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पिछले 25 सालों में कुछ इस तरह यूपी में सिमटता चला गया कांग्रेस का जनाधार
Lucknow News in Hindi

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 14, 2019, 12:55 PM IST
पिछले 25 सालों में कुछ इस तरह यूपी में सिमटता चला गया कांग्रेस का जनाधार
राहुल गांधी (फाइल फोटो)

दरअसल कांग्रेस के मजबूत किले की ढहने की शुरुआत और वजह रही नब्बे के दशक में शुरू हुए राम मनोहर लोहिया आंदोलन, मंडल कमीशन और बीजेपी द्वारा राम मंदिर को लकेकर चलाए गए हिंदुत्व के एजेंडे से.

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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी में सपा और बसपा गठबंधन में जगह न मिलने के बाद कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. कांग्रेस यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. साथ ही दावा किया कि उसे उम्मीद है कि वह 42 सीटें जीतने में कामयाब होगी. हालांकि यूपी में कांग्रेस के खिसकते जनाधार की बात करें तो यह दावा किसी सपने से कम नहीं दिखता. इसकी वजह है कांग्रेस का पिछले 25 सालों में सिमटता जनाधार, जो कि 2014 में दो सीटों और 7 फ़ीसदी मतों तक सिमट गया.

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दरअसल 1984 तक यूपी में कांग्रेस के मुकाबले किसी भी दल का कोई खास जनाधार नहीं था. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजीव गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा. इस चुनाव में कांग्रेस ने यूपी की 85 सीटों में से अकेले 83 सीटों पर जीत हासिल की. इस दौरान उसका मत प्रतिशत 51.03 था. इसके बाद से यूपी में कांग्रेस का जनाधार लगातार गिरता गया. 2014 के चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 7 रह गया.

1984 के बाद से कांग्रेस का प्रदर्शन



दरअसल कांग्रेस के मजबूत किले की ढहने की शुरुआत और वजह रही नब्बे के दशक में शुरू हुए राम मनोहर लोहिया आंदोलन, मंडल कमीशन और बीजेपी द्वारा राम मंदिर को लकेकर चलाए गए हिंदुत्व के एजेंडे से. इन तीनों ही वजहों से राज्य में पार्टी का जनाधार खत्म कर दिया.

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1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 51.03 प्रतिशत वोट के साथ 83 सीटें हासिल हुईं. 1989 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिरकर 31.77 रहा गया उअर उसे महज 15 सीटें हासिल हुई. 1991 में कांग्रेस को 18.02 प्रतिश वोट मिला और 5 सीटें हासिल हुई. 1996 में भी कांग्रेस ने 5 सीटें जीती मगर उसका वोट प्रतिशत 8.14 तक पहुंच गया. 1998 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत सबसे न्यूनतम स्तर 6.02 पर पहुंचा और उसका खाता भी नहीं खुल सका. 1999 के चुनावों में कांग्रेस ने वापसी की और 10 सीटों के साथ उसका वोट प्रतिशत 14.72 पहुंचा. 2014 के लोकसभा चुनावों में वोट प्रतिशत फॉर गिरा. 12.04 वोट प्रतिशत के साथ कांग्रेस महज 9 सीटें जीतने में कामयाब रही. 2009 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी करते हुए 21 सीटें हासिल की जबकि उसका वोट प्रतिशत 18.25 था. 2014 के मोदी लहर में कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिरकर 7.53 पर पहुंच गया और उसे महज दो सीटों पर जीत हासिल हुई.

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राहुल गांधी के सामने यूपी सबसे बड़ी चुनौती
तीन राज्यों में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस को लगता है कि यूपी में खोया उसका जनाधार एक बार फिर लौटेगा. लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी यही है. क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि केंद्र का रास्ता यूपी से ही होकर जाता है. ऐसे में कांग्रेस का यूपी में प्रदर्शन काफी अहम होगा. राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर संगठन को मजबूत कर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की होगी. कई जिलों में कमेटी का गठन भी अभी तक नहीं हुआ है. साथ में प्रदेश में पार्टी के पास कोई बड़ा चेहरा भी नहीं है.

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First published: January 14, 2019, 12:55 PM IST
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