UP: डॉ. कफील खान के समर्थन में सामने आई IAP, निलंबन बहाल करने की मांग

डॉ. कफील खान के समर्थन में सामने आई IAP (File photo)

डॉ. कफील खान के समर्थन में सामने आई IAP (File photo)

रजनीश दुबे ने बताया कि बच्चों की मौत के मामले में बाल रोग विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता डॉ. कफील खान (Dr Kafeel Khan) को निलंबित किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 5:23 PM IST
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लखनऊ. गोरखपुर (Gorakhpur) के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में अगस्त, 2017 के दौरान ऑक्सीजन की कमी से 70 बच्चों की मौत होने के मामले में डॉ. कफील खान (Dr Kafeel Khan) को यूपी सरकार ने क्लीन चिट नहीं दी है. इसी कड़ी में रविवार को भारत के बालरोग विशेषज्ञों की सबसे बड़ी संस्था इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी) ने डॉक्टर कफील खान के समर्थन में पत्र लिखकर उनके निलंबन को जल्द समाप्त करने की मांग की है. इससे पहले प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) रजनीश दुबे ने कहा कि चंद रोज पहले से डॉ. कफील जिन बिंदुओं पर क्लीन चिट मिलने का दावा कर रहे हैं, उन बिंदुओं पर जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है. इसलिए क्लीन चिट की बात बेमानी है.

‘गलत प्रचार कर रहे हैं डॉ. कफील’

इसके अलावा, डॉ. कफील बाल रोग विभाग के प्रवक्ता पद पर योगदान करने के बाद बाद भी अनाधिकृत रूप से निजी प्रैक्टिस कर रहे थे तथा मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से जुड़े हुए थे. उन पर निर्णय लिए जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. अन्य 2 आरोपों पर अभी शासन द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. रजनीश दुबे ने बताया कि बच्चों की मौत के मामले में तत्कालीन प्राचार्य डॉ़ राजीव कुमार मिश्रा, एनेस्थीसिया विभाग के सतीश कुमार और बाल रोग विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता डॉ. कफील खान को निलंबित किया गया था.

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक ने लिखा पत्र
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक ने लिखा पत्र

प्रमुख सचिव ने कहा कि डॉ. कफील जो खुद को निर्दोष करार दिए जाने का प्रचार कर रहे हैं, वह गलत है. बता दें कि 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को चार मामलों में से सिर्फ एक में ही क्लीन चिट मिली है. उनके बारे में यह बात निराधार साबित हुई है कि घटना के वक्त 100 बेड वाले एईएस वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ. कफील थे.

NSA के तहत मथुरा जेल में थे बंद

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ भाषण के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल में बंद कफील को गत एक सितम्बर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फौरन रिहा करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद उन्हें देर रात मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया था.
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