हाथरस केस: 'गैंगरेप' पर पुलिस का नया दावा, 10 पॉइंट में पढ़ें ADG का पूरा बयान

यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बड़ा बयान दिया है. (FIle)
यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बड़ा बयान दिया है. (FIle)

Hathras Case Update: ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का कहना है कि पीड़िता के साथ रेप (Rape) नहीं हुआ है. मामले को गलत ढंग से पेश करने की कोशिश की गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस (Hathras Kand) में हुए कथित गैंगरेप मामले में सियासत चरम पर है. आगर की एफएसएल लैंब की रिपोर्ट में भी बड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एफएसएल (FSL) की रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है. तो वहीं इस मामले में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर का भी बड़ा बयान सामने आया है.  एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) को लेकर बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि मौत गले में लगी चोट की वजह से हुई है. एडीजी का कहना है कि मामले को जाति वादी एंगल देने की कोशिश की जा रही थी. पुलिस का कहना है कि अब ऐसे लोगों पर एक्शन लिया जाएगा. तो वहीं इस केस से जुड़े कई अहम बातें एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कही है.
पीड़िता के भाई ने लिखित शिकायत की थी जिसमें उनके हस्ताक्षर थे. उसमें उचित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इसका एक वीडियो भी आया है.
वीडियो में पीड़िता और उसकी मां ने खुद घटना का ब्यौरा दिया था·
वीडियो में पीड़िता ने अपनी जीभ भी दिखाई है. जहां तक जीभ कटने या काटने की बात थी पुलिस ने तत्काल अभियोग पंजीकृत किया. पीड़िता को फौरन चिकित्सा सुविधा दिलाई
पीड़िता को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कॉलेज के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण तथा 25 तारीख को फॉरेंसिक लैब के लिए सारे सैंपल भेजे गए.
इस बीच में 20 तारीख को जो मुख्य अभियुक्त था उसको गिरफ्तार किया गया. जब पीड़िता की स्थिति को देखते हुए उन्हें दिल्ली भी शिफ्ट कराया गया. मेडिकल रिपोर्ट में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने यह स्पष्ट किया है कि रेप की बात पहली बार पीड़िता के द्वारा 22 तारीख को बताई गई. उनके बयान के आधार पर सिर्फ तीन अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई जिस.
पीड़िता की मौत के बाद पोस्टमार्टम दिल्ली में करा कर परिवार जनों के साथ मिलकर अंत्येष्टि कराई गई.
मौत का वजह गले में लगी चोट बताई गई है. इस बीच विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी मिली. पीड़िता के साथ कोई रेप नहीं हुआ था. उन्होंने थाने में आने के बाद कोई रेप की बात भी नहीं बताई थी. केवल मारपीट की बात बताई थी.
रिपोर्ट में बताया गया कि जो सैंपल लिए गए उसमें शुक्राणु नहीं पाया गया है. इससे ये स्पष्ट होता है कि कुछ लोगों द्वारा गलत तरीके से जातीय तनाव पैदा करने के लिए इस तरह की चीजें करवाई गई.
अब ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो प्रदेश में जातीय हिंसा भड़काना चाहते थे. मामले में जिसकी भी गलती हो, उसको बख्शा नहीं जाएगा.
पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन किया था और उसमें गृह सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं.
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