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ओमप्रकाश राजभर की स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात, क्या बनने से पहले ही बिखर रहा है महामोर्चा?

ओमप्रकाश राजभर की स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात, क्या बनने से पहले ही बिखर रहा है महामोर्चा?

ओमप्रकाश राजभर और स्वतंत्र देव सिंह की मुलाकात के सियासी मायने.

UP Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश में होने वाली विधानसभा चुनाव की हलचल तेज है. सुहैलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) का बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह (BJP State President Swatantra Dev Singh) की मुलाकात के बाद सूबे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

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लखनऊ. विधानसभा चुनावों (UP Election 2022) की हलचल के बीच अचानक मंगलवार सुबह सुहैलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) का बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) के घर मिलने पहुंचना कई अटकलों को जन्म दे रहा है. ये वहीं ओमप्रकाश राजभर हैं जिन्होंने पिछली बार बीजेपी सरकार को समर्थन देकर मंत्री पद लिया था. लेकिन बाद में भारतीय जनता पार्टी की अलग-अलग मुद्दों पर खूब बुराईयां की और अंत में मंत्री पद छोड़कर बीजेपी के खिलफ मोर्चा खोल दिया था. तब से लगातार ओमप्रकाश राजभर  भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ पिछड़ों और दलितों के मुद्दे पर उंगली उठाते रहे हैं. ऐसे में मंगलवार की सुबह अचानक ओमप्रकाश राजभर का भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के घर पहुंचना चर्चा का विषय बन गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ओमप्रकाश राजभर एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रहे हैं या फिर जैसा कि वह बता रहे हैं ये केवल औपचारिक मुलाकात ही थी?

सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात बिल्कुल भी औपचारिक नहीं थी बल्कि इसके लिए बाकायदा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने फील्डिंग की थी. ओमप्रकाश राजभर दयाशंकर सिंह के साथ ही स्वतंत्र देव के घर सुबह 7 बजे पहुंचे और करीब 1 घंटे की बातचीत में तमाम मुद्दों के बीच इस बातपर भी चर्चा हुई कि ओमप्रकाश राजभर की भारतीय जनता पार्टी के साथ एक आने की क्या संभावना बन सकती है? हालांकि इस पर अंतिम फैसला अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है, लेकिन इस 1 घंटे की मुलाकात ने कई चीजें साफ कर दीं. सबसे बड़ी बात यह कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए जिस महामोर्चे को बनाए जाने की बात चल रही थी, उसकी हकीकत अब समझ में आ रही है.

क्या बना जाएगा नया मोर्चा?
दरअसल, ओमप्रकाश राजभर, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, शिवपाल यादव और दूसरे छोटे दल मिलकर के एक मोर्चा बनाने की बात लगातार करते हैं, जो कि बीजेपी के खिलाफ लामबंदी करेगा और जो भी विपक्ष में मजबूत पार्टी होगी उसके साथ चुनावों के बाद जुड़ने का प्रयास करेगा. ऐसा माना जा रहा था कि ओमप्रकाश राजभर, असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव मिलकर छोटे दलों का मोर्चा बनाकर बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा करेंगे. लेकिन सूत्र बताते हैं कि अभी तक शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी के बीच में भी बात नहीं बन पाई है. राजभर और शिवपाल में भी कोई मजबूत बातें नहीं हुई, जिससे लगता है किस महामोर्चे की कल्पना धरातल पर नहीं आ पाएगी. दूसरी तरफ शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच मतभेद दूर होने और साथ आने की अटकलें लगातार चल रही हैं. ऐसे में अगर शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के साथ जाते हैं तो इस मोर्चे की कल्पना वैसे भी खत्म हो जाएगी. कहा यह जा रहा है कि शिवपाल यादव अपनी कुछ शर्तों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं जिससे कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक मजबूत चुनौती पेश की जा सके.

शिवपाल यादव और अखिलेश यादव का साथ आना हो सकता है अहम

अगर सियासी समीकरणों की बात करें तो शिवपाल यादव और अखिलेश यादव का एक साथ आना कई मायनों में बेहद अहम हो सकता है. शिवपाल यादव पिछले कई सालों से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी के साथ उनका गठबंधन हो जाए. हालांकि इस मुद्दे पर अखिलेश यादव खुलकर साफ नहीं बोलते, लेकिन उन्होंने भी कई मौकों पर सवाल पूछे जाने पर जवाब दिया है कि जो भी छोटे दल उनके साथ लड़ाई में शामिल होना चाहे उनका स्वागत है. चाचा शिवपाल के बारे में भी उन्होंने साफ तौर पर जवाब दिया है कि उनसे भी कोई परहेज नहीं है. यानी यह कहना गलत नहीं होगा की समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के बीच में आने वाले दिनों में गठबंधन हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो महामोर्चे के बाकी दल इसे स्वीकार नहीं करेंगे. बाद में भले ही सीटों के आकलन के हिसाब से दल सपोर्ट करने के लिए आ जाएं लेकिन अभी ओवैसी और राजभर जैसे लोग शामिल होते हैं तो उनके कोर वोटर्स पर असर पड़ेगा. साथ ही साथ समाजवादी पार्टी को भी मुस्लिम वोटरों से नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसीलिए मौजूदा समीकरण इशारा इस बात की ओर करते है कि शिवपाल यादव अपनी पार्टी का गठबंधन समाजवादी पार्टी से करें तो दोनो को ज्यादा फायदा हो सकता है.

