यूं ही नहीं हो रही यूपी में सियासी गपशप, पिछले एक महीने से हर तीसरे दिन सरकार, संघ और संगठन के बीच हो रहा मंथन

यूपी में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं.

यूपी में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं.

उत्‍तर प्रदेश की सियासत (UP Politics) को लेकर पिछले काफी दिनों से जोरदार कवायद देखने को मिल रही है. यही नहीं, इस दौरान तकरीबन हर तीसरे दिन भाजपा, सरकार और संघ के बहुत लोगों के बीच बैठकें हुई हैं. वहीं, यूपी के प्रभारी राधामोहन सिंह समेत कई नेता लगातार लखनऊ के दौरे कर रहे हैं.

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लखनऊ. यूपी की सियासत (UP Politics) में इन दिनों एक ही सवाल हर किसी की जुबान पर है कि आखिर क्या होगा. मौजूदा भाजपा सरकार (BJP Government) और संगठन में बदलाव की अटकलें गली-गली में सुनी जा सकती हैं. इसकी माकूल वजह भी है. पिछले एक महीने में जो हुआ है, वैसा 2017 के बाद से शायद ही कभी देखने को मिला. यही वजह है कि सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है. नया क्या होने वाला है ये तो कोई नहीं जानता, लेकिन जो हुआ है वो भी कम महत्वपूर्ण नहीं है.

पिछले एक महीने में औसतन हर तीसरे दिन भाजपा, सरकार और संघ के बहुत वरिष्ठ लोगों के बीच बैठकें हुई हैं. इसमें पीएम मोदी (PM Modi) से लेकर योगी सरकार के मंत्री और प्रवक्ता तक शामिल हैं. आइए सिलसिलेवार ढ़ंग से जानते हैं कि बैठकों का सिलसिला कब शुरू हुआ.

ये है पूरी टाइमलाइन

5 मई- भाजपा और संघ के नेताओं के सियासी दौरे शुरू हुए मई के महीने से. पंचायत चुनाव के नतीजे आ गये थे. कहा गया कि इसकी समीक्षा के लिए प्रदेश भाजपा प्रभारी राधामोहन सिंह लखनऊ आये हैं. उन्होंने जो बैठक की उसमें सीएम योगी आदित्यनाथ, भाजपा के महामंत्री संगठन सुनील बंसल और पार्टी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह शामिल थे. बैठक 5 मई को लखनऊ में हुई. तीन दिनों तक रुके रहे राधामोहन सिंह ने कई चक्रों में मीटिंग की.
23 मई - इसके बाद थोड़ी शांति रही, लेकिन सियासी आंच फिर तेज हुई जब दिल्ली में यूपी को लेकर एक हाई लेवल मीटिंग हुई. खबर ये आयी कि इसमें पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, सुनील बंसल और संघ के ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबोले शामिल थे. 23 मई को हुई इस बैठक का कोई निचोड़ पता नहीं चला. बता दें कि होसबोले संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद सबसे सीनियर हैं.
25 मई - दिल्ली में हुई इस बैठक के दूसरे ही दिन 25 मई को दत्तात्रेय होसबोले लखनऊ पहुंच गये. वे यहां दो दिनों तक रहे. हालांकि उनका ये दौरा इतना गोपनीय था कि लखनऊ का कोई फोटोग्राफर उनकी तस्वीर नहीं खींच पाया. ये जरूर पता चला कि बीजेपी के कुछ बड़े नेता उनसे मिले थे.
27 मई - होसबोले के लखनऊ से वापस लौटने के दूसरे दिन माहौल और गर्म हो गया. अचानक खबर आयी कि सीएम आदित्यनाथ राज्यपाल से मिलेंगे. 27 मई को राजभवन में दोनों की मुलाकात हुई.
29 मई - इस अहम मुलाकात के दूसरे दिन 29 मई को सीएम आवास पर एक और बैठक हुई. इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के साथ सुनील बंसल शामिल थे. कहा गया कि पंचायत चुनावों पर बात हुई.
31 मई - अब जरा गौर करिये. इन बैठकों की अभी चर्चा शांत भी नहीं हुई थी कि एक खबर ने आग में घी डाल दिया. पता चला कि 31 मई को फिर से प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह लखनऊ आयेंगे. उनके साथ संगठन महासचिव बीएल संतोष भी रहेंगे. दोनों लोग बंद कमरे में मंत्रियों से अलग-अलग बात करेंगे. तीन दिनों तक मीटिंग चलती रही. साथ ही पूरे प्रदेश में कानाफूसी भी चलती रही.
6 जून - इस मीटिंग के बाद तो एक हैरान करने वाली खबर आयी. दो दिन पहले लखनऊ में मीटिंग करके वापस गये राधामोहन सिंह अचानक 6 जून को फिर लखनऊ आ पहुंचे. राधामोहन सिंह गवर्नर आनंदी बेन पटेल से मिलने पहुंच गये. उनसे मिलने के बाद वे विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से भी मिले. चर्चा ये चल पड़ी कि उन्होंने गवर्नर को एक लिफाफा दिया है.
9 जून - इसके बाद 9 जून को सीएम आवास पर एक और बड़ी बैठक होती है. इसमें सीएम, सुनील बंसल और स्वतंत्र देव सिंह शामिल होते हैं. दोनों डिप्टी सीएम या कोई मंत्री मौजूद नहीं रहता है.
10 जून - अब सीएम आदित्यनाथ खुद दिल्ली रवाना हो गये हैं. गुरुवार 10 जून को वे अमित शाह और 11 जून को पीएम नरेन्द्र मोदी और जेपी नड्डा से मिलेंगे. अब देखना ये है कि दिल्ली से वापस लौटने के बाद कौन सी अगली बैठक होती है या फिर कौन सा निर्णय.
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