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हाथरस कांड में आज हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई दाखिल कर सकती है स्टेटस रिपोर्ट

(फाइल फोटो)
(फाइल फोटो)

हाथरस कांड: सीबीआई (CBI) आरोपियों का पॉलीग्राफी टेस्ट करा रही है. पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने हाथरस कांड का स्वतः संज्ञान लिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2020, 11:30 AM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप और हत्या केस (Hathras Gangrape and Murder Case) में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) में आज बुधवार को सुनवाई होनी है. माना जा रहा है कि सीबीआई आज हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सकती है. बता दें सीबीआई आरोपियों का पॉलीग्राफी टेस्ट करा रही है. पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने हाथरस कांड का स्वतः संज्ञान लिया था.

डीएम पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर उठाए थे सवाल
बता दें इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाथरस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) प्रवीण कुमार लक्षकार के खिलाफ सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर चिंता जाहिर की थी. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 25 नवंबर मुकर्रर करते हुए उस दिन सीबीआई से इस मामले में अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को भी कहा था.

हाथरस मामले कि पीड़िता का कथित रूप से जबरन अंतिम संस्कार करने के मुद्दे का स्वत: संज्ञान लेने वाली जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय की पीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. पीठ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार के खिलाफ सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर चिंता जाहिर की. हालांकि राज्य सरकार ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वो इस सिलसिले में 25 नवंबर तक कोई फैसला लेगी.
सरकार ने डीएम का किया था बचाव


अदालत ने बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि उसने पूर्व में दिए गए आदेश पर हाथरस के डीएम के बारे में क्या निर्णय लिया? इस पर सरकार के वकील ने यह कहते हुए जिलाधिकारी का बचाव किया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया था. जहां तक हाथरस के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निलंबन का सवाल है तो उनके खिलाफ यह कार्रवाई कथित गैंगरेप मामले में समुचित कार्रवाई करने में लापरवाही के आरोप में की गई थी, ना कि अंतिम संस्कार के मामले को लेकर.

राज्य सरकार, DM और तत्कालीन SP ने अपना हलफनामा दाखिल किया
इसके पूर्व, राज्य सरकार, डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार और हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर ने कोर्ट में अपने-अपने हलफनामे दाखिल किए. अपर महाधिवक्ता वीके साही ने अदालत से कहा कि राज्य सरकार के हलफनामे में हाथरस जैसी स्थिति में अंत्येष्टि से संबंधित दिशा-निर्देशों का एक मसविदा शामिल किया गया है. वहीं, डीएम और तत्कालीन एसपी ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि तात्कालिक परिस्थितियों के मद्देनजर मृतका का अंतिम संस्कार किया गया था और दाह संस्कार में केरोसिन का इस्तेमााल नहीं हुआ था.

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार, गृह सचिव तरूण गाबा और हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर मौजूद थे. सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई के वकील अनुराग सिंह से मामले की अगली सुनवाई पर एजेंसी द्वारा की जा रही जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा. वहीं हाथरस मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट से गुजारिश की कि वो अपने आदेश में ऐसी कोई टिप्पणी न करें जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका पैदा हो.
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