सबसे बड़ा फायदा यह कि परिवार में कई सालों से चली आ रही मतभेद की कहानी का पटाक्षेप होगा और दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता ज्यादा ऊर्जा के साथ चुनाव में लड़ सकेंगे. इसके अलावा शिवपाल यादव का भी ज्यादा जोर समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुंचाने से ज्यादा इस पर रहेगा कि कैसे अपनी अहमियत को साबित कर सकें. इसलिए शिवपाल यादव अपने कार्यकर्ताओं के साथ दोगुने उत्साह से ज्यादा सीटें दिलाने की कोशिश करेंगे. शिवपाल यादव पिछले करीब 40 साल से समाजवादी पार्टी में हर तरीके से योगदान करते रहे हैं इसीलिए परिवार के मतभेदों से अलग उनकी पैठ भी पार्टी कार्यकर्ताओ में अच्छी है, जिसका सीधा फायदा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिल सकता है. इस लिहाज से अगर देखा जाए तो आने वाले दिनों में शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के आपस में मेल करने की संभावनाएं ज्यादा नजर आती हैं.

असदुद्दीन ओवैसी और राजभर का असर

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और सुहेलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, इन दोनों का असर यूपी के अलग-अलग जिलों में जातियों के आधार पर है. ओवैसी को माना जा रहा है कि वह ज्यादातर मुस्लिमों के वोट काटने का काम करेंगे, जोकि समाजवादी पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन बीजेपी के लिए फायदेमंद होगा. दूसरी तरफ ओमप्रकाश राजभर, राजभर बहुल इलाकों में अपना वर्चस्व होने की दावा करते हैं लेकिन ओमप्रकाश राजभर से अनबन होने के बाद बीजेपी ने अपने तरीके से अनिल राजभर और दूसरे पिछड़ों के नेताओं के जरिए धीरे धीरे इन इलाकों में पैठ बना ली है. इसलिए ओमप्रकाश राजभर चुनाव में कोई बहुत बड़ा असर डाल पाएंगे ऐसा संभव नहीं लगता है. इन सब कयासों के बीच भारतीय जनता पार्टी से ओमप्रकाश राजभर का मिलना साफ इशारा करता है कि कहीं न कहीं ओमप्रकाश राजभर की दाल दूसरी पार्टियों में नहीं गल रही है इसलिये वह एक बार फिर से बीजेपी में संभावनाएं तलाशने के लिए स्वतंत्र देव सिंह की शरण में पहुंचे हैं.
अब बीजेपी का आलाकमान इस कदम को कितना महत्व देता है या फिर आगे की क्या रणनीति अपनाता है, यह वक्त बताएगा. लेकिन ओमप्रकाश राजभर के बीजेपी नेता से मिलने से साफ पता चलता है कि  अभी तक छोटे दलों ने जो मोर्चा बनाने की कवायद की है उसमें कोई मजबूत तैयारी नहीं है. लिहाजा इसतथाकथित मोर्चे के संभावित खिलाड़ी अपनी तरह से अलग से भी संभावनाएं तलाश रहे है ताकि वो आने वाले वक्त में चुनावों के बाद कुर्सी से ज्यादा दूर ना रहे.

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UP: जहरीली शराब मामले में CM योगी का एक्शन जारी, अलीगढ़ और बुलंदशहर के सहायक आबकारी आयुक्त निलंबित

UP: जहरीली शराब मामले में CM योगी का एक्शन जारी, अलीगढ़ और बुलंदशहर के सहायक आबकारी आयुक्त निलंबित

Hooch Tragedy: उत्तर प्रदेश के आबकारी आयुक्त सेंथिल पांडियन के मुताबिक,' सहायक आबकारी आयुक्त डीएन सिंह बीते 2 वर्षो से वेब आसवानी में तैनात थे.'

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग की लाख कोशिशो के बावजूद जहरीली शराब (Poisonous Liquor) से मौतों का सिलसिला और भष्टाचार थमता नजर नहीं आ रहा है. जिसके चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के निर्देश पर शुक्रवार शाम बुलंदशहर में जहरीली शरीब से हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग के 2 सहायक आबकारी आयुक्तों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

दरअसल, योगी सरकार के कार्यकाल में आबकारी विभाग और अवैध शराब माफियाओं की मिलीभगत से बिकने वाली जहरीली शराब से अब तक करीब 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. जिसको लेकर समय-समय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाती रही है. उसी के क्रम में बुलंदशहर में जहरीली शराब से 6 लोगों की मौत के मामले में कडी कार्रवाई की गई है. जिसमें सहायक आबकारी आयुक्त डीएन सिंह और संजय त्रिपाठी को निलंबित कर, दोनों सहायक आबकारी आयुक्तों को प्रयागराज स्थित आबाकारी विभाग के मुख्यालय से संबंध कर दिया गया है.

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उत्तर प्रदेश के आबकारी आयुक्त सेंथिल पांडियन के मुताबिक,’ सहायक आबकारी आयुक्त डीएन सिंह बीते 2 वर्षो से वेब आसवानी में तैनात थे.’ इस दौरान बीते दिनों मदिरा की भराई को लेकर उच्चाधिकारियों से जांच कराई गई थी. जिसमें मदिरा की तीव्रता निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं मिली थी. जिस पर कड़ा रूख अपनाते हुए सहायक आबकारी आयुक्त डीएन सिंह को निलंबित कर दिया गया है.

