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Lucknow : तनाव होगा छूमंतर, हैप्पी थिंकिंग लैब सिखा रही लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों को मुस्कुराने की कला

Lucknow University News: लखनऊ विश्वविद्यालय में हैप्पी थिंकिंग लैब (Happy Thinking Lab) की शुरुआत की गई है. इस लैब में छात्र छात्राओं को नकारात्मक विचारों को छोड़ने और सकारात्मक विचारों को अपने अंदर लाने की कला सिखाई जा रही है.

रिपोर्ट-अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. भागदौड़ भरी जिंदगी, परीक्षा का तनाव और युवा उम्र में होने वाले मानसिक बदलाव की वजह से अक्सर छात्र-छात्राएं परेशान हो जाते हैं. इस वजह से वे कई बार गलत रास्ते पर भी चले जाते हैं. छात्र-छात्राओं का तनाव दूर करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में हैप्पी थिंकिंग लैब (Happy Thinking Lab) की शुरुआत की गई है. इस लैब में छात्र-छात्राओं को नकारात्मक विचारों को छोड़ने और सकारात्मक विचारों (Positive Thoughts) को अपने अंदर लाने की कला सिखाई जा रही है. इसके अलावा इसमें छात्र-छात्राओं को योग और चिंतन भी करना भी सिखाया जा रहा है.

वहीं, इस लैब से अब तक सभी कोर्सेस के 2000 से भी ज्यादा छात्र जुड़ चुके हैं. यह पूरी तरह से निशुल्क है. यकीनन हैप्पी थिंकिंग लैब का लाभ उठा कर छात्र अपने जीवन से तनाव को दूर कर सकते हैं. यह लखनऊ विश्वविद्यालय के ओएनजीसी बिल्डिंग में तीसरे फ्लोर पर बनी हुई है.

बुराई पर अच्छाई की जीत सिखा रही लैब
इस लैब में चार कमरे हैं, जिसमें पहला कमरा छात्र छात्राओं के लिए सकारात्मक विचारों वाली किताबें और कुछ महान हस्तियों के कहे हुए सकारात्मक शब्दों के पोस्टर लगे हुए हैं. इसके अलावा इसी कमरे में मानसिक स्वच्छता (Mental Cleanness) का एक चार्ट भी लगा है, जिसमें मानसिक स्वच्छता कैसे की जाए यह समझाया गया है. इसके अलावा इसी कमरे में स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बेहद रोचक और खास जानकारी से भरे पोस्टर्स लगे हैं, ताकि इसमें आने वाले छात्र छात्राओं को नकारात्मक विचार से दूर रखा जा सके और उनके स्वास्थ्य के प्रति उन्हें जागरूक किया जा सके.

वहीं, दूसरा कमरा रिसर्च रूम है जहां पर कराड़ा स्कैन के जरिए छात्र-छात्राओं के शरीर की बॉडी मास इंडेक्स और उनकी शरीर के अनुसार उनकी उम्र और उनका वजन जांचा जाता है. इसके अलावा यहां पर लगी बायोवेल मशीन के जरिए छात्र छात्राओं को उनके शरीर की रिपोर्ट चंद मिंटो में ही मिल जाती है. यह कमरा हाईटेक उपकरणों से भरा हुआ है, जिसमें छात्र-छात्राओं को हेल्थ से जुड़ी हुई सारी जांचे होती हैं.

लैब में  हैं काउंसलिंग डेस्क
इस लैब में काउंसलिंग डेस्क है जहां पर छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग होती है. इसी कमरे में एक पेपर ट्री लगा हुआ है खिड़की के कांच पर, जिसमें कि दो रंग की पत्तियां लगी हुई हैं. एक हरी और दूसरी पीली. पीली पत्तियों पर नकारात्मक विचार, तो हरी पत्तियों पर सकारात्मक विचार लिखे हैं. ऐसे में यहां पर आने वाले छात्र-छात्राएं एक पीली पत्ती को निकालकर हरी पत्ती लगाते हैं. यानी वो अपने अंदर की एक बुराई को यहां पर छोड़कर अच्छाई अपने साथ लेकर जाते हैं.

प्रोफेसर मधुरिमा प्रधान का सपना हुआ साकार
निदेशक काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल प्रोफेसर मधुरिमा प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने से पहले इस लैब के बारे में वह विचार कर रही थीं. इसलिए इस लैब को बनाना उनका सपना था. उनके इस सपने को पंख दे दिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने, जिसने इस तरह के कोर्स को महत्व दिया. इसकी शुरुआत इसी के जरिए हो सकी. उन्होंने बताया कि लोग नहाते रोज हैं लेकिन ऊपरी सफाई करने से कोई फायदा नहीं है जब तक कि अंदर के गंदे विचारों की और तनाव की सफाई न हो. इसलिए इसकी शुरुआत की गई है ताकि छात्र छात्राओं के अंदर के नकारात्मक विचारों को हटाकर उनके अंदर की गंदगी को साफ किया जा सके. उन्हें खुशी और अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जा सके. उन्होंने बताया कि इस लैब से अब तक हजारों बच्चे जुड़ चुके हैं. वहीं, जेआरएफ ज्योति शुक्ला ने बताया कि रिसर्च रूम में सभी उपकरणों को वही चलाती हैं. ऐसे में यहां पर आने वाले छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी वह भी देती हैं.

Tags: Lucknow city, Lucknow news

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