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शादी के बाद श्याम प्रताप बना उमर, पत्‍नी राजेश्वरी बनी रज़ि‍या, 'घर वापसी' के लिए ससुर ने दिया था ईंट भट्ठे का ऑफर लेकिन...

शादी के बाद श्याम प्रताप बना उमर, पत्‍नी राजेश्वरी बनी रज़ि‍या, 'घर वापसी' के लिए ससुर ने दिया था ईंट भट्ठे का ऑफर लेकिन...

उमर गौतम को फतेहपुर के मुस्लिम हाथों हाथ लेते थे.

उमर गौतम को फतेहपुर के मुस्लिम हाथों हाथ लेते थे.

UP News: फतेहपुर के श्याम प्रताप गौतम उर्फ उमर गौतम को यूपी एटीएस (UP ATS) ने एक अन्‍य मौलाना के साथ 1000 से ज्‍यादा लोगों के धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया है. उमर के गांव वालों की मानें तो धर्म बदलने के बाद उसे उसके पिता ने बेदखल कर किया था. जबकि उसके ससुर ने फिर से हिन्‍दू बनने के लिए ईंट भट्ठे का लालच दिया था, लेकिन उसने यह ऑफर ठुकरा दिया था.

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फतेहपुर. यूपी एटीएस (UP ATS) द्वारा अवैध धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार आरोपी उमर गौतम (Umar Gautam) मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश के फतेहपुर जिला के ग्राम पंथुआ का रहने वाला है. वह फतेहपुर के क्षत्रिय परिवार से ताल्लुक रखता है और उमर के पिता धनराज सिंह गौतम प्रतिष्ठित क्षत्रिय परिवार से थे जिनकी मौत हो चुकी है.

उमर गौतम सरकारी अधिकारी के पद से रिटायर हुए धनराज के 6 बेटों में से चौथे नंबर का है. इस्लाम कबूलने से पहले उसका नाम श्याम प्रताप गौतम था. 1978 में इंटरमीडिएट पास करने के बाद एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने के लिए पंतनगर गया था. गांव वालों के मुताबिक, एग्रीकल्चर की पढ़ाई के बाद उमर गौतम ने अलीगढ़ के एमएमयू से कानून की पढ़ाई की थी.

ससुर ने 'घर वापसी' के लिए दिया था ईंट भट्ठा का लालच
उमर गौतम ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई के दौरान ही पास के गांव में क्षत्रिय परिवार की राजेश्वरी से शादी थी. बताते हैं कि शादी के कुछ समय बाद ही उमर ने धर्म परिवर्तन किया था और अपनी पत्नी राजेश्वरी को भी धर्म परिवर्तन कराकर रज़िया बनाया. धर्म परिवर्तन की वजह से श्याम प्रताप गौतम उर्फ उमर गौतम को उसके पिता धनराज सिंह गौतम ने परिवार से बेदखल किया था. हालांकि इस दौरान ससुर ने उमर को वापस हिंदू बनने के लिए काफी लालच दिया था. इस दौरान वह एक ईंट भट्ठा भी देने को तैयार थे, लेकिन उमर ने किसी भी कीमत पर 'घर वापसी' नहीं स्‍वीकार की थी.

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उमर के आने की खबर मिलते ही इलाके के पैसे वाले मुस्लिम उससे मिलने आते थे.


गांव में रहने वाले उमर के चचेरे भाई राजू सिंह ने बताया कि वह (उमर) बहुत कम ही गांव आता था. गांव के लोगों से उसका कम संपर्क रहता था, लेकिन उसके आने की खबर मिलते ही इलाके के पैसे वाले मुस्लिम उससे मिलने आते थे और अमर के साथ मुस्लिमों की गाड़ियों का काफिला चलता था. गांव वालों ने ये भी बताया कि उमर आसपास के मदरसों में तकरीर भी देता था.

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पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुंचा था उमर
उमर के चचेरे भाई राजू सिंह के मुताबिक, उमर के पिता धनराज सिंह गौतम की मौत करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई, लेकिन वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आया था. उमर उर्फ श्याम प्रताप सिंह 6 भाइयों में चौथे नंबर का है. पहला भाई उदय राज प्रताप सिंह, दूसरा भाई उदय प्रताप सिंह, तीसरा भाई उदय नाथ सिंह, चौथा उमर उर्फ़ श्याम प्रताप सिंह, पांचवा श्रीनाथ सिंह व छठवें नंबर के स्वर्गीय ध्रुव प्रताप सिंह थे. सभी भाइयों के बीच लगभग 75 बीघा खेत है, जिसका अभी खानदानी बंटवारा भी नहीं हुआ है. सभी भाई बाहर रहते हैं.

Tags: ATS, Conversion case in UP, Religion conversion

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