रामपुर से हुई थी यूपी में सोशल मीडिया पोस्ट पर पहली गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका है रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2015 को आईटी एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था. यह धारा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों को गिरफ्तार करने की शक्ति देती थी.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 12, 2019, 2:47 PM IST
रामपुर से हुई थी यूपी में सोशल मीडिया पोस्ट पर पहली गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका है रोक
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: June 12, 2019, 2:47 PM IST
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के बाद एक निजी न्यूज चैनल के पत्रकार की गिरफ्तारी से धारा 66A को समाप्त करने की मांग शुरू हो गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट भी इसे यह कहकर रद्द कर चुका है कि धारा 66A को समाप्त करना होगा क्योंकि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर लगने वाले मुनासिब प्रतिबंधों के दायरे से आगे चली गई है.

प्रशांत कनौजिया का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा, जहां से उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश भी दिया गया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर रिमांड पर भेजना जायज नहीं है. लेकिन यह पहला मामला नहीं है जब यूपी में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर गिरफ्तारी हुई हो. इसकी शुरुआत अखिलेश सरकार में शुरू हुई थी, जब रामपुर में एक दलित चिन्तक को पुलिस ने उसके फेसबुक स्टेटस को लेकर गिरफ्तार कर लिया था. दलित चिन्तक और लेखक कंवल भारती ने लिखा था कि आरक्षण और दुर्गाशक्ति नागपाल के मामले में अखिलेश सरकार पूरी तरह नाकाम रही है.



कब-कब हुई गिरफ्तारी

2015 में रामपुर पुलिस ने ही तत्कालीन मंत्री आजम खान के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में बरेली निवासी एक छात्र को गिरफ्तार किया.

2017 में रामपुर में दो युवतियों के साथ छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर विरक करने के आरोप में 13 आरोपियों को जेल भेजा गया.

2019 में सहारनपुर के रामपुर मनिहारान थाना पुलिस ने एक युवक को सोशल मीडिया पर धर्म विशेष पर टिप्पणी को लेकर गिरफ्तार किया.

जून 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर गोरखपुर के गोला बाजार से एक नर्सिंग होम संचालक आरपी यादव को गिरफ्तार कर लिया.
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सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में रद्द की थी धारा 66A

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2015 को आईटी एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था. यह धारा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों को गिरफ्तार करने की शक्ति देती थी. बता दें सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस धारा में तो गिरफ्तारी नहीं हो सकती, लेकिन आईपीसी व अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है.

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