खुलासा: जानिए आखिर फर्जीवाड़े के लिए अनामिका शुक्ला को ही क्यों बनाया गया मोहरा?
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खुलासा: जानिए आखिर फर्जीवाड़े के लिए अनामिका शुक्ला को ही क्यों बनाया गया मोहरा?
सामने आई असली अनामिका शुक्ला

इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए एक ऐसे कैंडिडेट की जरूरत थी जिसका एकैडमिक कैरियर शानदार रहा हो.

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लखनऊ. अनामिका शुक्ला (Anamika Shukla) का नाम हर किसी की जुबान पर है. इस नाम के जरिये शिक्षा विभाग के सबसे अनोखे फर्जीवाड़े को अंजाम जो दिया गया है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा कि आखिर इस फर्जीवाड़े के लिए अनामिका शुक्ला को ही क्यों चुना गया ? News 18 इसका खुलासा कर रहा है. इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए एक ऐसे कैंडिडेट की जरूरत थी जिसका एकैडमिक कैरियर शानदार रहा हो. अनामिका शुक्ला इस जरूरत को पूरा कर रही थीं. सभी परीक्षाओं में अव्वल.

शानदार एकैडमिक कैरियर मुख्य वजह

गोंडा जिले में सामने आई अनामिका के डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि आखिर रिंग मास्टर ने अनामिका को क्यों चुना? उसे ये पता था कि अनामिका के इतने शानदार नंबर हैं कि जहां भी वो फॉर्म भरेगी मेरिट में आ जायेगी. जब अनामिका ने चयन के बावजूद कहीं भी जोइनिंग नहीं ली तो खेल और भी आसान हो गया. यही वजह रही कि एक साथ कई जिलों में उनके दस्तावेज के आधार पर नौकरी हथियाई गयी.



कस्तूरबा विद्यालय से पढ़ी हैं अनामिका
कितनी अजीब बात है कि जिस स्कूल में अनामिका के नाम पर फ़र्ज़ी शिक्षिकाएं रखी गयीं, असली अनामिका उसी कस्तूरबा विद्यालय से पढ़ी हैं. उनका हर जिले में चयन आसान था और हुआ भी क्योंकि उनके मार्क्स बहुत अच्छे हैं. अनामिका को हाई स्कूल में 77 परसेंट नंबर मिले थे. गोंडा के कस्तूरबा स्कूल से पढ़ते हुए 2007 में हाई स्कूल में उन्हें 600 में से 461 नंबर मिले. 5 सब्जेक्ट में उन्हें डिस्टिंक्शन मिला था. 2009 में इंटर में 79 परसेंट मार्क्स मिले थे. कुल 500 में से 393. फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में उन्हें डिस्टिकनशन मिला. बीएससी में जरूर उन्हें 60 फीसदी से कम अंक मिले थे लेकिन बीएड में फिर उन्हें 60 फीसदी से ज्यादा नंबर मिले हैं. टीईटी में उन्हें 150 में से 91 नंबर मिले. यानी शानदार कैरियर.

इतनी मेरिट पर कस्तूरबा के लिए उनके चयन की गारंटी थी. इसी वजह से रिंगमास्टर ने अनामिका शुक्ला को चुना. वैसे तो अनामिका ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 5 जगहों पर अप्लाई किया था, लेकिन इनके डॉक्युमेंट्स के आधार पर 20 और जगहों पर इनके नाम पर फॉर्म डाले गए. शानदार नंबरों के बिनाह पर चयन तय था इसीलिए अनामिका को मोहरा बनाया गया. चयन के बाद अनामिका के न जॉइन करने से रिंगमास्टर के लिए रास्ता और साफ हो गया. शिक्षा विभाग से अनामिका के दस्तावेज हासिल किए. फिर उसकी डुप्लीकेट ओरिजिनल बनवाये और धड़ाधड़ खेल शुरू कर दिया.

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