डॉक्‍टर अब कंप्‍यूटर से टाईप कर कोर्ट भेजेंगे 'मेडिको लीगल' रिपोर्ट: HC

 (प्रतिकात्मक फोटो)
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कोर्ट ने यह भी कहा कि कंप्‍यूटर टाईप मेडिको लीगल रिपोर्ट विवेचना समाप्त होने के बाद पुलिस रिपोर्ट का हिस्सा बनाई जायेगी. यह आदेश जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस डी के सिंह की बेंच ने एक रिट याचिका को निस्तारित करते हुए पारित किया.

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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डाॅक्टरों की खराब लिखावट से परेशान होकर प्रमुख सचिव गृह के साथ साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख सचिव को ओरिजिनल मेडिको रिपेर्ट की टाइपिंग के लिए हर अस्पताल में कंप्‍यूटर व प्रिंटर उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके लिए इन आला अधिकारियों को तीन महीने का समय देते हुए अनुपालन आख्या भी तलब की है.

कोर्ट ने कहा कि ओरिजिनल मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाला डाॅक्टर या उस विभाग का अध्यक्ष कंप्‍यूटर टाईप रिपोर्ट को प्रमाणित करेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि कंप्‍यूटर टाईप मेडिको लीगल रिपोर्ट विवेचना समाप्त होने के बाद पुलिस रिपोर्ट का हिस्सा बनाई जायेगी. यह आदेश जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस डी के सिंह की बेंच ने एक रिट याचिका को निस्तारित करते हुए पारित किया.

इस याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इंजरी रिपोर्ट इतनी अस्पष्ट है कि न उसे कोर्ट पढ़ पा रही है और न ही दोनों पक्षों के वकील ही उसे समझ पा रहे हैं. कोर्ट ने डाॅक्टर के सहयोग से इंजरी रिपार्ट को पढ़ा और केस को निस्तारित कर दिया. उससे पहले कोर्ट ने आदेश दिया था और उसके बाद डीजी मेडिकल एवं हेल्थ सर्विसेस ने 8 नंवबर 2012 को एक सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी डाॅक्टरों को निर्देश दिया था कि मेडिको लीगल रिपेर्टस साफ स्पष्ट लिखी होनी चाहिए ताकि उन्हें पढ़ने व समझने में कोई दिक्कत न हो.



गौरतलब हो कि पिछले दिनों में हरदोई, उन्नाव, सीतापुर व अन्य कई जिलों के डाॅक्टरों की खराब लिखावट के चलते तलब किया था और बाद में उन पर हर्जाना भी ठोंका गया था.
(रिपोर्ट: ऋषभ मणि त्रिपाठी)

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