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हाथरस कांड ने यूपी की राजनीति और प्रशासन में बहुत कुछ बदल दिया, आप भी जानें

हाथरस गैंगरेप मामले में न्याय की मांग करते प्रदर्शनकारी लोग

हाथरस गैंगरेप मामले में न्याय की मांग करते प्रदर्शनकारी लोग

Hathras Case: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और बसपा से लेकर भीम आर्मी व राष्ट्रीय लोक दल तक के नेता हाथरस की तरफ दौड़ पड़े. सभी के निशाने पर योगी सरकार और उनके अधिकारी ही रहे.

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लखनऊ. हाथरस की 19 वर्षीय दलित पीड़िता के साथ कथित गैंगरेप (Gangarpe) और फिर इलाज के दौरान मौत के बाद जिस तरह से सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक आक्रोश देखने को मिला, उसने सूबे की योगी सरकार (Yogi Government) को बैकफुट पर ला दिया. बिहार चुनाव और सूबे की 7 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को देखते हुए विपक्षी दलों ने भी इस पर जमकर राजनीति की. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और बसपा से लेकर भीम आर्मी व राष्ट्रीय लोक दल के नेता हाथरस की तरफ दौड़ पड़े. सभी के निशाने पर योगी सरकार और उनके अधिकारी ही रहे. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आड़ में सभी दलों में दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने की होड़ दिखी. लिहाजा हाथरस की घटना को दिल्ली की निर्भया से जोड़कर आरोपियों को फांसी देने की मांग भी हो गई. इतना ही नहीं मामले को अपर कास्ट बनाम लोअर कास्ट करने की भी कोशिश हुई.

अब तक इस मुद्दे को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत सारी बातें हो चुकी हैं. विपक्षी पार्टियां भी हमलावर हैं. हाथरस के बुलगढ़ी गांव की 19 वर्षीया बेटी के साथ क्या हुआ यह जगजाहिर है. पुलिस के रिकॉर्ड हों या फिर मीडिया या सोशल मीडिया का ट्रायल, हर जगह यही बात कही जा रही है कि अपर कास्ट के लोगों ने दलित बिटिया के साथ गैंगरेप किया और फिर गला दबाकर उसे मारने की कोशिश की गई. हाथरस की इस दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को झकझोर दिया. एक तबके से यह भी मांग उठी की जब निर्भया कांड के दोषियों को फांसी दी गई तो हाथरस मामले में रहम क्यों बरती जा रही है? सोशल मीडिया में तो यह भी मांग की जा रही है कि हाथरस मामले में भी हैदराबाद पार्ट-2 को दोहराया जाए, क्योंकि आरोपियों को जीने का हक़ नहीं है. इन सब बहस के बीच हाथरस की घटना से प्रदेश की राजनीति में कई चीजें बदल गई हैं.



योगी सरकार बोले- विकास को दंगे से रोकने की साजिश
जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर हमलावर था तो वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार को मुआवजे के ऐलान के साथ ही मामले में पहले एसआईटी और फिर सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी. उन्होंने दोनों पक्षों और पुलिस वालों के नार्को टेस्ट के भी निर्देश दिए. सरकार इस मामले में दूध-का दूध और पानी का पानी करना चाहती है, लेकिन विपक्ष सरकार के किसी भी कदम से संतुष्ट नहीं दिखा. इन सबके बीच जांच एजेंसियों ने दवा किया कि हाथरस के बहाने बड़े पैमाने पर दंगा करवाने की साजिश रची गई थी. फिर क्या था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए विकास को रोकने और सरकार को बदनाम करने की साजिश का आरोप लगा दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को अपने षडयंत्र में कभी भी सफल नहीं होने देंगे.

