COVID-19 के खिलाफ जंग में लखनऊ का एरा मेडिकल कॉलेज लिख रहा नई इबारत

लखनऊ का एरा मेडिकल कॉलेज कोविड-19 के खिलाफ जंग में नजीर पेश कर रहा है.

लखनऊ का एरा मेडिकल कॉलेज कोविड-19 के खिलाफ जंग में नजीर पेश कर रहा है.

Lucknow News: कोरोना के खिलाफ जंग में लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज के योगदान को देखते हुए खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दर्जनों बार इसके कोविड प्रबंधन की सराहना की है और इस मॉडल पर चलने के लिए प्रेरित किया है.

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लखनऊ. कोविड-19 चिकित्सा जगत के लिए नई पहेली बन कर उभरा है. कोविड-19 को लेकर नए रिसर्च चिकित्सा जगत में रोजाना हो रहे हैं, इसके बावजूद नए चैलेंज मुंह बाए खड़े हुए हैं. कोरोना का "नया इंडियन स्ट्रेन" (New Indian Strain) जिसको लेकर डब्ल्यूएचओ (WHO) ने भी संक्रमण फैलाने को लेकर के आगाह किया है, इससे लड़ने के लिए उत्तर प्रदेश में कई चिकित्सा संस्थान अपना सीना ताने खड़े हैं. राजधानी लखनऊ (Lucknow) स्थित ऐसा ही चिकित्सीय संस्थान एरा मेडिकल कॉलेज (Era Medical College) कोविड प्रबंधन में लगातार नई इबारत लिख रहा है.

एरा मेडिकल कॉलेज ने कोरोना मैनेजमेंट में अपने कोरोना इलाज़ के रिसर्च के आधार पर अलग नजरिया लोगों और मेडिकल प्रोफेशन के सामने पेश किया है. पर्सनल केयर से लेकर डाइट मैनेजमेंट और इलाज की शानदार सुविधा एरा मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 के इलाज़ में अलग स्थान पर ले जा रही है. मेडिकल कॉलेज ने अपना निजी प्रोटोकॉल भी तैयार किया है, जो उनके अपने रिसर्च से तैयार किया गया है. और शायद ये बड़ी वजह है कि एरा मेडिकल कॉलेज का यह रोल मॉडल प्रोटोकॉल "96 से 97" फीसद तक मरीजों को ठीक कर रहा है. खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी दर्जनों बार एरा के कोविड प्रबंधन की सराहना की है और इस मॉडल पर चलने के लिए प्रेरित किया है.

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2020 की आपदा से ली सीख 2021 में आ रही काम
दरअसल कोरोना की जंग से लड़ने के लिए सबसे बड़ी तकनीकी बाधा यह थी कि जिसे इसका इलाज करना है, उसको भी इस महामारी से संक्रमित होने से बचना है. कोरोना की पहली लहर के दौरान ही एरा मेडिकल कॉलेज ने सीख लिया था कि महामारी से लोहा कैसे लेना है. 2020 में कोविड में बेहतर काम करने के लिए एरा मेडिकल कॉलेज को प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड से भी नवाजा गया. 2020 में जिन मरीजों का इलाज एरा ने किया था, उनके तमाम रिसर्च और दवा करने के तरीके को अपने यहां एरा ने संजो कर रख लिया. अब 2021 की दूसरी लहर में एरा मेडिकल कॉलेज का ये अनुभव काफी काम आ रहा है.

ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं आई

अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ एमएमए फरीदी कहते हैं कि 400 बेड के L3 लेवल के इस अस्पताल में विश्व स्तरीय मशीनें, तकनीकी स्टाफ, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ काम कर रहे हैं. एक तरफ जहां कई सारे अस्पतालों में ऑक्सीजन और मेन पावर के स्टाफ की कम होने का रोना रोया जाता है, वहीं दूसरी तरफ एरा मेडिकल कॉलेज में इस मामले में अपने आपको बहुत ज्यादा हाईटेक कर लिया है. मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन कभी कोई कमी नहीं आई.



मरीज की डाइट पर विशेष नजर

एरा मेडिकल कॉलेज का सबसे खूबसूरत पहलू कोविड प्रबंधन का है. यहां मरीज के भर्ती होने पर उसकी केयर पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. सबसे पहले मरीज को अपने यहां एरा मेडिकल कॉलेज का स्टाफ चेक करता है, जिसमें सीटी स्कैन, x-ray ,ब्लड टेस्ट, ईसीजी से लेकर सभी जरूरी जांच होती हैं. यही नहीं ICPMS मशीन से शरीर में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की जांच भी की जाती है. जिस पोषक तत्व की मरीज के शरीर में कमी होती है, उसी के अनुसार डाइट चार्ट लागू कर दिया जाता है. मसलन आपकी जांच में पोटेशियम, मैग्नीशियम या हीमोग्लोबिन की कमी आई तो फौरन उस तरह का डाइट चार्ट आपको दिया जाएगा. ये कमी सुधरे.

