यूपी में नीतीश की राह चली बीजेपी, महापुरुषों के नाम पर चला अति पिछड़ा कार्ड!

दरअसल, सपा और बसपा के गठबंधन के ऐलान के बाद बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती वोट प्रतिशत को बढ़ाने की है. यही वजह है कि बीजेपी पिछड़ी जातियों पर कुछ ज्यादा ही दांव लगा रही है.

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 10, 2018, 2:43 PM IST
यूपी में नीतीश की राह चली बीजेपी, महापुरुषों के नाम पर चला अति पिछड़ा कार्ड!
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ा मोर्चा सम्मलेन में
Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 10, 2018, 2:43 PM IST
मिशन 2019 की तैयारियों में जुटी बीजेपी पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के वोट को साधने के लिए पिछले तीन दिनों से राजधानी लखनऊ में सामाजिक सम्मेलन के आयोजन में जुटी है. इन सम्मेलनों से भगवा टोली महागठबंधन की काट खोज रही है. इसी क्रम में गुरुवार को पिछड़ा वर्ग सम्मलेन के प्रभारी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अति पिछड़ों के वोट को साधने के लिए एक ऐलान किया. मौर्य ने नाई समाज के प्रमुख नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के नाम पर हर जिले में एक सड़क बनाने का ऐलान किया है.

बता दें कि इससे पहले प्रजापति और राजभर समाज का सम्मेलन हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजा सुहेलदेव का जिक्र किया था. मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह उन्हें तय करना है कि सुहेलदेव को याद रखने वालों के साथ रहना है या फिर गजनवी का साथ देने वालों के. मुख्यमंत्री ने चित्तौड़ा में सुएल्देव की प्रतिमा लगाने का भी ऐलान किया था.

दरअसल, सपा और बसपा के गठबंधन के ऐलान के बाद बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती वोट प्रतिशत को बढ़ाने की है. यही वजह है कि बीजेपी पिछड़ी जातियों पर कुछ ज्यादा ही दांव लगा रही है. 2017 के विधानसभा चुनाव में पिछड़े वोट बैंक में सेंधमारी करके ही बीजेपी ने यूपी में भारी फतह हासिल की थी. एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के निर्देशन में पार्टी का सारा जोर पिछड़ों और अति पिछड़ों को अपने पाले में लाने पर है.

बता दें कि बिहार में अति पिछड़ों को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने का बड़ा श्रेय कर्पूरी ठाकुर को जाता है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कर्पूरी ठाकुर की ही तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग से यादव को अलग करते हुए अति पिछड़े वर्ग को जनता दल यूनाइटेड के साथ जोड़ा और सरकार बनाई. यूपी में भी बीजेपी यादवों से अलग ओबीसी की अन्य जातियों को लुभाने में लगी है. सामाजिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौर्य ने कहा कि सपा, बसपा और कांग्रेस नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनने से रोकने के प्रयास में जुटी हुई हैं. लिहाजा सभी ओबीसी जातियों को एकजुट होकर मोदी का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर ओबीसी एक हो गए तो मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता.

हालांकि, विपक्ष ने योगी सरकार पर महापुरुषों के नाम का प्रयोग राजनैतिक फायदे के लिए करने का आरोप भी लगाया है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने कहा कि बीजेपी हमेशा से ही महापुरुषों के नाम का प्रयोग राजनैतिक फायदे के लिए करती रही है. उसे इन महापुरुषों की विचारधारा से कोई लेना देना नहीं है. वे उनके दिखाए मार्गों पर नहीं चलना चाहते. बीजेपी बाबा साहेब, महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ बही पटेल जैसे महापुरुषों का नाम लेती है. यह सिर्फ एक ड्रामा है. पहले सरकार ने कर्पूरी ठाकुर जयंती पर छुट्टी रद्द कर दी और जब उन्हें पता चला कि अति पिछड़ों का वोट साधना है तो फिर से अवकाश घोषित कर दिया.

गौरतलब है कि योगी सरकार बनते ही सबसे पहली कैंची अखिलेश सरकार में जारी की गई छुट्टियों की लिस्ट पर ही चली थी. इसमें कर्पूरी ठाकुर जयंती समेत तमाम छुट्टियां रद्द कर दी गई थीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि महापुरुषों के नाम पर स्कूलों में छुट्टियां नहीं होनी चाहिए. बल्कि उस दिन बच्चों को महापुरुषों के बारे में बताना चाहिए. हालांकि जनवरी में योगी सरकार अपने इस फैसले को पलटते हुए कर्पूरी ठाकुर और संत रविदास जयंती पर अवकाश की घोषणा कर दी, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में जातीय वोट बैंक को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हुई.
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