हाथरस के सहारे यूपी कांग्रेस में जान फूंकते दिखे राहुल-प्रियंका
यूपी में अपनी सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस को हाथरस कांड से संजीवनी मिल गई. आनन-फानन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अपने काफिले के साथ पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस रवाना हो गए, लेकिन यमुना एक्सप्रेसवे पर काफिले को रोका गया तो वे पैदल ही चल दिए. सड़कों पर चल रहे राहुल और प्रियंका ने खूब सुर्खियां बटोरीं. हालांकि, बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. राहुल-प्रियंका के इस पैदल मार्च का आलम यह रहा कि प्रशासन को झुकना पड़ा और दूसरे दिन दोनों को पीड़ित परिवार से मिलने दिया गया. राहुल और प्रियंका ने हाथरस के बहाने ही सही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम कर ही दिया.

दलित वोट बैंक को साधते नजर आए अखिलेश 
प्रियंका और राहुल के हाथरस जाने के बाद उम्मीद थी कि अखिलेश भी जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उनकी जगह नरेश उत्तम पटेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मिलने गया. इस सबके बीच समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह जोरदार प्रदर्शन किया.

मायावती भी हुईं सरकार पर हमलावर
बसपा सुप्रीमो मायावती पहली बार सरकार पर हमलावर दिखीं. अपने बेस वोट बैंक के मद्देनजर वह ट्वीट कर सरकार को घेरती दिखीं. मायावती ने तो उस आरोप पर भी निशाना साधा, जिसमें विपक्ष पर जातीय और सांप्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश की बात कही गई. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ का आरोप सही है या फिर चुनावी चाल, यह तो वक्त ही बताएगा.

AAP केसंजय सिंह ने भी खूब खेला जातीय कार्ड
प्रदेश में जमीन तलाश रहे आम आदमी पार्टी के सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह ने भी खूब जातीय कार्ड खेला. साल 2022 के चुनाव से पहले योगी सरकार पर जातिवाद का आरोप लगाने वाले संजय सिंह हाथरस मामले में भी अपर कास्ट और दलित का मुद्दा ले आए. उनका आरोप था कि आरोपी सवर्ण है, ऐसे में बिटिया को इंसाफ कैसे मिलेगा.

भीम आर्मी ने खूब सेंकी रोटियां
राजनीतिक पार्टी बना चुके भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने भी हाथरस के बहाने अपनी राजनीति को चमकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा. भीम आर्मी कार्यकर्ता अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से लेकर दिल्‍ली के सफदरजंग अस्पताल तक प्रदर्शन करते दिखे. इतना ही नहीं हाथरस पीड़िता से मिलते जाते वक्त कार्यकर्ता पुलिस से भी भीड़ गए.

सपा-बसपा काल में 'क्राइसिस मैनेजमेंट' नवनीत सहगल का बढ़ा कद
हाथरस कांड के बाद हो रही किरकिरी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस आईएएस अधिकारी पर भरोसा जताया जो सपा और बसपा शासन काल में अखिलेश और मायावती के काफी करीब था. सूचना विभाग की जिम्मेदारी निभाने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव सूचना के पद की जिम्मेदारी दी गई है. अवनीश कुमार अवस्थी से सूचना विभाग का काम लेकर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव के भरोसेमंद रहे नवनीत सहगल को सौंपी गई है. सरकार इस समय हाथरस कांड के साथ ही बलरामपुर तथा भदोही के सामूहिक दुष्कर्म कांड को लेकर चारों तरफ किरकिरी झेल रही है. ऐसे में क्राइसिस मैनेजमेंट में माहिर माने जाने वाले नवनीत सहगल को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

PFI द्वारा दंगों की साजिश से आया नया मोड़
सीएए विरोधी प्रदर्शन में हिंसा को लेकर जिस पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का नाम आया था, हाथरस कांड में इस संगठन का नाम आने के बाद जांच एजेंसियों के होश फाख्ता है. जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक पीएफआई ने यूपी में कई जगह दंगों की साजिश रची थी. इसके लिए विदेशों से फंडिंग भी हुई थी.

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