राजकीय कार्यों में शिथिलता का आरोप
और साथ ही बुलंदशहर में तैनाती के दौरान 6 लोगों की जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में सहायक आबकारी आयुक्त संजय त्रिपाठी को भी निलंबित किया गया है. और विभागीय कार्यो में लापरवाही के आरोप में निलंबित किये गये इन दोनों सहायक आबकारी आयुक्तों को आबकारी मुख्यालय सें संबद्ध कर दिया है. आबकारी आयुक्त ने बताया कि भविष्य में कोई अन्य अधिकारी और कर्मचारी अपने राजकीय कार्यों में शिथिलता बरतता है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी.

सरकारी मदद की उम्मीद पाले चल बसा टोक्यो पैरालंपिक-81 में 3 गोल्ड जीतने वाला खिलाड़ी

सरकारी मदद की उम्मीद पाले चल बसा टोक्यो पैरालंपिक-81 में 3 गोल्ड जीतने वाला खिलाड़ी

टोक्यो पैरालंपिक-1981 में 3 गोल्ड जीतने वाले पैरालंपिक खिलाड़ी कौशलेंद्र सिंह की मौत इलाज के अभाव में बुधवार को हो गई है. उन्होंने अपनी मदद के लिए गुहार लगाई थी, पर उन्हें सरकारी मदद नहीं मिल सकी. वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे.

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लखनऊ. टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने वाले पैरालंपिक खिलाड़ियों का इन दिनों पूरे देश में जोरदार स्वागत और सम्मान किया जा रहा है. देश के खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात कर उनका अभूतपूर्व स्वागत और सम्मान किया. इन खिलाड़ियों को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया गया. लेकिन इस बीच दुर्भाग्यवश टोक्यो पैरालंपिक-1981 में भारत के लिए 3 गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले पैरालंपिक खिलाड़ी कौशलेंद्र सिंह की इलाज के अभाव में मौत हो गई है.

किडनी के इलाज के लिए लगाई थी मदद की गुहार

55 वर्ष के पैरालंपिक खिलाड़ी कौशलेंद्र सिंह बीते कुछ दिनों से यूरिनरी ब्लैडर में गांठ के चलते असहनीय दर्द से जूझ रहे थे. इस बीमारी के इलाज के लिए कौशलेंद्र शाहजहांपुर से उत्तराखंड और दिल्ली तक भटकते रहे. इस बीच उन्हें हरिद्वार स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम से रेफर किए जाने पर नई दिल्ली स्थित RML में भर्ती तो कर लिया गया. लेकिन 2 दिन बाद कुछ और जांच कराकर आने की बात कहकर डिस्चार्ज कर दिया गया. जिसके बाद प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के पैसे न होने के चलते कौशलेंद्र सिंह ने अपने भतीजे दीपक के जरिये ट्वीट कराकर संबंधित मंत्रियों और संस्थानों से अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगाई थी. लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के अलावा उन्हें कही से कोई मदद का भरोसा नहीं मिला. इस बीच मदद मिलने के पहले ही बुधवार की रात कौशलेंद्र सिंह इलाज के अभाव में इस दुनिया से विदा हो गए.

टोक्यो पैरालंपिक-1981 में जीते थे 3 गोल्ड मेडल

दरअसल, UP के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद में रहने वाले कौशलेंद्र सिंह 12 वर्ष की उम्र में जामुन के पेड़ से गिर गए थे. उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और इसकी वजह से दोनों पैर खराब हो गए थे. बावजूद कौशलेंद्र सिंह ने अपने बुलंद इरादों और हौसले की बदौलत 1981 में जापान में आयोजित टोक्यो पैरालंपिक में हिस्सा लिया और अपने शानदार प्रर्दशन से 3 गोल्ड मेडल जीतकर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया. कौशलेंद्र सिंह ने टोक्यो पैरालंपिक में 1500 मीटर और 100 मीटर व्हीलचेयर रेस में गोल्ड मेडल के साथ 100 मीटर की बाधा दौड़ में भी गोल्ड मेडल जीता था. साथ ही राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पैरालंपिक खेलों में कई मेडल जीतकर प्रदेश और देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया था.

इंदिरा गांधी ने किया था सम्मानित

टोक्यो पैरालंपिक-1981 के गोल्ड मेडलिस्ट कौशलेंद्र सिंह ने बीते 12 सितंबर को न्यूज18 से बात करते हुए कहा था कि आज टोक्यो पैरालंपिक-2020 में शानदार प्रर्दशन कर देश का नाम रोशन करने वाले अपने खिलाडियों पर बेहद गर्व हो रहा है. क्योंकि आज हमारे साथियों ने दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद किया है. टोक्यो पैरालंपिक-1981 में मैंने भी 3 गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश का झंडा बुलंद किया था. गोल्ड मेडल जीतने पर मेरा भी इसी तरह से स्वागत-सम्मान हुआ था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी ने हमसे मुलाकात कर हमारे साथ लंच किया था. हमें सम्मानित करते हुए भविष्य में भी हमारी पूरी मदद का आश्वासन उन्होंने दिया था. लेकिन उसके बाद नेताओं और अधिकारियों ने हमारे साथ फोटो तो जरूर खिंचवाई, लेकिन मदद के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया.

