OPINION: स्वरूपानंद सरस्वती के बहाने कांग्रेस की मंदिर आंदोलन में एंट्री!

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 3, 2019, 1:51 PM IST
OPINION: स्वरूपानंद सरस्वती के बहाने कांग्रेस की मंदिर आंदोलन में एंट्री!
राम मंदिर को लेकर आंदोलन तेज

धर्म संसद कुछ घोषणा करती इसके पहले ही कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विश्व हिन्दू परिषद के धर्म संसद के औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया.

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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के लिए शिलापूजन की घोषणा के बाद से राजनीतिक हल्कों में ये चर्चा तेज हो गई है. माना जा रहा है कि कांग्रेस मंदिर आंदोलन पर भी बीजेपी को पूरी तरह घेरने की तैयारी कर रही है.

चर्चा यूं हीं नहीं उठी है, अगर हम ध्यान से देखें तो शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का बयान ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अधिग्रहीत जमीन वापस देने की मांग की है ताकि राम जन्मभूमि न्यास उस पर मंदिर निर्माण शुरू कर सके.

29 जनवरी को सरकार के इस हलफनामे के सामने आने और अगले दिन प्रयागराज कुंभ में हो रही विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संसद के ठीक पहले शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने अयोध्या जाने की घोषणा कर सबको चौका दिया है. अभी धर्म संसद कुछ घोषणा करती इसके पहले ही कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संसद के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया.


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ये दोनों संत कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या कांग्रेस राममंदिर आंदोलन के मुद्दे को बीजेपी से छीनने की कोशिश में है क्योंकि स्वरूपानंद की घोषणा के बाद प्रयागराज में विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संसद बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. हालांकि, धर्म संसद ने सरकार पर भरोसा जताया, लेकिन वीएचपी को करीब से जानने वाले इस तरह के सॉफ्ट नजरिये की उम्मीद नहीं कर रहे थे.

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानन्द की मानें तो ये सबकुछ अचानक नहीं हुआ है. दरअसल 2014 में करारी हार के बाद जब कांग्रेस ने अपनी हार की समीक्षा की. तब उसे यूपीए-2 में भ्रष्टाचार, उत्तर प्रदेश, बिहार के साथ दक्षिण के राज्यों में कमजोर होते संगठन के साथ जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई थी वह थी कि पार्टी की छवि हिन्दू विरोधी है.

पार्टी के कई नेताओं ने नेतृत्व को बताया कि सेक्युलरिज्म की बात करते करते पार्टी की छवि हिन्दू विरोधी हो गई है. इतनी बड़ी हार का असली कारण यही है.

पार्टी नेतृत्व ने इस बात को गंभीरता से लिया और तय हुआ की पार्टी धर्म निरपेक्षता की बजाय सॉफ्ट हिन्दुत्व की बात करेगी. इसके बाद पहले उपाध्यक्ष के रूप में और बाद में अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी ने तमाम मंदिरों के दर्शन किए.  कैलाश मानसरोवर की यात्रा की. यानी हर वो काम किया, जिससे कांग्रेस की एंटी हिन्दू छवि खत्म हो सके.

इस छवि से गुजरात में जहां पार्टी को वोट प्रतिशत बढ़ा. वहीं, पंजाब के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सत्ता में वापसी हुई. लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को इस छवि में और आगे बढ़ते हुए सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर बढ़ना था.

ऐसे में पार्टी के पास शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से बड़ा सहारा नहीं हो सकता था. हालांकि, कांग्रेस इस मामले पर सीधे-सीधे कुछ बोलने से बच रही है. लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का मानना है कि सरकार को शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से बातचीत कर रास्ता निकालना चाहिए. प्रयागराज में धर्म संसद के फैसले पर बीजेपी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

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First published: February 2, 2019, 1:52 PM IST
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