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इंजीनियर से एमडी बनने वाले क्‍या एपी मिश्रा ही हैं UPPCL PF घोटाले के मास्‍टरमाइंड, या फिर...

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Updated: November 5, 2019, 11:20 PM IST
इंजीनियर से एमडी बनने वाले क्‍या एपी मिश्रा ही हैं UPPCL PF घोटाले के मास्‍टरमाइंड, या फिर...
एपी मिश्रा की गिरफ्तारी के यूपी की सियासत में बवाल उठ खड़ा हुआ है.

एपी मिश्रा (AP Mishra) इस हजारों करोड़ के घोटाले के मास्‍टरमाइंड हैं या फिर वह केवल राजनीतिक लड़ाई में फंस रहे हैं. बता दें कि एपी मिश्रा को अरबपति अधिकारी के रूप में जाना जाता था. इस घोटाले में यूपीपीसीएल का 4100 करोड़ का रिटायरमेंट फंड दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में 2017 से इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. जिसमें से सिर्फ 1800 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 11:20 PM IST
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लखनऊ. चार हजार करोड़ रुपये के घोटाले में उत्‍तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के एमडी एपी मिश्रा (AP Mishra) को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उनकी गिरफ्तारी के बाद यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया है. हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर सवाल भी उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि क्‍या वाकई में एपी मिश्रा इस हजारों करोड़ के घोटाले के मास्‍टरमाइंड हैं या फिर वह केवल राजनीतिक लड़ाई का शिकार हुए हैं. बता दें कि एपी मिश्रा को अरबपति अधिकारी के रूप में जाना जाता था. इस घोटाले में यूपीपीसीएल के 4100 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में 2017 से इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. जिसमें से सिर्फ 1800 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके.

रिपोर्ट के अनुसार, यूपीपीसीएल (UPPCL) प्रोविडेंट फंड ट्रस्‍ट ने दूसरी फाइनेंशियल फर्म को नजरअंदाज कर डीएचएफएल (DHFL) को चुना था. बता दें कि इस समय डीएचएफएल के मालिकों के खिलाफ ईडी, दाऊद इब्राहिम के सहयोगी इकबाल मिर्ची के जरिए टैरर फंडिंग के मामले में जांच कर रही है. इस कंपनी के भविष्‍य के ऊपर खतरा मंडरा रहा है. रिजर्व बैंक ने डीएचएफएल पर फंड को निकालने पर रोक के अलावा कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसी कारण यूपीपीसीएल के फंड पर भी संकट दिख रहा है. हालांकि यूपी सरकार ने साफ कर दिया है कि कंपनी के फंड पर किसी तरह का संकट नहीं है.

सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की
ये घोटाला कुछ दिनों पहले ही सामने आया था. इसके बाद विपक्ष ने बीजेपी और योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया. सबसे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा, उसके बाद अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा. योगी आदित्‍यनाथ सरकार ने इसके बाद आनन फानन में जांच के निर्देश दिए. ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की गईं. सबसे पहले यूपीपीसीएल डायरेक्‍टर (फाइनेंस) और ट्रस्‍ट के सदस्‍य सुधांशु द्विवेदी और जनरल मैनेजर और सचिव पीके गुप्‍ता को गिरफ्तार किया गया. राज्‍य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की है, अब केंद्र की ओर से मंजूरी बाकी है.

बीजेपी का दावा, सपा सरकार में बढ़ा मिश्रा का तेजी से ग्राफ
बीजेपी के एक नेता के अनुसार, एपी मिश्रा का करियर सपा सरकार में तेजी से बढ़ा. इससे पहले उन्‍होंने 1976 में पावर कॉरपोरेशन में एक असिस्‍टेंट इंजीनियर के तौर पर ज्‍वाइन किया. इसके बाद वह लखनऊ, कानपुर, नोएडा और इलाहाबाद (प्रयागराज) में काम किया. सपा सरकार में उनका ग्राफ बढ़ा और 2014 में उन्‍हें एमडी बनाया गया. इससे पहले मिश्रा ने अखिलेश यादव पर एक किताब भी लिखी थी. 2017 में बीजेपी सरकार में आई. इसके कुछ दिनों बाद ही मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया. लेकिन इस केस के खुलते ही उनकी जिंदगी में उथल पुथल मच गई.

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First published: November 5, 2019, 11:03 PM IST
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