Analysis: कितना कारगर होगा 'यादव लैंड' में बीजेपी का ये ख़ास प्लान

भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अक्सर ये दावा करते हैं कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में इस बार 74 सीटें जीतेगी. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर 73 सीट जीतने वाली बीजेपी ने 74 सीट जीतने के लिए क्या प्लान बनाया है?

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 23, 2019, 11:46 AM IST
Analysis: कितना कारगर होगा 'यादव लैंड' में बीजेपी का ये ख़ास प्लान
नरेंद्र मोदी- अमित शाह (फाइल फोटो)
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 23, 2019, 11:46 AM IST
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अक्सर यह दावा करते हैं कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में इस बार 74 सीटें जीतेगी. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर 73 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने 74 सीट जीतने के लिए क्या प्लान बनाया है? 2014 के चुनाव में जब बीजेपी और प्रधानमंत्र मोदी की लहर चल रही थी तब भी 7 सीटें ऐसी रह गई थीं, जिन पर बीजेपी कब्जा नहीं कर पाई. इनमें 5 सीटें मुलायम परिवार की थी जबकि 2 सीटें गांधी परिवार की.

बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में इन 7 अभेद्य किलों को भेदने के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई है. पार्टी किसी सीट पर जातीय समीकरणों पर दांव लगा रही है, तो किसी पर पार्टी और परिवार के अंतर्कलह का फायदा उठाने में लगी है.

ऐसे टूटेगा फिरोजाबाद का किला
7 अभेद्य किलों में बीजेपी की नजर में सबसे कमजोर किला है फिरोजाबाद का. यादव परिवार के इस किले पर कब्जे के लिए इस बार चाचा-भतीजा आपस में लड़ रहे हैं. 2 बार इस सीट से बीएसपी के कद्दावार नेता रामजी लाल सुमन सांसद रहे, जबकि 2014 में सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव चुनाव जीते.

2009 में अखिलेश यादव के सीट खाली करने के बाद हुए उपचुनाव में यादव परिवार को इस सीट पर अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. परिवार की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल अपना पहला चुनाव हार गई थीं. एसपी से कांग्रेस में आए राज बब्बर ने इस सीट पर डिंपल यादव को करीब 67 हजार वोटों से हराया था.

यह भी पढ़ें- Analysis: क्या रायबरेली सीट पर सोनिया गांधी को चुनौती दे पाएगी बीजेपी?

इस बार बीजेपी, यादव परिवार की आपसी लड़ाई के बहाने इस सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश में है. बीजेपी ने इस बार लोध राजपूत जाति के चन्द्रसेन को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट का जातीय गणित देखें तो 16 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली इस सीट पर 5 लाख के करीब यादव वोटर हैं, जबकि करीब तीन लाख लोध वोटर हैं. यानी करीब आधे वोटर इन दो जातियों से हैं. ऐसे में अगर यादव वोट चचा-भतीजा में बंटता है तो बीजेपी को जरूर इसका फायदा मिलेगा.
Loading...

बीजेपी इस सीट पर पूरी ताकत लगा रही है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह फिरोजाबाद में रैली कर चुके हैं, जबकि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली प्रस्तावित है.

इस मंत्री को दिया बदायूं का किला तोड़ने का जिम्मा
यादव परिवार का ये अभेद्य किला भी इस बार बीजेपी के निशाने पर है. करीब 18 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली इस सीट पर यादव और मुस्लिम मतों का वर्चस्व है. यादव और मुस्लिम दोनों की अबादी करीब-करीब 15-15 फीसदी है. इन दोनों को मिलाकर करीब साढ़े पांच लाख वोट होते हैं और यही वोटर एसपी की ताकत भी हैं.

बीजेपी ने इस बार इस सीट से प्रदेश सरकार के मंत्री और कभी बीएसपी के कद्दावर नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी संघमित्रा मौर्या को मैदान में उतारा है. संघमित्रा 2014 में बीएसपी के टिकट पर मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ी थी और उनके खिलाफ विवादास्तपद बयान देकर चर्चा में आई थीं.

मुलायम सिंह यादव, फाइल फोटो


बीजेपी ने इस चुनाव में इस सीट पर अपनी पूरी ताकत लगा रखी है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या पिछड़े वोटरों को बीजेपी के साथ लाने के लिए लगातार कैंप कर रहे हैं जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह यहां पहले ही रैली कर चुके हैं.

यादव परिवार की बहू को संसद पहुंचने से रोकने के लिए बीजेपी ने बनाया ये एक्शन प्लान
मुलायम परिवार की बहू के इस किले पर सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने नया मास्टर प्लान बनाया है. 18 लाख के करीब वोटर वाली कन्नौज सीट पर ढ़ाई लाख यादव और करीब 5 लाख मुस्लिम वोटर हैं. यानी जातीय वोट गणित में करीब साढ़े सात लाख वोटर डिंपल यादव के पाले में दिख रहे हैं, जबकि ब्राह्मण और राजपूत मिलाकर साढ़े चार लाख वोटर हैं.

यह भी पढ़ें- Analysis: क्या बीजेपी का ये मास्टर प्लान कन्नौज में दे पाएगा डिंपल यादव को चुनौती?

