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Analysis: OBC को आरक्षण देकर योगी सरकार ने बिगाड़ा सपा-बसपा का समीकरण!

क्या बीजेपी ने बिगाड़ा सपा-बसपा का समीकरण!
क्या बीजेपी ने बिगाड़ा सपा-बसपा का समीकरण!

इन जातियों की राजनीति में भागीदारी बहुत कम है, लेकिन अब इन्हें चुनाव में आरक्षण का लाभ मिलेगा. यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा जबकि 403 विधानसभाओं में से 86 रिजर्व हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 29, 2019, 12:54 PM IST
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यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों में आरक्षण देकर मास्टर स्ट्रोक खेला है. लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल ने न्यूज़18 से बातचीत में बताया कि जब-जब कोई पार्टी सत्ता में आई है उसने जातियों को एक लिस्ट से निकालकर दूसरे लिस्ट में डालने का प्रयोग किया है. लाल बताते हैं कि जब राजनाथ सिंह और मायावती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने कुछ जातियों को एक लिस्ट में करने का प्रयास किया था. लेकिन कुछ कारणों से आरक्षण का लाभ (ओबीसी) की जातियों को नहीं मिला था. लेकिन योगी सरकार ने एक अहम फैसला लेकर सपा-बसपा के वोटबैंक में सेंधमारी की है.

राजनीतिक विश्लेषक लाल के मुताबिक बीजेपी को इसका राजनीतिक लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि जनता के मन में इस वक्त सपा-बसपा के खिलाफ अविश्वास बढ़ा है. वहीं योगी सरकार के फैसले के बाद जनता का विश्वास बीजेपी की तरफ बढ़ रहा है. रतन मणि कहते हैं कि 17 OBC जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने से आने वाले वक्त में इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल सकता है. वहीं सपा-बसपा को नुकसान हो सकता है.

इन जातियों की राजनीति में भागीदारी बहुत कम है, लेकिन अब इन्हें चुनाव में आरक्षण का लाभ मिलेगा. उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा और 403 विधानसभा सीटों में से 86 रिजर्व हैं. इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा. ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं.



इन जातियों को मिलेगा फायदा?
बता दें कि बीते दो दशक से 17 अति पिछड़ी जातियों- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिशें जारी हैं. सपा और बसपा सरकार में इसे चुनावी फायदे के लिए अनुसूचित जाति में शामिल तो किया गया पर उनका यह फैसला परवान नहीं चढ़ पाया.

यूपी सरकार ने दिए प्रमाण पत्र बनाने के आदेश
योगी सरकार ने अपने इस फैसले के बाद सभी जिलाधिकारियों को इन जातियों के परिवारों को प्रमाण दिए जाने के आदेश दिए हैं. राज्यपाल राम नाइक ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग कर के इसमें संशोधन किया है.

प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह की ओर से इस संबंध में सभी कमिश्नर और डीएम को आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस पर जारी जनहित याचिका पर पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. इन जातियों को परीक्षण और सही दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए.

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