनकी बहाली हो गई है. उन्होंने उत्तरप्रदेश सरकार को 25 से अधिक पत्र लिखकर अपनी बहाली के लिए निवेदन किया है ताकि वो इस समय कोरोना महामारी के समय देश की सेवा कर सकें. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार उनकी बहाली नहीं कर रही.
कौन हैं डॉ कफील खान


डॉ कफील खान का नाम 3 साल पहले सुर्खियों में आया था. इन्सेफेलाइटिस बीमारी प्रभावित गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चों की मौत हो गई थी. अगस्त 2017 में हुए इस कांड के बाद प्रदेश सरकार ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने और ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए डॉ कफील को इन्सेफेलाइटिस वार्ड के नोडल ऑफिसर इनचार्ज के पद से हटा दिया था.

मामले में लापरवाही बरतने, भ्रष्टाचार में शामिल होने सहित कई आरोप लगाकर डॉ कफील को निलंबित कर दिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया. कफील की तरफ से इसे षड्यंत्र करार दिया गया. उन्होंने बताया था कि ऑक्सीजन की कमी की सूचना मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल, सीएमओ से लेकर जिले के डीएम तक को दी गई थी. ऑक्सीजन के लिए लोकल सप्लायर और दूसरे अस्पतालों में भी संपर्क किया था. 9 महीने जेल में रहने के बाद अप्रैल 2018 में डॉक्टर कफील को जमानत मिल गई. बाहर आने के बाद भी वह बच्चों की मौत को नरसंहार बताते रहे और यूपी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते रहे.



सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में हुई जेल फिर रिहाई
पिछले साल दिसंबर 2019 में ऐंटी CAA प्रदर्शन के दौरान डॉक्टर कफील ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया. उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा. केस दर्ज होने के बाद वह फरार हो गए. यूपी एटीएस ने 29 जनवरी को उन्हें मुंबई से गिरफ्तार किया. इसके बाद उन पर रासुका लगाकर मथुरा की जेल में बंद कर दिया गया.

डॉक्टर कफील ने रासुका के तहत हिरासत में लिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि डॉक्टर कफील की हाई कोर्ट में पेंडिंग याचिका पर 15 दिनों के अंदर सुनवाई पूरी की जाए. इसके बाद हाईकोर्ट ने डॉ कफील खान की रासुका के तहत गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया. साथ ही उनकी तुरंत रिहाई का आदेश भी दिया.
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