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पिछड़ी जातियों को आरक्षण देना सपा-बसपा के बस में नहीं: डिप्टी सीएम मौर्य

SC में शामिल करने का फैसला सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है
SC में शामिल करने का फैसला सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है

डिप्टी सीएम ने कहा कि सपा और बसपा ने असफल प्रयास किया था उनके बस की बात नहीं थी. मौर्य आगे कहते हैं कि समाज में इन वर्गों को सहायता की जरूरत थी, जो पिछड़े लोग हैं. उन्हें आगे ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों को आरक्षण देकर यूपी में मास्टर स्ट्रोक खेला हैं. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को कहा कि 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने का फैसला सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है. डिप्टी सीएम ने कहा कि सपा और बसपा ने असफल प्रयास किया था उनके बस की बात नहीं थी. मौर्य आगे कहते हैं कि समाज में इन वर्गों को सहायता की जरूरत थी, जो पिछड़े लोग हैं. उन्हें आगे ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

केशव मौर्य ने कहा सरकार हमेशा सबका साथ सबका विकास करती है और हर वर्ग को साथ लेकर चलती है. यह अखिलेश और मायावती के बस की बात नहीं थी, यह सिर्फ भाजपा ही ऐसे काम कर सकती है. बता दें कि यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा जबकि 403 विधानसभाओं में से 86 रिजर्व हैं. इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा. ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं.

इन जातियों को मिलेगा फायदा?



उल्लेखनीय है कि बीते दो दशक से 17 अति पिछड़ी जातियों कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी व मछुआ को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिशें की जारी है. सपा और बसपा सरकार में भी इसे चुनावी फायदे के लिए अनुसूचित जाति में शामिल तो किया गया पर उनका यह फैसला परवान नहीं चढ़ पाया.
(रिपोर्ट: अजीत सिंह)

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