पीएम के जन्मदिन पर CM योगी और डिप्टी सीएम ने दी बधाई, कहा- देश को आत्मनिर्भर बना रहे मोदी

पीएम के जन्मदिन पर CM योगी और डिप्टी सीएम ने दी बधाई, कहा- देश को आत्मनिर्भर बना रहे मोदी

PM Modi Birthday: डिप्टी सीएम मौर्य ने लिखा,' एक-एक पल मां भारती की सेवा में समर्पित रहने वाले, विश्व के सबसे शक्तिशाली नेता, देशवासियों के हृदय सम्राट तथा हम सभी के प्रेरणा स्रोत व मार्गदर्शक, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 17, 2021, 17:25 IST
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लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का शुक्रवार को 71वां जन्मदिन है. इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने पीएम मोदी को बधाई दी. सीएम योगी ने कहा, अंत्योदय से आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं. प्रभु श्री राम की कृपा से आपको दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति हो. आजीवन मां भारती की सेवा का परम सौभाग्य आपको प्राप्त होता रहे.

उधर, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी ट्वीट कर पीएम मोदी को बधाई दी है. डिप्टी सीएम मौर्य ने लिखा,’ एक-एक पल मां भारती की सेवा में समर्पित रहने वाले, विश्व के सबसे शक्तिशाली नेता, देशवासियों के हृदय सम्राट तथा हम सभी के प्रेरणा स्रोत व मार्गदर्शक, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं.

सीएम योगी ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की बधाई

सीएम योगी ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की बधाई

वाराणसी में लोगों ने जलाए दीए
पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर वाराणसी में लोगों ने मिट्टी के दीए जलाए और 71 किलो के लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद बांटा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर भाजपा आज से सेवा एवं समर्पण अभियान शुरू कर रही है. इसके तहत भाजपा का चिकित्सा प्रकोष्ठ 17 से 20 सितंबर तक स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन करेगा. युवा मोर्चा के कार्यकर्ता रक्तदान शिविर, जबकि अनुसूचित मोर्चा के कार्यकर्ता गरीब बस्तियों में फल और जरूरी सामानों का वितरण करेंगे.

UP Crime News: रक्तदान के नाम पर 'मिलावटी खून' की सप्लाई, डॉक्टर समेत 2 गिरफ्तार

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Blood Donation: अमित नागर के मुखबिर की सूचना पर लखनऊ -आगरा एक्सप्रेसवे पर डॉ अभय की इकोस्पोर्ट कार को एसटीएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीम रोका था. तलाशी में उसकी कार से ही कुछ ब्लड यूनिट और ब्लड डोनेशन के फर्जी कागजात बरामद हुए थे.

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लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ में मिलावटी खून की सप्लाई करने वाले दो आरोपी पकड़े गए हैं आरोपियों के पास से भारी मात्रा में ब्लड पैकेट बरामद हुए हैं. एसटीएफ से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार सप्लायर में एक डॉक्टर भी शामिल है.आरोपियों के पास 100 यूनिट ब्लड, 21 ब्लड बैंकों के फर्जी कागजात और रक्तदान शिविर के दो बैनर भी बरामद हुए है. गिरफ्तार आरोपी डॉ अभय प्रताप सिंह यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज सैफई इटावा में असिस्टेंट प्रोफेसर है.

इस गैंग का खुलासा करने वाले यूपी एसटीएफ के डीएसपी अमित नागर ने बताया कि पंजाब, राजस्थान, हरियाणा आदि राज्यों में ब्लड डोनेट करने के लिए लोग आसानी से से तैयार हो जाते हैं. इसी चलन का फायदा उठाते हुए डॉक्टर अभय प्रताप सिंह ने इन राज्यों में ब्लड डोनेशन कैंप लगाने शुरू कर दिए. कैंप में इकट्ठे किए गए ब्लड यूनिट को फर्जी कागजातों के जरिए यह गिरोह यूपी लाता था और सेलाइन वाटर मिलाकर इस ब्लड को दोगुना कर लखनऊ और आसपास के जिलों में बेचा जाता था. एसटीएफ के डीएसपी अमित नागर ने बताया की आमतौर पर 1200 से 1600 रुपए तक मिलने वाले एक यूनिट ब्लड यह गिरोह दलालों के जरिए 4 से 6000 रुपए में बेचा करता था.

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कार से मिले फर्जी कागजात

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर डॉ अभय की इकोस्पोर्ट कार को एसटीएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीम रोका. तलाशी में उसकी कार से ब्लड यूनिट और ब्लड डोनेशन के फर्जी कागजात बरामद हुए थे. शुरुआती पूछताछ के बाद जब डॉ अभय के आवास पर छापेमारी की गई तो उसके फ्रीज से भी ब्लड यूनिट बरामद हुए. एसटीएफ के डीएसपी ने बताया कि आरोपी डॉ अभय प्रताप सिंह केजीएमयू से एमबीबीएस और पीजीआई लखनऊ से एमडी कर चुका है. डीएसपी अमित नागर ने बताया कि रिमांड पर लेकर आरोपियों से इनके पूरे गिरोह के बारे में सख्ती से पूछताछ की जाएगी.

