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आम आदमी पार्टी को यूपी में झटका, पूर्वांचल संयोजक समेत सैकड़ों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल
Lucknow News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 27, 2020, 7:23 PM IST
आम आदमी पार्टी को यूपी में झटका, पूर्वांचल संयोजक समेत सैकड़ों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल
लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू ने आप कार्यकर्ताओं को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करवाई

AAP के पूर्वांचल संयोजक संजीव सिंह अपनी पूरी यूनिट वाराणसी, भदोही, जौनपुर और लखनऊ सहित सभी जगहों के कार्यकर्ताओं के साथ आज कांग्रेस में शामिल हुए हैं

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लखनऊ. बीते दिनों दिल्ली के विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) में भले ही आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को ऐतिहासिक जीत मिली हो. लेकिन उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की जीत का कुछ खास असर न होने के चलते आज आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. राजधानी लखनऊ में गुरुवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्वांचल संयोजक संजीव कुमार सिंह ने अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ आम आदमी पार्टी छोड़ कांग्रेस (Congress) का दामन थाम लिया है. कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू (Ajay kumar lallu) ने आप नेता संजीव कुमार सिंह (Sanjeev kumar singh) समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता दिलाई है.

दिल्ली जलती रही आप सरकार तमाशा देखती रही: लल्लू
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ‘संजीव सिंह काफी जुझारू और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी हैं. संजीव सिंह आप पार्टी के पूर्वांचल के संयोजक और अध्यक्ष थे लेकिन जिस तरह से आप पार्टी अपनी नीति और नियति में लगातार बदलाव आ रही है और कुछ दिन पूर्व ही एक बार फिर सत्ता में वापस आने के बाद दिल्ली जलती रही और तमाशा देखा जाता रहा. उससे आहत होकर आप नेता संजीव सिंह ने आम आदमी पार्टी को छोड़कर गुरुवार को कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया है. संजीव सिंह अपनी पूरी यूनिट वाराणसी, भदोही, जौनपुर और लखनऊ सहित सभी जगहों के कार्यकर्ताओं के साथ आज कांग्रेस में शामिल हुए हैं.'

आप (AAP) छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए संजीव कुमार सिंह ने मीडिया से कहा कि ‘आप पार्टी का इतिहास पहले आंदोलन का रहा है. देश में इंडिया अगेंस्ट करप्शन (India against corruption) के नाम पर आंदोलन की शुरूआत कर एक विकल्प देने के लिये स्वराज और आंतरिक लोकतंत्र के आधार पर आम आदमी पार्टी का गठन किया गया. लेकिन अब न तो आप में स्वराज रहा और न ही आतंरिक लोकतंत्र. जिसके चलते केजरीवाल की कथनी और करनी से दुखी होकर कई बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी. आम आदमी पार्टी राजनीति में देश को एक नया विकल्प देने आई थी. लेकिन आज आप बीते 7 वर्षों से सिर्फ दिल्ली की सत्ता से ही चिपक कर रह गई है. दिल्ली हिंसा के दौरान आखिर दिल्ली में 70 में से 62 सीट पाने वाले केजरीवाल इतने दिन तक खामोश क्यों थे? आज के दौर में देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिये सिर्फ नौजवानों, किसानों और महिलाओं को कांग्रेस और प्रियंका गांधी का ही साथ देना चाहिए.'



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First published: February 27, 2020, 7:23 PM IST
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