आपके लिए इसका मतलब: CM योगी के ब्यूरोक्रेटस नहीं सुन रहे MP-MLA और मंत्रियों की बात, IGRS पर लगा शिकायतों का अंबार

यूपी सरकार के पोर्टल पर करीब 2 करोड़ 85 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.

यूपी सरकार के पोर्टल पर करीब 2 करोड़ 85 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.

यूपी में योगी सरकार (Yogi Government) ने इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम लागू कर रखा है जिसे आईजीआरएस पोर्टल (IGRS Portal) के रूप में जाना जाता है. इस पर सूबे के मंत्री, विधायक और सांसद भी जमकर शिकायत दर्ज कर रहे हैं. अब तक मुख्यमंत्री के इस पोर्टल पर करीब 2 करोड़ 85 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में सरकारी अफसरशाही के चलते केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि मंत्री, सांसद और विधायक भी परेशान हैं. अब उनकी यह परेशानी शिकायतों के रूप में सामने आ रही है. दरअसल उत्तर प्रदेश में योगी सरकार (Yogi Government) ने इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम लागू कर रखा है जिसे आईजीआरएस पोर्टल (IGRS Portal) के रूप में जाना जाता है. इसमें कोई भी सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत कर सकता है. हाल के दोनों में आम आदमी के अलावा मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने भी आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज करवाना शुरू कर दी हैं, जिससे काफी चौंकाने वाली बात सामने आई है.

इन माननीयों की शिकायत से पता चलता है कि प्रदेश में तमाम अफसर मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की बात को भी तवज्जो नहीं देते हैं और उनके सुझाए गए कार्यों को लेकर बेहद लेटलतीफी करते हैं. इस बारे में कई बार मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी यह नेता लोग शिकायत कर चुके हैं.

मंत्री, विधायक और सांसद दर्ज कर रहे शिकायत

अगर आईजीआरएस के आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश की राज्य मंत्री स्वाति सिंह (Swati Singh) ने नगर निगम को कॉलोनी हैंडओवर करने के मामले में आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायत की है, तो वहीं लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से सांसद कौशल किशोर (MP Kaushal Kishore) ने कई शिकायतें आईजीआरएस पर दर्ज कराई हैं.
उत्तर प्रदेश के कई विधायकों जिनमें लखनऊ से विधायक सुरेश श्रीवास्तव, विधायक नीरज बोरा, बदायूं के विधायक धर्मेंद्र शाक्य, कासगंज के विधायक देवेंद्र प्रताप, बरेली के विधायक डॉ. अरुण कुमार, कानपुर नगर के विधायक सुरेंद्र मैथानी और महोली के विधायक शशांक त्रिवेदी ने भी अफसरों की कई मामलों में लेटलतीफी,अनदेखी और जनता के नुमाइंदों की बात न सुनने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की है.


बता दें कि अब तक मुख्यमंत्री के इस पोर्टल पर करीब 2 करोड़ 85 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. माननीयों की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस बात को बेहद गंभीरता से लिया है और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश देने के साथ-साथ पूरे प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स को चेतावनी भी दी है कि मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की शिकायतों और उनके सुझावों को वह बेहद गंभीरता से लें और इनका जल्द निस्तारण की व्यवस्था करें. अगर इन आदेशों की अनदेखी की जाएगी तो संबंधित अधिकारी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
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