महज कुछ हजार से अचानक 1 लाख से ज्यादा कोरोना जांचें कैसे कर पा रहा है उत्तर प्रदेश?

यूपी में कोरोना टेस्ट में रफ्तार देखने को मिल रही है.
यूपी में कोरोना टेस्ट में रफ्तार देखने को मिल रही है.

यूपी (UP) में कोरोना मामलों की संख्या 1 लाख के करीब पहुंच गई हैं. इस संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जहां पहले हजार डेढ़ हजार संक्रमित लोगों की ही पहचान हो पाती थी अब अचानक चार हजार-पांच हजार नये मामले हर रोज सामने आने लगे हैं.

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लखनऊ. कोरोना (COVID-19) काल में आबादी के सापेक्ष बेहद कम जांचें कर पाने का दाग अब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) ने धो दिया है. इन दिनों हर रोज औसतन 1 लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच की जा रही है. महज 10 दिन पहले जांचों की संख्या 50 हजार से भी कम थी. तो आखिर फिर ऐसी क्या व्यवस्था की गई? जिससे जांचों का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया.

यूपी में कोरोना मामलों की संख्या एक लाख के करीब पहुंच गई हैं. इस संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जहां पहले हजार डेढ़ हजार संक्रमित लोगों की ही पहचान हो पाती थी अब अचानक चार हजार-पांच हजार नये मामले हर रोज सामने आने लगे हैं. इसका कारण ये है कि जांचों के मामले में अब यूपी ने भी रफ्तार पकड़ ली है.

 4 अलग-अलग तरीके से जांचें की जा रही



पिछले एक हफ्ते से हर रोज यूपी में औसतन एक लाख जांचें की जा रही है. ज्यादा जांचें हो रही हैं इसीलिए ज्यादा मामले सामने आने लगे हैं. ये संभव हुआ है चार अलग-अलग तरीके से की जाने वाली जांचों से. यूपी में जिन 4 अलग-अलग तरीके से जांचें की जा रही हैं, उनमें रियल टाइम आरटी पीसआर, सीबी नैट, ट्रू नैट और एन्टीजन टेस्ट शामिल हैं.
आरटी पीसीआर से रोजाना 30 हजार जांचें

कोविड की जांचों को देख रहे राज्य टीबी अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि जांचों की संख्या इतनी बढ़ पायी है तो इसकी वजह है आरटी पीसीआर टेस्ट और एन्टीजन टेस्ट की संख्या में बढ़ोतरी. आरटी पीसीआर (Reverse Transcription Polymerase Chain Reaction) के जरिये हर रोज 30 हजार से ज्यादा जांचें की जा रही हैं. इसके लिए 7 शहरों में 8 लैब फुल स्पीड से चल रही हैं. इसके अलावा एन्टीजन टेस्ट भी हर रोज लगभग 20 हजार से ज्यादा किये जा रहे हैं.

एन्टीजन टेस्ट पूरी तरह कन्फर्मेटरी टेस्ट नहीं होता है

झांसी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोल़जिस्ट डॉ अंकुर ने बताया कि आरटी पीसीआर मशीन में एक साथ 94 सैम्पल जांच के लिए लगाये जा सकते हैं. हालांकि जांच रिपोर्ट में 8 से 10 घण्टे लग जाते हैं. पूल टेस्ट में तो और ज्यादा जाचें इससे हो जाती हैं. संचारी रोग विभाग से रिटायर हुए डॉ आरके गुप्ता ने बताया कि हालांकि एन्टीजन टेस्ट पूरी तरह कन्फर्मेटरी टेस्ट नहीं होता है. गर्भनिरोधक किट की तरह ही एक किट से कोविड की जांच की जाती है. इसके नतीजे महज आधे घण्टे में ही आ जाते हैं. इसमें थोड़ी कमियां भी हैं. इस टेस्ट में जो पॉजिटिव आते हैं, उन्हें तो पॉजिटिव माना जाता है लेकिन जो निगेटिव आते हैं, उन्हें पूरी तरह निगेटिव नहीं माना जा सकता है.

संचारी रोग विभाग में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि इसीलिए ऐसे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण हैं और जो एन्टीजन टेस्ट में निगेटिव आये हैं, उनकी जांच आरटी पीसीआर से करायी जाती है. ताकि ये पता चल सके कि उनकी वास्तविक स्थिति क्या है? दो और अलग तरीके की जांचें की जा रही हैं.

सभी जिलों में सीबी नेट और ट्रू नैट मशीनों से जांचें

सीबी नैट (cartridge based nucleic acid amplification test) और ट्रू नैट. ये मशीनें सभी जिला मुख्यालयों पर काम कर रही हैं. इन मशीनों से प्रदेश में अब तक टीबी की जांचें हुआ करती थीं. अब इनसे कोविड की जांचें की जा रही हैं. इन मशीनों का फायदा ये है कि इनके जरिये महज 1 से 2 घण्टे में ही जांच रिपोर्ट मिल जाती है. जबकि आरटी पीसीआर में रिजल्ट 8 से 10 घण्टे में मिलता है. हालांकि एक बार में बहुत कम सैम्पल की ही जांच हो पाती है. संचारी रोग विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि इन मशीनों के जरिये हम फटाफट नतीजों के लिए जांच करते हैं.

यूपी में अब तक 26 लाख हुई जांच

बता दें कि 23 जुलाई को यूपी में महज 55 हजार जांचें हुई थीं लेकिन, 27 जुलाई को यूपी ने 1 लाख से ज्यादा जांचें कर पाने की हद छू ली थी. तब से लेकर लगातार एक लाख से ज्यादा जाचें की जा रही हैं. कल सोमवार तक की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में कुल 26 लाख से ज्यादा जाचें की जा चुकी हैं. अभी तक 97 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण सामने आया है.
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