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आपके लिए इसका मतलब: क्या तीनों कृषि कानूनों को रद्द भी कर सकता है सुप्रीम कोर्ट? जानें विशेषज्ञ सुभाष कश्यप की राय

सुप्रीम कोर्ट.(फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट.(फाइल फोटो)

मशहूर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप (Subhash Kashyap) का कहना है कि जिन तीन कैटेगरी के तहत आने वाले कानूनों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) रद्द कर सकता है, उसमें केंद्र सरकार के द्वारा हाल ही में बनाए गए तीनों कृषि कानून नहीं आते हैं. हालांकि वह अंतरिम रोक लगा सकता है.

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लखनऊ. केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों (New Farms Law) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अंतरिम रोक लगा दी है. साथ ही एक कमेटी का गठन कर दिया गया है जो कि सरकार और किसानों से बातचीत करेगी. अब लोगों के मन में ये सवाल खड़ा गया है कि क्या संसद (Parliament) में बने कानून पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगा सकता है? क्या सुप्रीम कोर्ट तीनों कृषि कानूनों को अवैध करार भी दे सकता है, क्योंकि अमूमन ऐसा कभी सुनने को नहीं मिला. ऐसे में इन सवालों के जवाब के लिए हमने बातचीत की देश के मशहूर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से....

सुभाष कश्यप (Subhash Kashyap) ने न्यूज़ 18 को बताया कि किसी भी कानून पर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम रोक लगा सकता है. यानी उसके लागू किये जाने पर कोर्ट द्वारा रोक लगायी जा सकती है. मामले में सुनवाई चलती रहेगी जब तक कोर्ट का आखिरी फैसला नहीं आ जाता. नए कृषि कानूनों के मामले में भी ऐसा ही हो रहा है. कमेटी बातचीत करेगी और हल तलाशने की कोशिश करेगी.

तो क्या किसी नतीजे के न निकलने की सूरत में सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों को अवैध करार भी दे सकता है? इस सवाल के जवाब में सुभाष कश्यप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कानूनों को अवैध करार नहीं दे सकता, लेकिन ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है. संविधान में जो लिखा गया है उसके मुताबिक किसी कानून को सिर्फ तीन ही दशाओं में सुप्रीम कोर्ट अवैध करार दे सकता है.



1. राज्य और संघ के बीच विवाद: अगर राज्य और संघ की सरकार के बीच में कोई झगड़ा हो तो उस पर सुप्रीम कोर्ट कोई निर्णय ले सकता है. यानी ऐसे मसले पर बनाये गये किसी कानून को सुप्रीम कोर्ट अवैध करार दे सकता है.
2. मूल अधिकारों का हनन: चाहे राज्य सरकार हो या फिर केंद्र सरकार, अगर सरकारों के द्वारा बनाये गये किसी कानून से नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन होना सिद्ध हो जाये तो ऐसे कानूनों पर उच्चतम न्यायलय और उच्च न्यायालय, दोनों निर्णय ले सकते हैं. यानी ऐसे कानून को अवैध करार दिया जा सकता है.

3. सरकारों के अधिकार क्षेत्र से बाहर का हो मामला: मान लीजिए राज्य सरकार ने या फिर केंद्र सरकार ने कोई ऐसा कानून बना दिया हो जो उसके अधिकार क्षेत्र में ही न हो तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट अवैध करार दे सकता है. मसलन राज्य सूची के किसी मामले पर यदि केंद्र सरकार कोई कानून बना दे या फिर संघ सूची के मामले पर राज्य सरकार कोई कानून बना दे तो इसे सुप्रीम कोर्ट अवैध करार दे सकता है. भले ही संघ सूची में न हो फिर भी यदि कोई राज्य किसी ऐसे मामले पर कानून बना दे जो उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर हो तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट अवैध करार दे सकता है. मसलन तमिलनाडु में रहने वाले राजस्थान वासियों पर यूपी कोई कानून बना दे.

अब ये तीनों कृषि कानून मेरे विचार से इन तीनों कैटेगरी में से किसी में भी नहीं आते हैं. न अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, न राज्य- संघ विवाद का मामला है और न ही मौलिक अधिकारों का हनन है. लेकिन संविधान ने जनहित को ध्यान में रखते हुए जस्टिस देने का एक अधिकार सुप्रीम कोर्ट को दिया हुआ है. जनहित के मामले में अब इसके तहत सुप्रीम कोर्ट निर्णय लेने लगी है. कहां तक ये संवैधानिक है अभी मैं नहीं कह सकता. इस पर मेरे अलग विचार हैं.
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