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भू-माफिया, सियासत और अफसरशाही के बीच खेला जाता है अवैध खनन का खेल!

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 24, 2019, 1:23 PM IST
भू-माफिया, सियासत और अफसरशाही के बीच खेला जाता है अवैध खनन का खेल!
प्रतीकात्मक तस्वीर

हाईकोर्ट व एनजीटी की सख्ती और कई जगह कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है. इतना ही नहीं अवैध खनन के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में कई अफसरों को कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा है. इनमें कई आईएएस अफसर भी शामिल हैं.

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बहुचर्चित आईएएस अफसर बी चंद्रकला समेत कई अन्य के ठिकानों पर सीबीआई छापे से यूपी में अवैध खनन के काले खेल की चर्चा एकबार फिर से सुर्ख़ियों में है. वैसे तो बुंदेलखंड अवैध खनन के लिए हमेशा मुफीद रहा है, लेकिन बदलते समय और मोटी काली कमाई की वजह से यह खेल पूरे प्रदेश में फैल गया. दरअसल पूरा खेल माफिया, सियासत और अफसरशाही के बीच खेला जाता है. लिहाजा सरकार कोई भी हो भू-माफिया अपनी पकड़ बना ही लेते हैं.

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हाईकोर्ट व एनजीटी की सख्ती और कई जगह कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है. इतना ही नहीं अवैध खनन के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में कई अफसरों को कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा है. इनमें कई आईएएस अफसर भी शामिल हैं.

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बसपा राज में शुरू हुआ खेल सपा शासनकाल में फूला-पनपा

ऐसा माना जाता है कि अवैध खनन के लिए यूपी बुंदेलखंड क्षेत्र बसपा शासनकाल में सबसे महफूज था. लेकीन सपा राज में यह पूरे प्रदेश में फैल गया. बुंदेलखंड के हमीरपुर और बांदा में होने वाला अवैध खनन सपा शासनकाल में रामपुर, सोनभद्र से अवध के गोंडा तक पहुंच गया. कहा जाता है कि बसपा शासनकाल में सम्र्कों और पार्कों में पत्थर कहीं से लाए गए और भुगतान कहीं का दिखाया गया. इतना ही नहीं ट्रकों को पास कराने के लिए भी खुलेआम पैसा वसूला जाता था.

अवैध रेत खनन मामले में अखिलेश यादव समेत सभी मंत्रियों के खिलाफ जांच करेगी सीबीआई10 हजार करोड़ रुपए का वारा-न्यारा होने का अनुमान

हमीरपुर के जनहित याचिकाकर्ता अधिवक्ता विजय द्विवेदी के अनुसार अवैध खनन के धंधे में 10 हजार करोड़ रुपए का वार न्यारा होने का अनुमान है. बसपा व सपा शासनकाल में मोरंग सिंडीकेट का खेल शुरू हुआ जो 10 सालों में 10 गुना तक बढ़ा. अवैध वसूली की शुरुआत 1100 रुपए प्रति ट्रक से शुरू होकर 11 हजार रुपए तक पहुंच गई है. अधिवक्ता विजय का दावा है कि सिंडीकेट के नाम पर होने वाली इस वसूली का 70 फ़ीसदी धन प्रदेशस्तरीय नेताओं को जाता था. जबकि 30 फ़ीसदी अवैध वसूली करने वाले अपने पास रखते थे. उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास ऐसे नामों की फेहरिस्त है. सिंडीकेट की लिस्ट में सपा के सहारनपुर से एमएलसी इक़बाल के अलावा, बसपा नेता रजा खान, सीरज ध्वज सिंह व प्रकाश द्विवेदी, विजय गुप्ता, शराब कारोबारी रहे पोंटि चड्ढा, सपा एमएलसी रमेश मिश्रा व सपा के पूर्व विधायक दीपनारायण यादव के नाम चर्चा में आ चुके हैं.

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काफी बड़ा है अवैध खनन का नेटवर्क

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के एक अफसर बताते हैं कि अवैध खनन का नेटवर्क काफी बड़ा होता है. सरकार किसी की भी हो खनन माफिया का गठजोड़ सत्तधारी दल से जुड़े सफेदपोश नेताओं के जरिए अफसरों तक दखल बना ही लेता है. सफेदपोश अफसरों पर आंखें मूदने का दबाव बनाते हैं तो माफिया सभी के जेबें भरते हैं. राजनीतिक दलों से जुड़े ज्यादातर नेताओं के नाम कहीं न कहीं सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस धंधे में सामने आते रहे हैं.

हमीरपुर में 31 मई 2012 के बाद सबसे अधिक 49 खनन पट्टे जारी किये गए. इनमें सर्वाधिक 17 खनन पट्टे सपा एमएलसी रमेश चंद्र मिश्रा व उनके परिवार को मिले. वहीं बसपा नेता संजय दीक्षित को 11 पट्टे मिले.

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First published: January 24, 2019, 12:26 PM IST
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