सोनभद्र में एक लाख हेक्टेयर वन भूमि पर का कब्जा, 5 साल पुरानी रिपोर्ट पर आज तक कार्रवाई नहीं

पांच साल पुराने रिपोर्ट पर अगर शासन और प्रशासन ने एक्शन लिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना होती ही नहीं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 22, 2019, 2:30 PM IST
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Updated: July 22, 2019, 2:30 PM IST
सोनभद्र में जमीनी विवाद में 10 लोगों की हत्या के बाद एक- के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं. वन विभाग की जमीन कब्जाने का यह पुराना खेल आज भी बदस्तूर जारी है और इसमें वे सभी लोग सलिप्त हैं जिनके ऊपर ही जंगल को बचाने की जिम्मेदारी है. अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या सोनभद्र जैसे नरसंहार को रोका जा सकता था? या फिर आगे भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी? दरअसल, पांच साल पुराने रिपोर्ट पर अगर शासन और प्रशासन ने एक्शन लिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना होती ही नहीं.

पांच साल पहले तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोनभद्र में एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अफसरों, नेताओं और दबंगों का कब्ज़ा है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि 1987 के बाद से एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को अवैध रूप से गैर वन भूमि घोषित कर दिया गया. इस भूमि की मौजूदा कीमत 40 हजार करोड़ के करीब है. रिपोर्ट में इस बात का हवाला दिया गया था कि भारतीय वन विभाग अधिनियम-1927 की धारा-4 के तहत यह जमीन वन भूमि घोषित की गई थी. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना इसे किसी व्यक्ति या प्रोजेक्ट के लिए नहीं दिया जा सकता. लेकिन अधिकारी, नेता और दबंगों की मिली भगत से हजारों करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया.

2014 में सौंपी गई थी रिपोर्ट

नरसंहार का आभास 2014 में ही तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक (भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त) एके जैन ने शासन व सरकार को रिपोर्ट दी थी. जिसमें यह कहा गया था कि जिले में जंगल की जमीन कब्जाने की लूट मची हुई है. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि बाहर से आए रसूखदारों और अफसरों ने अब तक एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन अवैध रूप से अपनी-अपनी संस्थाओं के नाम करा लिया है. यह प्रदेश की कुल वन भूमि का 6 प्रतिशत हिस्सा है. जैन ने अपने रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की थी कि पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाए. लेकिन इस रिपोर्ट पर आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया. इतना ही नहीं जैन को डिमोशन पर आगरा मंडल भेज दिया गया. बाद में उनकी हत्या भी हो गई.

वन मंत्री को नहीं है रिपोर्ट की जानकारी

हालांकि इस रिपोर्ट के मामले में मौजूदा वन मंत्री दारा सिंह को जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो विभागीय अधिकारीयों से बात करूंगा. मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाकर उचित कार्रवाई भी करवाऊंगा.

सीएम योगी ने कहा- 1952 से लेकर अब तक की होगी जांच
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रविवार को उम्भा गांव में पीड़ितों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोनभद्र में आदिवासियों की जमीन कांग्रेस के तत्कालीन एमएलसी के ट्रस्ट के नाम पर 1955 में कर दी गई थी. यह कैसे हुआ, इसका परीक्षण भी जांच कमेटी करेगी. 1989 में ट्रस्ट की जमीन परिजनों के नाम पर कर दी गई. यह कैसे हुआ, इसका परीक्षण भी जांच कमिटी करेगी. हम इस घटना को सामान्य मानकर हल रहे थे. लेकिन 1952-53 के बीच खेले गए इस पूरे खेल की जांच 10 दिन के अंदर तलब की गई है. उन्होंने कहा कि जिले में जमीन की लूट के लिए जो भी घटनाएं हुई हैं उनकी जांच के लिए अपर मुख्य सचिव राजस्व की अगुवाई में तीन सदस्यों की टीम बनाई गई है.

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First published: July 22, 2019, 11:03 AM IST
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