UP Anganwadi Recruitment 2021: यूपी आंगनवाड़ी भर्ती में इन उम्मीदवारों का आवेदन निरस्त हो सकता है, जानिए पूरी बात

UP Anganwadi Recruitment 2021: यूपी आंगनवाड़ी भर्ती में इन उम्मीदवारों का आवेदन निरस्त हो सकता है, जानिए पूरी बात

UP Anganwadi Recruitment 2021: भर्ती के लिए जारी अधिसूचना में कुछ शर्तें एवं नियमों का भी जिक्र किया गया था. जिनको पूरा ना करने पर उम्मीदवारों का आवेदन भी निरस्त किया जा सकता है.ऐसे ही कुछ नियमों की जानकारी नीचे साझा की जा रही है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 17, 2021, 17:14 IST
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नई दिल्ली. UP Anganwadi Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश बाल विकास सेवा एवं पुष्टहार विभाग द्वारा आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी और सहायिका पदों पर भर्ती जारी है. गौरतलब है कि प्रदेश में काफी सालों बाद इन पदों पर इतनी बड़ी निकाली गई है. भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया के शुरुआत को भी काफी समय हो चुका है. अभी भी कई जिलों में भर्ती प्रक्रिया जारी है. 58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के लिए होने वाली इस भर्ती के लिए केवल महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं.

भर्ती के लिए जारी अधिसूचना में कुछ शर्तें एवं नियमों का भी जिक्र किया गया था. जिनको पूरा ना करने पर उम्मीदवारों का आवेदन भी निरस्त किया जा सकता है.ऐसे ही कुछ नियमों की जानकारी नीचे साझा की जा रही है.

UP Anganwadi Recruitment 2021: इन नियमों का रखें ध्यान
-आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को एप्लीकेशन फॉर्म में निवास प्रमाणपत्र की कॉपी लगाना अनिवार्य है. जो उम्मीदवार ऐसा नहीं करेंगें, उनका आवेदन निरस्त माना जाएगा.
-जिस पद के लिए आवेदन किया जा रहा है, आवेदन पत्र में उसका उल्लेख अनिवार्य है.
-इसके अलावा यदि उम्मीदवार ग्राम पंचायत की मूल निवासिनी नहीं है और हाल ही में वहां रहना शुरू किया है तो ऐसे में ग्राम प्रधान से निवास प्रमाणपत्र बनवाना होगा और आवेदन फार्म में लगाना होगा.
-साथ ही यदि फॉर्म में शैक्षिक योग्यता समेत अन्य जरूरी प्रमाणपत्र नहीं लगाया है तो भी आवेदन निरस्त माना जाएगा.

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समाजवादी लोग सीधे हैं, सोशल मीडिया में BJP के 'ई-रावण' बैठे हैं: अखिलेश यादव

समाजवादी लोग सीधे हैं, सोशल मीडिया में BJP के 'ई-रावण' बैठे हैं: अखिलेश यादव

Lucknow News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि विश्वकर्मा समाज का मुख्यमंत्री जी ने अपमान किया है. हमने विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी की थी. भगवान हनुमान का गदा, भगवान कृष्ण का चक्र विश्वकर्मा समाज ने ही बनाया था. उनकी ही छुट्टी खत्म कर दी.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) कार्यालय पर अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासभा का कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विश्वकर्मा समाज का अपमान करने का आरोप लगाया. साथ ही ऐलान किया कि यूपी में सत्ता में आने पर समाजवादी पार्टी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी बहाल करेगी. यही नहीं लखनऊ में गोमती नदी के किनारे भगवान विश्वकर्मा के भव्य मंदिर का निर्माण होगा.

अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बारिश से भारी क्षति और जान का भी नुकसान हुआ. सरकार ने कोई इंतजाम नहीं किया था. अब ये सरकार जाने वाली है, सरकार का सफाया होगा. इस सरकार में हर वर्ग का आदमी अपमानित हुआ है. इस सरकार ने झूठ का रिकॉर्ड बना दिया.

कहीं बीजेपी वालों का ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट भी है, जहां से झूठ बोलना सिखाया जाता है. समाज मे हर तरफ झूठ फैलाया जा रहा है. अखिलेश ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री जी ने विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी खत्म कर दी. विश्वकर्मा समाज का मुख्यमंत्री जी ने अपमान किया है. हमने विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी की थी. भगवान हनुमान का गदा, भगवान कृष्ण का चक्र विश्वकर्मा समाज ने ही बनाया था और उनकी ही छुट्टी खत्म कर दी.

अखिलेश ने कहा कि सरकार सिर्फ नाम बदलने का सिर्फ काम कर रही है. उन्होंने पूछा- 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना कहां गया? मुख्यमंत्री ने 1 ट्रिलियन इकॉनमी के लक्ष्य की बात कही थी, कहां है?  लखनऊ में बड़े-बड़े कागजों पर दस्तखत हुआ था. बड़े-बड़े एमओयू साइन हुए थे.

अखिलेश यादव ने कहा कि कोरोना में लोगों की कितनी जान चली गयी? अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं था, बेड नहीं था. कोरोना काल में समाजवादियों की चलाई गई एम्बुलेंस काम आयी. ऐसा लॉक डाउन किया कि गरीब की जान चली गयी. सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन नहीं किया. गंगा मां में लाशें बह रही थीं.

