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आपके लिए इसका मतलब: तो क्या MLC चुनाव में किसी निर्दलीय कैंडिडेट से होगी अखिलेश यादव की टक्कर?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

UP MLC Election Explainer: विधान परिषद की 12 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासत तेज. विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक भाजपा के 310 विधायक (MLA) हैं. उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के 9 हैं.

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लखनऊ. विधान परिषद चुनाव (Legislative Council Election) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के दोनों प्रत्याशियों ने शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया. विधान परिषद की 12 सीटों के लिए राजनीतिक गोटी लगभग तय हो चुकी हैं. भाजपा 10 विधायक बना सकेगी. वहीं सपा को 1 सीट मिलनी तय है, लेकिन अखिलेश यादव ने दो उम्मीदवारों को उतारकर मुकाबले की स्थिति खड़ी कर दी है. ऐसे में सवाल उठता है कि परिषद के इस चुनाव में सपा की लड़ाई बीजेपी से होगी या फिर किसी निर्दलीय उम्मीदवार से?

भाजपा ने वैसे तो 12 पर्चे खरीदे हैं लेकिन, अंदरूनी लोगों का कहना है कि पार्टी सिर्फ 10 विधायकों को जिताएगी. शायद एक निर्दलीय मैदान में आये जिसे पार्टी का सरप्लस वोट मिले. 1 सीट के बाद दूसरी सीट की अखिलेश यादव की चाहत तब पूरी होगी, जब पार्टी इस निर्दलीय उम्मीदवार को पटखनी दे लेकिन, क्या ऐसा हो पायेगा. इस सवाल का जवाब विधायकों की संख्या को समझकर मिल जायेगा.





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बता दें कि विधानसभा में अभी 403 विधायक हैं. परिषद में विधायक बनने का फार्मूला सीधा है. जीतने के लिए एक तय संख्या के बराबर वोट चाहिए होते हैं. विधायकों की कुल संख्या को चुनाव होने वाली सीटों की संख्या में एक जोड़कर उससे भाग दे देने पर जो नंबर आता है, उतने वोट जीतने के लिए चाहिए होते हैं. इस तरह 403 को 12+1=13 से भाग देने पर 31 की संख्या आती है. यानी एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 विधायकों के वोट चाहिए.

जानिए वोटों का गणित
विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक भाजपा के 310 विधायक हैं. उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के 9 हैं. संख्या पहुंची 319. कांग्रेस MLA अदिति सिंह, राकेश सिंह और बसपा के अनिल सिंह भाजपा के साथ दिखते रहे हैं. इन्होंने फेवर किया तो संख्या पहुंची 322. रालोद के एकलौते विधायक रहे सहेन्द्र सिंह रमाला भाजपा के पाले में आ सकते हैं. इसके अलावा यदि तीन निर्दलीय और बसपा के 11 विधायकों ने भी भाजपा का साथ दिया तो पार्टी का संख्या बल पहुंच जायेगा 337. अब 10 विधायकों को 31-31 वोट दिलाकर जीताने के बाद भाजपा के पास 27 वोट बचेंगे.

अब सपा पर नजर दौड़ा लेते हैं. विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक सपा के 49 विधायक हैं. इनकी संख्या बढ़ायेंगे बसपा के वे बागी जिन्होंने राज्यसभा चुनाव के समय अखिलेश यादव के साथ दिखे थे. इन सातों को बसपा निकाल चुकी है. यदि सातों के सातों सपा के साथ आ जायें तो संख्या पहुंचेगी 56. इसमें तीन घटाना होगा क्योंकि शिवपाल यादव, हरिओम यादव और नितिन अग्रवाल पार्टी से दूर हैं. अब संख्या बची 53. एक विधायक को 31 वोट दिलाने के बाद पार्टी के पास 22 वोट बचेंगे.

निर्दलीय विधायकों की भूमिका अहम
सपा के सरप्लस वोटों की संख्या भाजपा के वोटों से 5 कम है. इसीलिए किसी निर्दलीय की लॉटरी लगने के किस्से चर्चा में आ रहे हैं. किसी निर्दलीय को उन पार्टियों के वोट भी मिल सकते हैं जो भाजपा को सपोर्ट न करना चाहें. ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 4 विधायक और कांग्रेस के 5 विधायक अहम रोल निभायेंगे. जिनकी तरफ इनके वोट झुकेंगे उसकी तरफ ही परिषद की 12वीं सीट जा सकती है. हालांकि भाजपा के पास 27 वोट सरप्लस हैं और उसे 12वीं सीट जीतने के लिए महज 4 और वोट चाहिए. सत्ताधारी पार्टी के लिए ये काम बहुत मुश्किल तो नहीं लगता.
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