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पीएम मोदी की 'ईदी' से 70 साल बाद इस गांव में पहुंची बिजली

पीएम मोदी की 'ईदी' से 70 साल बाद इस गांव में पहुंची बिजली

लखनऊ से महज 100 किलोमीटर दूर हरदोई जिले के गांव गोठवा ने इस साल जैसी ईद मनाई है, वैसी पहले कभी नहीं मनाई थी. इस साल पहली बार ईद की रात गांव के घर रौशनी से जगमगा रहे थे.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार ईद में यूपी के एक गांव को खास ईदी दी है. पिछले 70 सालों से ये मुस्लिम बहुल गांव बगैर रौशनी के ही ईद की खुशियां मना रहा था. कई फरियादों के बावजूद गांव तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी, लेकिन जब पीएमओ तक ये बात पहुंची तो आला अधिकारियों को भेजकर गांव के हालात का जायजा लिया गया. इसके बाद युद्धस्तर पर काम शुरू हुआ और देखते ही देखते गांव का हर घर बिजली से रोशन हो गया.

    लखनऊ से महज 100 किलोमीटर दूर हरदोई जिले के गांव गोठवा ने इस साल जैसी ईद मनाई है, वैसी पहले कभी नहीं मनाई थी. इस साल पहली बार ईद की रात गांव के घर रोशनी से जगमगा रहे थे. पहली बार गांव के बच्चों ने बल्ब चमकते देखा. पहली बार बुजुर्गों को तपती गर्मी के बीच पंखे की हवा नसीब हुई. आजादी के 70 साल बाद इस गांव में बिजली पहुंची तो बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे खुशी से चमक गए.

    इस गांव तक बिजली के तारों को लाने की लड़ाई दशकों पुरानी है. कई सरकारें आई और गईं. बिजली विभाग के दफ्तरों के अधिकारी और बाबू भी बदल गए, लेकिन गांव की किस्मत नहीं बदली. लिहाजा बुजुर्गों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि लेकिन नौजवानों को यकीन था कि एक दिन इस गांव में भी बिजली आएगी. उन्होंने गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकारी दफ्तरों को कई चक्कर काटे. नेताओं से लेकर अधिकारियों तक के दर पर गुहार लगाई, लेकिन बात नहीं बनी. फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सौभाग्य योजना ने गांव की दहलीज पर दस्तक दी और देखते ही देखते पूरा नजारा बदल गया.

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    गोठवा गांव के रहने वाले किसान मोहम्मद नफीस ने बताते हैं कि हमारे गांव में बिजली सत्तर साल बाद आई है. इसके लिए हम लोगों ने काफी प्रयास किया है. हम लोग डीएम, एसडीएम के पास भी गए. जो विधायक हैं उनके पास भी गए. सबके पास जा जाकर हमलोग थक गए, लेकिन हमारे गांव बिजली नहीं आ पाई. लेकिन जब यहां डायरेक्टर एसके सिंह जी आए उनके द्वारा लाइट का उद्घाटन हुआ.



    गांव में बिजली पहुंची तो पहली बार ट्रांसफॉर्मर, बिजली के मीटर और दूसरे उपकरण देखने के लिए गांववालों की भीड़ जुट गई. दिन-रात पंखा झलने वालों की आंखों में उम्मीद की नई किरण जगमगाने लगी.

    गोठवा को बिजली के बल्ब से रोशन करने के लिए इमरान ने कई सालों तक संघर्ष किया. गांव के लोगों को साथ लिया और फिर गोठवा तक बिजली के खंभों को लाने के लिए मुहिम छेड़ दी. आखिरकार मेहनत रंग लाई और आज गांव में बिजली के खंभे भी हैं और घरों में बिजली का कनेक्शन भी है. इस गांव से उठी आवाज को सुन खुद नीति आयोग के निदेशक एस के सिंह ने खुद गांव का दौरा किया था.



    उसके बाद तो यहां बिजली पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया. अब गांव में कैम्प लगाकर सौभाग्य योजना के तहत बीपीएल कार्ड धारकों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है.

    गांव में बिजली आने से खुश किसान नाजिम अली ने न्यूज18 को बताया कि बहुत अच्छा लग रहा है. पहले तो लगता था कि हम लोग भारत के नक्शे में है ही नहीं. अब तो बहुत खुशी है. यहां पर जो ये बिजली जल रही है वो डॉक्टर एस के सिंह साहब की देन है. वर्ना यहां कोई नहीं सुनता था. कई बार हम लोग बिजली पावर हाउस हरदोई, एसडीएम साहब, डीएम साहब के यहां गए लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की. पचासों एप्लीकेशन गईं लेकिन सब दब गईं.



    सुलेखा श्रीवास्तव (छात्रा) के मुताबिक, गांव में बिजली आने से बहुत अच्छा लग रहा है. हम लोग लालटेन की रौशनी में पढ़ते थे. अब लाइट में पढ़ सकते हैं. गर्मी बहुत होती थी, लेकिन अब पंखे चला सकते हैं. वहीं एक दूसरी छात्रा खुशबू बानो ने बताया कि लाइट नहीं थी तो हम लोग पढ़ नहीं पाते थे. मिट्टी का तेल खर्च हो जाता था तो हम लोग पढ़ नहीं पाते थे. याद नहीं हो पाता था.

    गांव में बिजली आने के बाद से अब गोठवा के लोगों की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं. मोहम्मद आरिफ (किसान, गोठवा गांव) ने बताया कि यही उम्मीद लगा रहे हैं कि जैसे बिजली आई है वैसे ही सड़कें भी बन जाए. बरसात होती है तो बहुत कीचड़ हो जाता है. इतना कीचड़ हो जाता है कि निकलना मुश्किल हो जाता है. उनसे यही उम्मीद है, यहां के जो कार्यकर्ता हैं, प्रधान हैं वो तो ये सोचते हैं कि कुछ हो ना इस गांव में. लेकिन मोदी जी हैं तो शायद हमें उम्मीद है कि इस गांव की तरफ थोड़ा ध्यान देंगे.



    आजादी के 70 साल बाद गोठवा गांव जनपद हरदोई में बिजली तो आ गई लेकिन विकास की बहुत सी किरणें अभी भी बाकी हैं. गांव वालों का दावा और समस्या दोनों है कि सरकारें बाकी जगह ध्यान देती हैं, लेकिन इस गांव पर ध्यान नहीं देती हैं. उनका यह भी कहना है कि हमारे गांव का नक्शा लगता था कि हिंदुस्तान के नक्शे पर नहीं है.

    न्यूज़ 18इंडिया ने पूरे गांव की पड़ताल में देखा बिजली तो घर तक पहुंच गई है, लेकिन अभी विकास की किरण अभी उस घर घर में नहीं पहुंची है जहां पहुंचने चाहिए. अब देखना यह होगा कि नीति आयोग ने इस गांव में रोशनी तो फैला दी, लेकिन क्या सरकारें अब विकास की रोशनी यहां फैला पाएंगे?

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    Tags: Narendra modi, Yogi adityanath, लखनऊ

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