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ANALYSIS: सपा-बसपा गठबंधन ने कैसे एक दूसरे को दी है ताकत

ANALYSIS: सपा-बसपा गठबंधन ने कैसे एक दूसरे को दी है ताकत

मायावती-अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

मायावती-अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

सत्तारूढ़ बीजेपी को हराने के लिए आगामी आम चुनाव से पहले दोनों दलों ने राज्य में औपचारिक गठबंधन करने के एक महीने बाद गुरुवार को सीट शेयरिंग की घोषणा कर दी.

    फाजिल खान 

    समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच सीट बंटवारे के मुताबिक ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में अखिलेश यादव की पार्टी को बीजेपी से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि शहरी मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है.

    बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि सपा अपने 37 सीटों के कोटे में से 11 शहरी या अर्ध-शहरी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि बसपा अपने 38 सीटों में से सात सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.

    समाजवादी पार्टी 1991 से बीजेपी के पास रही लखनऊ, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर से चुनाव लड़ेगी. इसके अलावा, अखिलेश की पार्टी का सीधा मुकाबला अपने चाचा और सपा के पूर्व नेता शिवपाल यादव से फिरोजाबाद सीट पर होगा.

    डील के मुताबिक, बसपा को अपने मूल वोटर बेस अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 17 सीटों में से 10 सीटें मिली हैं. बसपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अधिकांश सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी यादवों के गढ़ माने जाने वाले एटा, मैनपुरी, कन्नौज और इटावा जैसी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.

    वहीं, सपा-बसपा गठबंधन ने कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के गढ़ अमेठी और रायबरेली संसदीय क्षेत्रों में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. बची हुई तीन सीटों पर जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के चुनाव लड़ने की उम्मीद है.

    सत्तारूढ़ बीजेपी को हराने के लिए आगामी आम चुनाव से पहले दोनों दलों ने राज्य में औपचारिक गठबंधन करने के एक महीने बाद गुरुवार को सीट शेयरिंग की घोषणा की.

    बताते चलें कि 2014 में बीजेपी ने राज्य की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 71 पर जीत हासिल की थी, जिससे केंद्र में इसे पूर्ण बहुमत मिला. 'मोदी लहर' के बीच सपा ने पांच सीटें आजमगढ़, बदायूं, फिरोजाबाद, कन्नौज और मैनपुरी में जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी.

    दोनों दलों के पास राज्य में कम से कम 41 लोकसभा क्षेत्रों में बीजेपी की तुलना में अधिक वोट शेयर था. पिछले साल उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा ने बीजेपी के कब्जे वाली गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस बार समाजवादी पार्टी के कोटे में कैराना सीट भी है, जिसे रालोद ने उपचुनाव के दौरान जीता था.

    उपचुनावों में मिली सफलता के बाद सपा और बसपा के बीच 2019 चुनावों के लिए संभावित गठबंधन की अटकलें शुरू हो गई थी. पिछले महीने सपा-बसपा के गठबंधन होने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है.

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    Tags: Akhilesh yadav, Amit shah, BJP, BSP, Congress, Election 2019, Lok Sabha Election 2019, Mayawati, Narendra modi, SP, Up news in hindi

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