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रिकवरी नोटिस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, अखिलेश ने CM योगी पर साधा निशाना
Lucknow News in Hindi

भाषा
Updated: February 17, 2020, 11:00 PM IST
रिकवरी नोटिस पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, अखिलेश ने CM योगी पर साधा निशाना
"मुखिया हैं तो क़ायदे-क़ानून का इल्म भी होना चाहिए और इंसाफ की नियत और निगाह भी. ये पद ज़िम्मेदारी का है, प्रतिशोध की ज़हरीली भाषा बोलने का नहीं." (फाइल फोटो)

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने आगे कहा, "मुखिया हैं तो क़ायदे-क़ानून का इल्म भी होना चाहिए और इंसाफ की नियत और निगाह भी.''

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  • Last Updated: February 17, 2020, 11:00 PM IST
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लखनऊ. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गत दिसंबर में हुई हिंसा के मामले में जारी एक रिकवरी नोटिस पर उच्च न्यायालय (High Court) की रोक के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) पर निशाना साधा. अखिलेश ने उच्च न्यायालय के हाल के एक फैसले की तरफ इशारा करते हुए सोमवार को एक ट्वीट में योगी पर हमला बोला और कहा, '‘बदला-बाबा अब क्या करेंगे? अब इस फैसले का बदला किससे लेंगे?" उन्होंने इसी ट्वीट में आगे कहा, "मुखिया हैं तो क़ायदे-क़ानून का इल्म भी होना चाहिए और इंसाफ की नियत और निगाह भी. ये पद ज़िम्मेदारी का है, प्रतिशोध की ज़हरीली भाषा बोलने का नहीं."

ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल 19 दिसंबर को राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई हिंसा के बाद प्रदर्शनकारियों से इन वारदात में हुए सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई कर बदला लेने की बात कही थी. अखिलेश की यह टिप्पणी इसी परिप्रेक्ष्य में है.

नोटिस पर रोक लगा दी है
गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कानपुर के मोहम्मद फैजान को एडीएम सिटी द्वारा 4 जनवरी, 2020 को भेजे गए नोटिस पर रोक लगा दी है. पिछले शुक्रवार को यह आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने कहा कि यह नोटिस उच्चतम न्यायालय में लंबित दो मामलों में दिए गए अंतरिम आदेश के अनुरूप नहीं है क्योंकि यह नोटिस राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के क्रियान्वयन में एडीएम द्वारा जारी किया गया है.



इस निर्णय में व्यवस्था दी है
उच्चतम न्यायालय ने इस निर्णय में व्यवस्था दी है कि सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का आंकलन करने के अधिकार का उपयोग उच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश या जिला जज द्वारा किया जाना चाहिए. इस खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और साथ ही यह भी निर्देश दिया कि इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल से शुरू हो रहे सप्ताह में उचित पीठ द्वारा की जाएगी.

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First published: February 17, 2020, 10:58 PM IST
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