‘उत्तर प्रदेश में डीएम और ईवीएम से रहना होगा सावधान’

उन्होंने कहा कि समाजवादी लोग सीधे हैं. मोबाइल पर जो चीजें आ जाती हैं, हम यकीन कर लेते हैं. सोशल मीडिया में बीजेपी के “ई-रावण” बैठे हैं. यूपी का चुनाव देश का सबसे बड़ा चुनाव है. बिहार में बेईमानी हुई थी, बिहार में DM और EVM ने बेईमानी की लेकिन बंगाल में जनता ने सही जवाब दिया. उत्तर प्रदेश में भी हमें दोनों (DM & EVM) से सावधान रहना होगा.

Weather Report: UP में आफत की बारिश से जिंदगी हुई जाम, आज और कल बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज

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UP Weather Update: लखनऊ समेत यूपी के कई जिलों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. मकान ढहने, दीवारें, पेड़ गिरने से अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है, कई घायल हैं. राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों को आज और कल दो दिन बंद रखने का फैसला किया है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बारिश से हाहाकार मचा हुआ है. राजधानी लखनऊ (Lucknow Rain) समेत कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है. पूरे राज्य में हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिलों में स्कूल और कॉलेजों को 2 दिनों के लिए बंद करने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर मकान ढहने और दीवार गिरने की वजह से अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी हैं, जबकि कई घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. फिलहाल सरकार की तरफ से कोई अधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है.

उधर, बारिश के चलते जगह-जगह मकान, दीवार, पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए. रेलवे ट्रैक पर ओएचई लाइन टूट जाने से कई ट्रेनों के पहिए थम गए. वहीं विमान सेवा बाधित हुई है. भारी बारिश का असर सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ में देखने को मिला.

कई जिलों में रेड अलर्ट

जानकारी के अनुसार इस साल 28 जुलाई को इस सीजन की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी. उस दौरान 24 घंटे में कुल 115 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी थी. इससे पहले 2012 में 24 घंटे के दरम्यान कुल 138 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी थी. गौरतलब है कि लखनऊ समेत कई जिलों में मौसम विभाग ने बारिश को लेकर रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है. वहीं राजधानी में बुधवार से शुरू हुई बारिश गुरुवार को भी लगातार होती रही. ऐसे में पूरे शहर में जलभराव की समस्या खड़ी हो गई है.

सीएम ने दिए निर्देश-तेजी से हों राहत कार्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि के को देखते हुए सभी मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को पूरी तत्परता से राहत कार्य संचालित करने के निर्देश दिए हैं. सीएम ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत कार्यों पर नजर रखने के लिए भी कहा है. इसके साथ ही अगले 02 दिन, 17 व 18 सितम्बर को प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों सहित सभी शिक्षण संस्थानों को बन्द रखने का निर्देश दिया गया है.

सीएम योगी ट्वीट कर कही ये बात

सीएम योगी ट्वीट कर कही ये बात

नुकसान का आकलन करने के निर्देश

सीएम ने इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाई जाए. इसके साथ ही जलजमाव की स्थिति में पानी को निकालने की प्राथमिकता पर व्यवस्‍था करवाई जाए. सीएम योगी ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों के अधिकारी अपने क्षेत्र में बारिश के चलते हुए नुकसान का सही सही आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

आज से मिलेगी कुछ राहत, तेवर ढीले पड़ने की उम्मीद

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ से कम दबाव का सिस्टम बनने से चल रही नम हवाओं के चलते ऐसा मौसम बना हुआ है. वेदर चैनल के मुताबिक यह सिस्टम अगले कुछ दिनों तक मध्य प्रदेश के पूर्वी व मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक बना रहेगा, जिससे भारी और मद्धम दर्जे की बारिश होती रहेगी. शुक्रवार के बाद यह सिस्टम उत्तर पश्चिम की तरफ रुख करेगा, जिससे यूपी में बारिश के तेवर ढीले पड़ने की उम्मीद है.

UP में सस्ती हो सकती है बिजली! नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर पावर कॉर्पोरेशन से मांगा जवाब

UP में सस्ती हो सकती है बिजली! नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर पावर कॉर्पोरेशन से मांगा जवाब

UP News: उपभोक्ता परिषद के बिजली दरों में कमी करने के लिए दाखिल प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियन्ता (टैरिफ यूनिट) से 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश प्रदेश में बिजली दरों (Power Tariff) में कमी को लेकर कवायद तेज होती दिख रही है. दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यूपी में विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर उदय व ट्रू-अप में कुल लगभग 20,596 करोड़ रुपए निकल रहा है. इसके एवज में प्रदेश के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी की राहत दी जानी चाहिए. उपभोक्ता परिषद की तरफ से इस संबंध में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UP Electricity Regulatory Commission) में याचिका भी दाखिल की गई है.

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन के निर्देश पर आयोग सचिव संजय कुमार सिंह द्वारा उपभोक्ता परिषद के बिजली दरों में कमी करने के लिए दाखिल प्रस्ताव पर पावर कॉर्पोरेशन के मुख्य अभियन्ता टैरिफ यूनिट से 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.

