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पहले चरण के चुनाव में रालोद के अजीत सिंह बीजेपी का गणित बिगाड़ने की जुगत में

Pradesh18
Updated: January 13, 2017, 6:08 PM IST
पहले चरण के चुनाव में रालोद के अजीत सिंह बीजेपी का गणित बिगाड़ने की जुगत में
बताया जा रहा है कि जिस रणनीति के तहत अजीत सिंह आगे बढ़ रहे हैं उससे बीजेपी का गणित बिगड़ सकता है. अजीत सिंह जाट बाहुल जिलों में बीजेपी के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हैं. इसके लिए उनका सबसे बड़ा हथियार जाट आरक्षण का मुद्दा है.

बताया जा रहा है कि जिस रणनीति के तहत अजीत सिंह आगे बढ़ रहे हैं उससे बीजेपी का गणित बिगड़ सकता है. अजीत सिंह जाट बाहुल जिलों में बीजेपी के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हैं. इसके लिए उनका सबसे बड़ा हथियार जाट आरक्षण का मुद्दा है.

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  • Last Updated: January 13, 2017, 6:08 PM IST
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उत्तर प्रदेश विधानसभा के पहले चरण का मतदान 11 फ़रवरी को होगा. इस चरण में 15 जिलों की 73 विधानसभा सीटों पर जाट मतदाताओं का अहम रोल होता है. लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों की वजह से वोटों का ध्रुवीकरण लोकसभा चुनाव में देखने को भी मिला था. यही वजह था कि कभी अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल को अपने गढ़ में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस बार अजीत सिंह ने जाट बाहुल 51 जिलों पर मतदाताओं को बीजेपी के खिलाफ खड़े करने में लगे हुए हैं.

बताया जा रहा है कि जिस रणनीति के तहत अजीत सिंह आगे बढ़ रहे हैं उससे बीजेपी का गणित बिगड़ सकता है. अजीत सिंह जाट बाहुल जिलों में बीजेपी के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हैं. इसके लिए उनका सबसे बड़ा हथियार जाट आरक्षण का मुद्दा है.

बता दें अजीत सिंह ने इस बार उन 51 जिलों पर फोकस किया है, जहां जाट मतदातों की संख्या ज्यादा है. उन्होंने उसे एकजुट करने के लिए कई बड़ी रैलियां भी की है. इतना ही नहीं अगर वे जाट मतदाताओं को एकजुट करने में सफल हुए तो इसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ेगा क्योंकि पिछले लोकसभा चुनावों में उसे जाटों का भरपूर वोट मिला था.

अगर 2012 विधानसभा चुनावों की बात करें तो रालोद और कांग्रेस की गठबंधन ने उन्हें यहां 14 सीटों पर जीत दिलाई थी. उस समय अजीत सिंह ने किसान और मुसलमान को एक साथ लाकर 9 सीटें जीती थी जबकि कांग्रेस को अकेले 5 सीटें यहीं से मिली थी.

लेकिन किसान और मुसलमान का समीकरण 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों की वजह से गड़बड़ा गया. यही वजह था कि अजीत सिंह बागपत जैसे मजबूत किले से हार गए.

दंगों के बाद बीजेपी और बसपा की ताकत बढ़ी

बता दें पिछले चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सपा को 24, बसपा को 23 और बीजेपी को 12 सीटें मिली थी. लेकिन दंगों के बाद सपा की स्थिति वहां कमजोर हुई है. इस बीच वोटों के ध्रुवीकरण की सम्भावना भी बनी हुई है. जिसकी वजह से पहले चरण में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है. हालांकि अजीत सिंह जाट आरक्षण, नोटबंदी और किसानों के भुगतान के मुद्दे को उठाकर एक बार फिर अपने जाट मतदाताओं को अपने पक्ष में करना चाहते हैं.
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पहले चरण में इन जिलों में डाले जाएंगे वोट

शामली जीके की तीन, मुजफ्फरनगर की 6, बागपत की 3, मेरठ की 7, गाजियाबाद की 5, गौतमबुद्धनगर की 3, हापुड़ की 3, बुलंदशहर की 7, अलीगढ की 7, मथुरा की 5, हाथरस की 3, आगरा की 9, फिरोजाबाद की 5, एटा की 4 और कासगंज की 3 सीटों पर वोट डाले जाएंगे.

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First published: January 13, 2017, 3:13 PM IST
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