योगी सरकार में अब 15 दिन में आ रहे हैं बिजली बिल! जानें क्‍या है पूरा माजरा
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योगी सरकार में अब 15 दिन में आ रहे हैं बिजली बिल! जानें क्‍या है पूरा माजरा
एक महीने के अंदर ही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने दो-दो बिजली के बिल भेज दिए हैं.

उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने तो हर महीने बिल जमा किया फिर बढ़े हुए बिल का क्या मतलब? अब बढ़े हुए बिल की शिकायत को लेकर लोग बिजली विभाग (Electricity Department) के चक्कर काट रहे हैं.

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गाजियाबाद. बिजली के बढ़े हुए बिल से उपभोक्ता परेशान हैं. 15 दिन के अंदर ही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने दो-दो बिल भेज दिए हैं. ऐसे में परेशानी और बढ़ गई है. दो-दो बिल भेजे जाने से उपभोक्ताओं के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. उपभोक्ता इसे जानने के लिए जब टोल फ्री नंबर पर बात करते हैं तो कहा जाता है कि लॉकडाउन के दौरान रीडिंग नहीं ली गई थी. इसलिए अब उसको जोड़ कर पिछले तीन महीने का बिल भेज रहे हैं, जबकि उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने तो हर महीने बिल जमा किया फिर बढ़े हुए बिल का क्या मतलब? अब बढ़े हुए बिल की शिकायत को लेकर लोग बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं. बिजली विभाग का कहना है कि बिल रीडिंग के हिसाब से ही बना है और उसे दुरुस्त किया गया है. लॉकडाउन के दौरान रीडिंग नहीं ली गई थी, जिसे अब ठीक किया गया है.

बढ़े हुए बिजली बिल से लोग परेशान
गाजियाबाद के वैशाली-6 निवासी कल्पना कुमारी कहती हैं, 'मैंने पिछले महीने 22 मई को 1622 रुपये का बिल चुकाया. 20 दिन बाद ही मेरे पास बिजली विभाग ने तकरीबन 5100 रुपये का बिल भेज दिया है. जब हमने बिजली विभाग के टोल फ्री नंबर पर बात की तो वो लोग कहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान रीडिंग नहीं ली गई थी, इसलिए आपका पिछला बिल बिना रीडिंग के ही गया था. अब मैं पूछना चाहती हूं कि मेरा एक महीने का बिल 5 हजार कैसे आ गया? बिल को ठीक करने से विभाग के अधिकारी मना कर रहे हैं.'
उपभोक्ता बोलेवसुंधरा सेक्टर 16 में रहने वाले प्रमोद कौशिक कहते हैं, 'बीते 30 मई को ही हमने 4263 रुपये जाम कराए हैं. इस बिल की जमा कराने की अंतिम तारीख 2 जून थी. अब कल-परसों एक और मैसेज आ गया है, जिसमें 3765 रुपये जमा कराने को कहा गया है और 21 जून को इसकी लास्ट डेट कह रहे हैं. अब हमको समझ में नहीं आ रहा है कि बिजली विभाग 19 दिन के अंदर दो-दो बिल कैसे भेज रहा है? /ये मीटर रीडिंग में गड़बड़ी है या बिजली विभाग की लापरवाही? हम यूपी सरकार से अनुरोध करते हैं कि इसको जल्द से जल्द सुधारा जाए. वरना हमलोग बिजली विभाग का घेराव करेंगे.'बिजली विभाग का क्या कहना हैबिजली विभाग के एक अधीक्षण अभियंता का कहते हैं, 'लोगों की शिकायतें आ रही हैं. विभाग शिकायतों की जांच करा रहा है. अप्रैल महीने में मीटर की रीडिंग नहीं होने से यह समस्या पैदा हुई है. विभाग ने आखिरी रीडिंग 20 मार्च से पहले ली थी. उसके बाद से रीडिंग नहीं ली गई थी. अप्रैल में रीडिंग नहीं ली गई थी. मई में जब रीडिंग ली गई तो स्लैब बदल गया. बिजली का दर जो साढ़े चार से पांच रुपये होता है, लेकिन तीन महीने का बिल एक साथ बनाने से बिजली का दर 7 रुपये तक पहुंच गया है. इसी वजह से लोग शिकायत कर रहे हैं. हमलोग इस पर विचार कर रहे हैं कि कैसे ठीक किया जाए.'




लोग कर रहे हैं पीएम, सीएम और ऊर्जा मंत्री से ये मांग
बिजली विभाग के इस कारनामे के बाद लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. लोग पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत भेज रहे हैं. लोगों का कहना है कि विभाग की तरफ से ज्यादा बिल भेज कर मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि एक तो लॉकडाउन के कारण काम-धंधा बंद हो गया है ऊपर से एक ही महीने में बिजली विभाग दो-दो बार बिल भेज कर घर का बजट बिगाड़ दिया है.

उपभोक्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस के कारण हमलोग बिजली विभाग के दफ्तर जाने से बच रहे हैं, जिसका फायदा बिजली विभाग उठाना चाह रहा है. ये लोग बिजली विभाग पर आरोप लगा रहे हैं कि जानबूझ कर लोगों को परेशान किया जा रहा है. कोरोना के कारण लोग घर से निकलेंगे नहीं और ऊपर से कनेक्शन काटने का डर दिखा कर मनमानी पैसा वसूला जा रहा है.

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