दरअसल आज शुक्रवार को परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन आर पी सिंह से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने बिजली दरों में कमी कराने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पूर्व दाखिल पुनर्विचार याचिका के क्रम में सौंपा.

उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सदस्यगण विनोद कुमार श्रीवास्तव व कौशल किशोर शर्मा से भी इस मुददे पर चर्चा की और उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की दिशा में आयोग से विचार करने की मांग उठाई. इस पर आयोग के चेयरमैन और सदस्यों ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन से जवाब आने पर आयेाग नियमों की परिधि में कार्यवाही करेगा.

वहीं इस संबंध में उपभोक्ता परिषद का कहना है कि प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा से भी उनकी बात हुई है और शनिवार को वह उनसे इस मामले मुलाकात करेगा.

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 2 अगस्त, 2021 को बिजली दर जारी होने के तुरन्त बाद उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर निकल रहे करोडों रुपयों के एवज में आयोग में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. जिसमें यह मुददा उठाया गया था कि प्रदेश में सभी 3 करोड़ विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों को निकाला जाय तो एकमुश्त बिजली दरों में 34 प्रतिशत कमी हो जाएगी.

लेकिन बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थित को देखते हुए उपभोक्ता परिषद् ने अगले पांच वर्षो तक हर वर्ष लगभग 6.8 प्रतिशत रेगुलेटरी रिबेट व विद्युत दरों में कमी का प्रस्ताव सौंपते हुए आयोग से टैरिफ पर पुनर्विचार की मांग उठाई गयी थी.

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का पत्र

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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का पत्र

अवधेश वर्मा का कहना है कि बिजली कम्पनियों पर उपभोक्ताओं का इस बार भी कुल लगभग 1059 करोड़ सरप्लस निकला है. वही प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर पहले भी कुल लगभग 19537 करोड़ उदय व ट्रूप में निकला था. सब मिलाकर देखा जाय तो प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर कुल लगभग 20596 करोड़ रुपया सरप्लस हो गया है.

उपभोक्ता परिषद ने कहा यदि बिजली दरों में उपभोक्ताओ की निकले लगभग रुपया 20596 करोड़ का लाभ वर्तमान अनुमोदित आकलित राजस्व 60701 करोड़ के एवज में निकाला जाय, तो एकमुश्त बिजली दरों में 34 प्रतिशत कमी करनी पड़ेगी. बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थित को देखते हुए उपभोक्ता परिषद् ने पांच वर्षो तक कमी निम्न वत प्रस्तावित किया है, जिससे उपभोक्ताओं का हिसाब बिजली कम्पनियों से बराबर हो सके. वर्ष 2021-22 से लेकर हर साल बिजली दरों में 6.8 प्रतिशत कमी की जाए तो वर्ष 2025-26 तक हिसाब बराबर हो जाएगा.

परिषद ने आयोग से अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा कि जब उपभोक्ताओं पर बिजली कम्पनियों का ट्रूप में पैसा निकला तो कई वर्षों तक प्रदेश के उपभोक्ताओं ने रेगुलेटरी सरचार्ज पहले 3.71 प्रतिशत और 4.28 प्रतिशत भरा था. अब जब प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर रुपया 20596 पैसा निकल रहा तो बिजली दरे कम होनी चाहिए.

AAP का फ्री बिजली का वायदा: दिल्ली में तो चल गया था पर क्या UP में खिलायेगा गुल?

AAP का फ्री बिजली का वायदा: दिल्ली में तो चल गया था पर क्या UP में खिलायेगा गुल?

Lucknow News: प्रयागराज के गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में असिस्टेण्ट प्रोफेसर अर्चना सिंह कहती हैं कि ऐसे वायदों से इतना जरूर फायदा मिलता है कि आपकी जमीन तैयार होने लगती है.

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लखनऊ. 2022 में होने जा रहे यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election-2022) के लिए वायदों की झड़ी लग गयी है. फ्री-फ्री-फ्री होने लगा है. सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party) के उस वायदे की हो रही है, जिसमें पार्टी ने कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है तो 300 यूनिट तक फ्री बिजली (Free Electricity) मिलेगी. लोग हिसाब लगाने लगे हैं कि यदि ऐसा होता है तो हर महीने उन्हें कितने का फायदा मिल जायेगा?

फ्री बिजली पर हो रही चर्चा को देखकर तो ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी का यूपी के चुनाव में जलवा कायम हो जायेगा लेकिन, क्या फ्री बिजली का हिसाब क्या इतना सीधा है? क्या इस वायदे के सहारे आम आदमी पार्टी यूपी में सरकार बना लेगी? भई, दिल्ली में तो उसने बिजली के सहारे सरकार बना ही ली थी.

लेकिन जानकार इससे उलट सोचते हैं. उनका कहना है कि दिल्ली और यूपी में फर्क बड़ा है.  दिल्ली में फ्री बिजली का वायदा काम कर गया और यूपी में ये कितना काम करेगा? इसे समझने से पहले कुछ बातों को जानना जरूरी है. यूपी में उसी पार्टी को चुनाव में सीटें मिलती हैं जिसका अपना कुछ कैडर वोट होता है. ये हर हाल में अपनी पार्टी के साथ खड़ा रहता है. बताने की जरूरत नहीं कि यूपी में किस पार्टी का कौन सा कैडर वोट है.

