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बीजेपी के खिलाफ यूपी की हर लोकसभा सीट पर उतरेगा महागठबंधन का संयुक्त प्रत्याशी!

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सपा और बसपा के बीच होने वाले गठबंधन में अब कांग्रेस और रालोद के भी शामिल होने की राह तैयार है. प्लान के मुताबिक बीजेपी को रोकने के लिए सभी 80 सीटों पर महागठबंधन संयुक्त प्रत्याशी उतारेगा.

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दिल्ली की गद्दी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, लिहाजा हर दल की नजर सूबे की 80 लोकसभा सीटों पर टिकीं हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में महागठबंधन की बिसात सज चुकी है. सपा और बसपा के बीच होने वाले गठबंधन में अब कांग्रेस और रालोद के भी शामिल होने की राह तैयार है. प्लान के मुताबिक बीजेपी को रोकने के लिए सभी 80 सीटों पर महागठबंधन संयुक्त प्रत्याशी उतारेगा.

हालांकि, जो पेंच फंसा है वह सीट बंटवारे को लेकर है. सीट बंटवारे की रूपरेखा भी तैयार है. बस देरी तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर है. सीट बंटवारे की बात करें तो बसपा 40 सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है. जिसके बाद बची 40 सीटों में से अगर समाजवादी पार्टी 30 सीटों पर लड़ती है तो रालोद व कांग्रेस के बीच बची 10 सीटों पर बंटवारा होगा. सूत्रों के मुताबिक रालोद कैराना, बागपत और मथुरा से चुनाव लड़ना चाहती है. हालांकि, राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते, कांग्रेस 10 से 12 सीटें चाहती है. लिहाजा 7 सीटों पर कांग्रेस को राजी करना मुश्किल है. गठबंधन की ताकत को देखते हुए बसपा दो-चार सीटें छोड़ सकती है. वहीं, पूर्वांचल में सपा अपने कोटे से दो सीट निषाद पार्टी के लिए छोड़ सकती है.

हालांकि, महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी के एमएलसी आनंद भदौरिया का कहना है कि कौन कितने सीटों पर लड़ेगा इसका निर्णय सभी दलों का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा. अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन कितने सीटों पर लड़ेगा.



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लेकिन यह स्थिति तभी पैदा होगी जब आगामी तीन राज्यों-मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन हो जाए. पिछले दिनों मायावती यह साफ कर चुकी हैं कि सम्मानजनक सीटों के बंटवारे पर ही गठबंधन होगा. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी गठबंधन को लेकर अपना नर्म रूख दिखा चुके हैं. उनका साफ कहना है कि ऐसा कोई भी अडंगा न खड़ा हो जिसकी वजह से गठबंधन न हो और बीजेपी को इसका फायदा मिल जाए.

चारों दलों के साथ आने से मुस्लिम, दलित व पिछड़ा वोट होगा एकजुट

दरअसल, चारों दलों के साथ आकर चुनाव लड़ने से बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी होगी. मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं हो सकेगा. पिछले दिनों हुए उपचुनाव में मायावती यह दिखा चुकी हैं कि वे अपने दलित वोट का ट्रांसफर बखूबी करा सकती हैं. हालांकि, सपा का पिछड़ा और अति पिछड़ा वोट कितना बसपा के खाते में जाता है यह अभी साबित होना है.

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