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रिवर फ्रंट घोटाला: CBI की प्रारंभिक जांच पूरी, आधा दर्जन इंजिनियरों का फंसना तय

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 27, 2019, 9:11 AM IST
रिवर फ्रंट घोटाला: CBI की प्रारंभिक जांच पूरी, आधा दर्जन इंजिनियरों का फंसना तय
रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई की प्रारंभिक जांच पूरी

कहा जा रहा है कि सीबीआई की प्रारंभिक जांच में टेंडर देने में घपले के सबूत मिले हैं. गौरतलब है कि गोमती रिवर फ्रंट के लिए सपा सरकार ने 1513 करोड़ स्वीकृत किए थे. जिसमें से 1437 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी मात्र 60 फीसदी काम ही हुआ.

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लखनऊ. सपा शासन काल में हुए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले (Gomti River Front Scam) में सीबीआई (CBI) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है. सीबीआई अब अलग-अलग टेंडर में हुए घपले की अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज करेगी. एफआईआर दर्ज करने के लिए सीबीआई ने अपने मुख्यालय से इजाजत मांगी है. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में आधा दर्जन इंजीनियरों का फंसना तय है. इन सभी इंजीनियरों का नाम सीबीआई की पहले दर्ज एफआईआर में भी है. बता दें दो साल पहले गोमती नगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी.

कहा जा रहा है कि सीबीआई की प्रारंभिक जांच में टेंडर देने में घपले के सबूत मिले हैं. गौरतलब है कि गोमती रिवर फ्रंट के लिए सपा सरकार ने 1513 करोड़ स्वीकृत किए थे. जिसमें से 1437 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी मात्र 60 फीसदी काम ही हुआ. 95 फ़ीसदी बजट जारी होने के बाद भी 40 फीसदी काम अधूरा ही रहा. मामले में 2017 में योगी सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे. आरोप है कि डिफाल्टर कंपनी को ठेका देने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया था. पूरे प्रोजेक्ट में करीब 800 टेंडर निकाले गए थे, जिसका अधिकार चीफ इंजीनियर को दे दिया गया था.

योगी सरकार ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश

दरअसल योगी सरकार के सत्ता में आने के फौरन बाद पूर्व की सपा सरकार के महात्वाकांक्षी प्रोजैक्ट गोमती रिवर फ्रंट में घोटाले का आरोप लगा और जांच के आदेश दिए गए. आरोप लगा कि दरअसल, 1513 करोड़ की परियोजना में 1437 करोड़ रूपया खर्च होने के बावजूद भी काम 65 फीसदी ही पूरा किया गया. यही नहीं परियोजना की 95 फीसदी रकम निकाल ली गई. मामले में योगी सरकार ने मई 2017 में रिटायर्ड जज अलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से जांच कराई. जांच रिपोर्ट में कई खामियां उजागर हुईं. इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार ने सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र भेज दिया.

8 के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया
इस मामले में 19 जून 2017 को गौतमपल्ली थाना में 8 के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज किया गया. इसके बाद नवंबर 2017 में भी ईओडब्ल्यू ने भी जांच शुरू कर दी. दिसंबर 2017 मामले की जांच सीबीआई चली गई और सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की. यही नहीं मामले में दिसंबर 2017 में ही आईआईटी की टेक्निकल जांच भी की गई. इसके बाद सीबीआई जांच का आधार बनाते हुए मामले में ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया.


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ये है आरोप


गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य से जुड़ें इंजीनियरों पर दागी कम्पनियों को काम देने, विदेशों से मंहगा समान खरीदने, चैनलाइजेशन के कार्य में घोटाला करने, नेताओं और अधिकारियों के विेदेश दौरे में फिजूलखर्ची करने सहित वित्तीय लेन देन में घोटाला करने और नक्शे के अनुसार कार्य नहीं कराने का आरोप है. इस मामले में 8 इजीनियरों के खिलाफ पुलिस, सीबीआई और ईडी मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है. इनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर गोलेश चन्द्र गर्ग, एसएन शर्मा, काजिम अली, शिवमंगल सिंह, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव, सुरेन्द्र यादव शामिल हैं. यह सभी सिंचाई विभाग के इंजीनियर हैं, जिन पर जांच चल रही है.


(इनपुट: ऋषभमणि त्रिपाठी)

 

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First published: November 27, 2019, 9:11 AM IST
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