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'अब इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ेगी आईआईएम छात्रों की अहमियत'

'अब इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ेगी आईआईएम छात्रों की अहमियत'

Getty Images

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देश के नामी प्रबंधन संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) में पढ़ने वाले छात्रों के सामने अब पहले से अधिक रोजगार के अवसर होंगे.

देश के नामी प्रबंधन संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) में पढ़ने वाले छात्रों के सामने अब पहले से अधिक रोजगार के अवसर होंगे. उन्हें हावर्ड सरीखे इंटरनेशनल विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा लेने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी.

केंद्रीय केबिनेट ने सोमवार को आईआईएम बिल-2017 को मंजूरी दे दी है. अब आने वाले संसद सत्र में इस पर मुहर लगते ही आईआईएम के छात्रों को डिग्री देने का रास्ता साफ हो जाएगा.

मालूम हो कि अभी देश के 20 आईआईएम में पढ़ने वाले छात्रों को एमबीए के समतुल्य पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा दिया जाता है. केबिनेट से इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रो अजित प्रसाद ने न्यूज 18 से बात की और बिल के फायदे बताए:

उच्च शिक्षा और नौकरी दोनों की राह होगी आसान

प्रो अजित ने बताया कि पिछले 35 साल से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा देते आ रहे हैं. बाद में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज से इसकी समतुल्यता का प्रमाण पत्र लेते हैं.  इससे डोमेस्टिक मार्केट में तो समस्या नहीं आती लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में समस्या का सामना करना पड़ता है.

विदेशों में कई विश्वविद्यालय इसे नहीं समझते. उन्हें यह बताने के लिए कि आईआईएम का यह प्रोग्राम डिग्री के बराबर है काफी पत्राचार करना पड़ता है. काफी मशक्कत के बाद वहां दाखिला मिलता है. यह बिल जब यह पास होगा तो दो मुख्य फायदे होंगे.

यहां के छात्र जब विदेशों में पढ़ने या शोध के लिए जाएंगे तो समस्या नहीं होगी. उनको जॉब करने में भी समस्या नहीं होगी. प्रो अजित ने बताया कि अभी जो छात्र फेलो प्रोग्राम कर रहे हैं वह आईआईएम के फेलो कहलाते हैं जबकि यह पीएचडी प्रोग्राम है.

इन फेलो को किसी आईआईएम में तो जॉब मिल जाती है लेकिन अपने यहां की बात करें तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में जॉब नहीं मिलती. यह बिल पास होने के बाद रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे. प्रो अजित ने बताया कि बिल पास होने के बाद पीएचडी की डिग्री दी जा सकेगी.

सूत्रों की मानें तो आईआईएम बिल-2017 आने के बाद इन संस्थानों का अपना बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स भी होगा. इस बोर्ड में 15 सदस्य होंगे जिसमें केंद्र और राज्य सरकार का भी प्रतिनिधित्व रहेगा.

एक तरह से यह बिल देश के 20 आईआईएम को पूर्ण स्वायत्ता देने का काम करेगा. हालांकि यह भी तय है कि इसके बाद इन संस्थानों की जवाबदेही भी बढ़ जाएगी. बहरहाल जो भी हो लेकिन इस बिल को केबिनेट की मंजूर से आईआईएम में पढ़ने वाले छात्र और शिक्षक सभी काफी उत्साहित हैं.

Tags: IIM, लखनऊ

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