किसी भी वायदे का इन पर फर्क नहीं पड़ता. लोक लुभावन वायदों का असर फ्लोटिंग वोटरों पर पड़ता है. यूपी जैसे जातिगत खेमे में बंटे राज्य में ऐसे फ्लोटिंग वोटरों की संख्या लगभग 10 फीसदी मानी जा सकती है. ऐसे में ये सभी किसी एक पार्टी के साथ हो भी जाएं तब भी उसका जीतना नामुमकिन है.

इसकी नज़ीर पिछले चुनाव की सामने है. 2017 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने “कर्जा माफ और बिजली बिल हाफ” का नारा दिया था. राहुल गांधी ने पूरे यूपी में पदयात्रा भी की थी लेकिन, नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहा. कैडर वोटों को गंवा चुकी कांग्रेस के ये वायदे कुछ नहीं कर पाये. उसे सिर्फ उन्हीं सीटों पर जीत मिली, जहां से उसके कैंडीडेट की अपनी पकड़ थी. पार्टी को कुछ नहीं मिला.

ऐसे में सवाल उठता है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में जीत कैसे मिल गयी? दिल्ली का सूरते-ए-हाल यूपी से अलग है. पार्टी के संघर्ष के साथ-साथ फ्लोटर वोटरों की संख्या का मसला भी बड़ा है. पार्टी ने चुनाव से बहुत पहले बिजली को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा किया था. सीएम अरविंद केजरीवाल खुद मैदान में उतरे थे और बिजली के खम्भों पर चढ़कर विरोध स्वरूप कनेक्शन काट रहे थे. बिजली बिलों की होली जलाई जा रही थी. इतने संघर्ष के बाद फ्री बिजली का वायदा सामने आया था.

यूपी में पार्टी की ओर से ऐसा कोई आंदोलन खड़ा नहीं किया जा सका है. फिर दिल्ली एक मेट्रोपॉलिटन सिटी है. यहां जातीयता का दायरा सिमटा हुआ है. मतलब फ्लोटिंग वोटरों का दबदबा है.

यूपी जैसे राज्य में सिर्फ फ्लोटिंग वोटरों के सहारे जीत नहीं मिल सकती. सूबे में तीनों मजबूत पार्टियों भाजपा, सपा और बसपा के पास कम से कम 20 फीसदी संख्या के काडर वोट हैं. इसमें दस फीसदी फ्लोटिंग वोटरों के जुड़ते ही एकतरफा जीत मिल जाती है. यानी 30 फीसदी के आसपास वोट मिल गये तो सरकार बन गयी. आम आदमी पार्टी फ्लोटिंग वोटरों को तो जुटा सकती है लेकिन कैडर वोटरों की कमी को कैसे पूरा करेगी?

प्रयागराज के गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में असिस्टेण्ट प्रोफेसर अर्चना सिंह ने कहा कि ऐसे वायदों से इतना जरूर फायदा मिलता है कि आपकी जमीन तैयार होने लगती है. इस चुनाव में भले ही ज्यादा फायदा मिले न मिले लेकिन, अगले चुनाव तक कुछ फायदा मिलने की उम्मीद की जा सकती है.

UP News Live Updates: ग्रेटर नोएडा में फर्जी निकला छात्रा का अपहरण, प्रेमी संग हुई थी फरार

UP News Live Updates: ग्रेटर नोएडा में फर्जी निकला छात्रा का अपहरण, प्रेमी संग हुई थी फरार

Uttar Pradesh News Live: उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट को घटना का जल्‍दी खुलासा करने के लिए 1 लाख रुपये का ईनाम देने की घोषण की है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 17, 2021, 14:26 IST
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UP News Live Updates 17 September 2021: यूपी के ग्रेटर नोएडा के बादलपुर थाना क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक (Morning Walk) पर निकली छात्रा के अपहरण की कहानी फर्जी निकली (Fake Kidnapping Story) है. दरअसल छात्रा के अपहरण की कहानी परिवारजनों ने ही रची थी, क्‍योंकि वह एक दिन पहले प्रेमी के साथ घर से फरार हो गई थी. वहीं, परिवार ने अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में अपहरण की साजिश रच डाली. यही नहीं, उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट को घटना का जल्‍दी खुलासा करने के लिए 1 लाख रुपये का ईनाम देने की घोषण की है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के ज्यादातर इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश (Incessant Rain) ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. शुक्रवार सुबह से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का सिलसिला जारी है. सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर मकान ढहने और दीवार गिरने की वजह से अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी हैं, जबकि कई घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. फिलहाल सरकार की तरफ से कोई अधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है.

यूपी में भारी बारिश को देखते हुए योगी सरकार ने दो दिन यानी की 17 और 18 सितंबर को प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेज को बंद रखने का ऐलान कर दिया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने कहा, उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के चलते 50 लोगों की मृत्यु, हृदय विदारक घटना! मृतकों की आत्माओं को शांति दे भगवान. शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना. पीड़ित परिवारों को उचित मुआवज़ा प्रदान करे सरकार.

कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट
विभाग की ओर से कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. बारिश के साथ साथ 87 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के तेज झोंके भी चलेंगे. जिन जिलों में बारिश जारी रहेगी, वह जिले हैं- अमेठी, अयोध्या, बाराबंकी, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, बरेली, पीलीभीत, बदायूं, कासगंज, एटा, मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर और नोएडा.

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