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UP Panchayat Chunav 2021: प्रत्‍याशियों के लिए गाइडलाइन जारी, वोट मांगने को लेकर विशेष प्रावधान, जानें पूरी डीटेल

यूपी पंचायत चुनाव 2021.
यूपी पंचायत चुनाव 2021.

राज्य निर्वाचन आयोग ने यूपी के त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव की दावेदारी में दर्ज प्रत्याशियों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं. इन गाइडलाइंस का पालन ना करना प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकता है. चुनाव में गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सख्ती की जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 7:55 AM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Three tier panchayat elections) की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. राज्य निर्वाचन आयोग (Uttar Pradesh Election Commission) ने पंचायत चुनाव में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है. आयोग ने पंचायती चुनाव में कदम रखने वाले दावेदारों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है. आयोग की ओर से जारी इन गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन कराया जाएगा. पालन नहीं करने पर आयोग प्रत्याशियों के खिलाफ एक्शन लेगा.

इस बार पंचायती चुनाव की सूची में दर्ज होने वाले दावेदारों की ओर से होने वाली गड़बड़ियों को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग सख्ती करने जा रहा है. गाइडलाइंस के अनुसार, इस बार पंचायती चुनाव का प्रत्याशी किसी भी पूर्व या वर्तमान सांसद/विधायक, पूर्व या वर्तमान मंत्री, ब्लॉक प्रमुख आदि को अपना एजेंट नहीं बना सकता है. अपने चुनाव प्रचार के लिए सड़कों पर वाहनों की लंबी कतार लगाने पर भी रोक लगा दी गई है. आयोग की तरफ से जारी नियमों के अनुसार, प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में आयोग की अनुमति लिए बगैर किसी भी वाहन का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

...तो हो सकती है दंडात्‍मक कार्रवाई
गाइडलाइंस में किसी मतदाता को मतदान करने, उसे मतदान करने से रोकने अथवा उसे मतदान के लिए लालच देने पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. ऐसे मामलों की शिकायत पर आयोग प्रत्याशी पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है. इसके साथ ही प्रत्याशी की ओर से चुनाव प्रचार के दौरान लिखित या मौखिक रूप से प्रयोग किए जाने वाले आपत्तिजनक शब्दों पर भी रोक लगा दी गई है. किसी दावेदार की ओर से ऐसा करने पर निर्वाचन आयोग कड़ी कार्रवाई कर सकता है.
दावेदारी पड़ सकती है खतरे में


चुनाव जीतने के लिए जाति धर्म पर वोट मांगने वाली नीति का इस्तेमाल करना भी इस बार दावेदारों पर भारी पड़ सकता है. आयोग के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी प्रत्याशी जाति और धर्म के नाम पर वोट नहीं मांग सकता है. इसके साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान दूसरे प्रत्याशी पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से आरोपी प्रत्याशी की दावेदारी खतरे में पड़ सकती है. आयोग ने किसी अन्‍य को जबरन चुनाव में न खड़ा करने का भी निर्देश दिया है. आयोग का कहना है कि चुनाव लड़ने का फैसला हर प्रत्‍याशी का व्‍यक्तिगत और स्‍वेच्‍छा से होना चाहिए.
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