हर मरीज की स्थिति पर लगातार नजर

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एरा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इलाज की है बेहतरीन सुविधा

अस्पताल का अपना है विश्वस्तरीय किचन

प्रिंसिपल बताते हैं कि एरा मेडिकल कॉलेज में अलग से विश्व स्तरीय किचेन बनाया गया है, जहां पर 150 प्रकार के खाने और व्यंजन तैयार किए जाते हैं. इन खानों में मरीज के डाइट चार्ट के हिसाब से उन्हीं सब्जियों, उन्हीं फलों, जूस ,काढ़ा, ग्रीन टी का इस्तेमाल होता है. शुगर के मरीज के लिए अलग डाइट चार्ट होता है. बीपी के मरीज के लिए अलग डाइट चार्ट है, हृदय रोग से ग्रसित लोगों के लिए अलग चार्ट बनाया गया है. यहां अस्पताल में नर्स अपने हाथ से खुद मरीज को खाना खिलाती हैं. हौसला अफजाई करती हैं, खुद फिजियोथैरेपी कराती हैं. अगर मरीज खाना नहीं खा पा रहे हैं तो आपके मुंह में खाना भी डालती हैं. यही नहीं जरूरत पड़ने पर मरीज हौसला अफजाई और मनोरंजन का काम भी करती हैं. एरा मेडिकल कॉलेज ने अपने मरीजों की डाइट में आयुष पेथी का भी इस्तेमाल किया है लहसुन, हल्दी, ग्रीन टी और कलोंजी भी मरीजों को दी जाती है.

मरीज के पर्सनल केयर पर विशेष ध्यान

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लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के केयर पर दिया जाता है विशेष ध्यान

इलाज की अत्याधुनिक सुविधा, चौबीसों घंटे मॉनीटरिंग

अब बारी इलाज की आती है. 2020 में कोरोना के खिलाफ लड़ी गई जंग का एक्सपीरियंस अब एरा के काफी काम आ रहा है. एरा मेडिकल कॉलेज में मरीज के पहुंचने के बाद सारी जांच कॉलेज खुद करवाता है और उसी के आधार पर विशेषज्ञों की टीम इस बात को तय करती है कि आखिर मरीज का इलाज कैसे होना है. हर मरीज एक विशेषज्ञ चिकित्सक के अंडर में होता है और वह चिकित्सक लगातार मरीज की मॉनिटरिंग करता है. प्रत्येक वार्ड में स्टाफ नर्स, आया, वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारी की कोई कमी नहीं होती है. एरा मेडिकल कॉलेज मे करीब 1500 HD लेवल के कैमरे लगाए हैं. एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां पर कैमरों के जरिए से वार्डों की निगरानी होती है. कंट्रोल रूम मैं बैठा स्टाफ इस बात को देखता रहता है कि किसी मरीज को कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है. दिक्कत होने की दशा में कंट्रोल रूम से ही ऐलान किया जाता है कि उक्त मरीज की ऑक्सीजन किट हट गई है उसको फौरन सही कीजिए. यह सेवा 24 घंटे चलती रहती है.

अस्पताल लगातार पेश कर रहा सेवा की नजीर

अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ वैभव शुक्ला बताते हैं कि आधुनिक कंट्रोल रूम की खासियत यहीं खत्म नहीं होती है कंट्रोल रूम में सैकड़ों एलईडी के माध्यम से एक बड़ा डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिसमें प्रत्येक मरीज की मेडिकल की दशा दिखती रहती है इस डैशबोर्ड पर सारे मरीजों की लिस्ट डिस्प्ले होती रहती है. विभिन्न रंगों को दर्शाने वाले इस डैश बोर्ड के माध्यम से किसको क्या बीमारी है, और किस मरीज का क्या नाम है, मरीज का ऑक्सीजन लेवल कितना है, बीपी कितना है किस चिकित्सकों की टीम इलाज़ कर रही है वह सब कुछ डैशबोर्ड के चार्ट पर दिखता रहता है. किसी भी मरीज के बारे में कोई जानकारी अगर चाहिए तो डैशबोर्ड की तरफ नजर घुमाइए और पूरी जानकारी सेकंडो में प्राप्त कर लीजिए.

ईद का त्यौहार नज़दीक है और एरा मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने मैनेजमेंट की अपील पर ईद में छुट्टियां ना लेने का फैसला किया है. ऐसा नहीं है कि इंसानों से इंसानों में फैलने वाली इस मर्ज से एरा का स्टाफ प्रभावित नहीं हुआ. एरा के प्रिंसिपल से लेकर दर्जनों लोग कोरोना से लड़े हैं लेकिन इनकी हिम्मत और ज़ज़्बे को कोरोना नहीं डिगा पाया है, हालांकि कोरोना काल में एरा ने अपने सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट को खोया है. कोरोना की आंख में आंख मिलाकर इलाज़ करने वाले स्टाफ को अभी और सफर तय करना है, इनकी हिम्मत और जज़्बा यूं ही बना रहे.

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