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बसपा में 'परिवारवाद' के सहारे कहीं मायावती वारिस तो नहीं तलाश रहीं?

बसपा में 'परिवारवाद' के सहारे कहीं मायावती वारिस तो नहीं तलाश रहीं?

मायावती के भाई आनंद को बसपा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

मायावती के भाई आनंद को बसपा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

बहुजन समाज पार्टी में परिवारवाद की शुरुआत पिछले कुछ महीनों से बहुत तेजी से हुई है. पहले मायावती अपने भतीजे आकाश को पार्टी में महत्ता दी. अब अपने सगे भाई आनंद को बहुजन समाज पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया.

लखनऊ. तेजी से फेरबदल व उलटफेर के लिए जानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती (Mayawati) ने एक बार फिर से अपनी पार्टी में बड़ा परिवर्तन किया है. इस बार के बदलाव में परिवारवाद की झलक देखने को मिल रही है, हालांकि कई मौकों पर मायावती खुले शब्दों में कहती रही हैं कि वो परिवारवाद को कभी महत्व नहीं देंगी. लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा.

बहुजन समाज पार्टी में परिवारवाद की शुरुआत पिछले कुछ महीनों से बहुत तेजी से हुई है. पहले मायावती अपने भतीजे आकाश को पार्टी में महत्ता दी. अब अपने सगे भाई आनंद को बहुजन समाज पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया. राजनीतिक गलियारे में चर्चा यही है कि इस बड़े परिवर्तन से पार्टी को कितना फायदा मिलेगा. एक सवाल ये भी है कि क्या मायावती इस बात की नींव रख रही है कि बहुजन समाज पार्टी का वारिस कौन होगा?

भाई आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए जाने के पीछे तर्क क्या?

सूत्रों की मानें तो मायावती के सगे भाई आनंद लगातार इस बात की इच्छा भी जता रहे थे कि उनको बहुजन समाज पार्टी में मुख्यधारा में लाया जाए. हालांकि मायावती हमेशा से इस बात के खिलाफ थी कि पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा मिले. समाजवादी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस के परिवारवाद पर हमेशा मायावती खुलकर बोलती भी रही हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से बदले सियासी हालात के बाद मायावती को लगने लगा कि कई सारे गठबंधन और चौतरफा सियासी कदम उठाने के बाद भी पार्टी के हालात सुधर नहीं रहे हैं. शायद उनको अब लगने लगा है कि घर के ही किसी आदमी को पार्टी का धीरे-धीरे जिम्मेदार बनाया जाए. इसके पीछे तर्क यह भी है कि उनके घर के आदमी के होने से शायद वोटरों में "सॉफ्ट कॉर्नर" भी विकसित रहेगा.

नेशनल कोऑर्डिनेटर ही बनाएगा संगठन

किसी भी सियासी पार्टी की रीढ़ की हड्डी उसका संगठन होता है. मायावती ने इस बार संगठन के नव निर्माण की जिम्मेदारी अपने भाई आनंद को दी है. नेशनल कोऑर्डिनेटर के पास संगठन को लेकर सारे पॉवर होंगे. नेशनल कोऑर्डिनेटर न सिर्फ जिला कमेटी बनाकर रखेगा बल्कि विधानसभावार कमेटी, सेक्टर कमेटी, बूथ कमेटी और भाईचारा कमेटी को भी नए सिरे से बनाएगा.

कितनी सफल होंगी मायावती?

2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच बड़ा गठबंधन हुआ था. इस गठबंधन के बारे में कहा जा रहा था कि यह उत्तर प्रदेश की सियासत नहीं बल्कि देश की सियासत को बदल देगा, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मायावती को शायद यह बात भी सताने लगी है कि पिछले 3 से 4 महीनों में जितनी भारी तादाद में बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा है, उससे उनकी पार्टी को भी नुकसान हुआ है । ऐसे में मायावती तमाम डैमेज को कंट्रोल करने के लिए एक बार फिर से संगठन को नई धार देना चाह रही हैं. मायावती अपने बेस वोट को ही फोकस रखकर तमाम संगठन फिर से तैयार करवा रही हैं. मायावती को लगता है कि अगर उनके पास संगठन रहेगा तो उनकी सफलता का दर बरकरार रहेगा.

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Tags: BSP, Lucknow news, Mayawati

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