बीजेपी ने इस सीट की चक्रव्यूह रचना में पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे निर्मल तिवारी को अपने पाले में कर लिया है. निर्मल तिवारी को पिछले चुनाव में एक लाख 27 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. बीजेपी की कोशिश इस सीट पर यादव वोटों में सेंध लगाने के साथ-साथ अन्य पिछड़े वोटों को अपने पाले में करने की है. हालांकि शिवपाल यादव के यहां से उम्मीदवार न खड़ा करने के फैसले ने बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है. लेकिन बीजेपी इस सीट को किसी भी कीमत पर जीतने की तैयारी में है. इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस सीट के लिए अभी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

अखिलेश के लिए बीजेपी ने बनाया ये खास प्लान
आजमगढ़ से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मैदान में हैं. यादव परिवार के बाहर बने इस नए किले को फतह करने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा रखी है. 2014 के चुनाव में राज्य में सरकार होने और पार्टी के दूसरे सबसे दिग्गज नेता शिवपाल यादव के लगातार कैंप करने के बाद भी मुलायम यहां सिर्फ 70 हजार के करीब वोटों की जीत पाए थे.

2009 में भाजपा से रमाकांत यादव जीते थे. बीजेपी इस किले पर किसी भी तरह सेंध लगाना चाहती है, लेकिन 2009 को छोड़ दें तो बीजेपी इस सीट पर कभी भी चुनाव नहीं जीत पाई है. बात करें इस सीट के जातीय समीकरण की तो करीब 18 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर 19 फीसदी यादव, 16 फीसदी दलित और 14 फीसदी मुसलमान हैं. यही वो आकड़ा है जो इस सीट को यादव परिवार के लिए सुरक्षित बनाता है.

अखिलेश यादव, फाइल फोटो


लेकिन जब विपक्ष में यादव उम्मीदवार हो तो सबसे ज्यादा 19 फीसदी यादव मतों में सेंध लगाना मुश्किल नहीं है. 2014 के चुनाव में इसी सेंध ने जीत का अंतर इतना कम कर दिया था. बीजेपी इस चुनाव में भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ के बहाने यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.

क्या इस बार टूट जाएगा गांधी परिवार का ये किला?
अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव मैदान में हैं. आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जब भी गांधी परिवार का कोई शख्स इस सीट से चुनाव लड़ा, उसकी जीत पक्की हुई. इस सीट से गांधी परिवार के चार लोग संसद पहुंचे लेकिन भारतीय जनता पार्टी गांधी परिवार के इस किले को किसी भी कीमत पर भेदना चाहती है. इसके लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है.

यह भी पढ़ें- Analysis: क्या ब्राह्मण करा पाएंगे माया की नैया पार?

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इस किले को किसी हालत में तोड़ना चाहती है. पार्टी के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी हर हाल में राहुल गांधी से अपनी पिछली हार का बदला लेना चाहती हैं. इसके लिए वो लगातार पांच साल से काम कर रही हैं.

बात करें अमेठी के जातीय समीकरण की तो करीब 17 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर 22 फीसदी ओबीसी, 18 फीसदी मुसलमान, 15 फीसदी एससी और 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं. बीजेपी सवर्ण और ओबीसी के गठबंधन के बहाने इस सीट पर जातीय समीकरण में राहुल गांधी को मात देना चाहती है. साथ ही आजादी के बाद के विकास का हवाला देकर बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी सीधे गांधी परिवार पर हमला बोल रही हैं, जबकि कांग्रेस को अपनी सरकारों में किए गए विकास और गांधी परिवार के करिश्मे का भरोसा है.

क्या भेद  पाएंगे रायबरेली का किला?
रायबरेली सीट पर भी बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत लगा रही है. सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने इस सीट पर स्थानीय एमएलसी दिनेश सिंह को मैदान में उतारा है. बात करें इस सीट के जातीय समीकरण की तो करीब 34 फीसदी एससी वोटों में सबसे ज्यादा पासी जाति के हैं. 20 लाख के करीब मतादाताओं वाली इस सीट पर 11 फीसदी ब्राह्मण, 8 फीसदी ठाकुर, 7 फीसदी यादव और 6 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. ऐसे में जातीय आंकड़ा भी सोनिया गांधी का समर्थन करता है. शायद यही वो वजह है जिसके कारण बीजेपी नेतृत्व इस सीट पर ज्यादा फोकस करने की जगह अमेठी पर जोर लगाए हुए है.

सोनिया गांधी, फाइल फोटो


मैनपुरी का किला
यादव परिवार का ये सबसे अभेद्य किला है. मायावती से गठबंधन के बाद जिस तरह मुलायम ने इस चुनाव को अपना अंतिम चुनाव बताया, उससे इस किले की दीवारें और मजबूत हो गई हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के हिसाब से यहां का वोट गणित देखें तो 17.3 लाख वोटरों में करीब 6 लाख से ज्यादा यादव वोटर हैं.

दूसरे नबंर पर लोध वोटर हैं. इनकी संख्या करीब 5 लाख है और बीजेपी ने इसी पर दांव लगाया है. बीजेपी ने पिछले चुनाव में शिकस्त खाए प्रेम सिंह शाक्य को मैदान में उतारा है. पार्टी को उम्मीद है कि शाक्य वोटरों के साथ-साथ यादव छोड़ अन्य पिछड़े वर्ग के वोटर, बीजेपी के परंपरागत सवर्ण वोटर के साथ आते हैं तो मुलायम सिंह यादव को उनके गढ़ में चुनौती दी जा सकती है. इस सीट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनावी सभा कर चुके हैं, जबकि दोनों उप मुख्यमंत्रियों की सभा प्रस्तावित है.

यह भी पढ़ें- अब तीसरे चरण के रण पर फोकस, अखिलेश बनाम मोदी-योगी के बीच जंग

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अमेठी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 23, 2019, 11:35 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...