तीन तलाक कानून पास होने से पहले दिखने लगा असर! शरई अदालतों में नहीं आ रहे मामले

तीन तलाक के मामले दारुल कजाओं, शरई अदालतों और मुफ्तियों की दारुल इफ्ता कमेटियों में सबसे ज्यादा आते थे.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 9, 2019, 10:17 PM IST
तीन तलाक कानून पास होने से पहले दिखने लगा असर! शरई अदालतों में नहीं आ रहे मामले
तीन तलाक ( फाइल फोटो)
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Updated: July 9, 2019, 10:17 PM IST
तीन तलाक का कानून लोकसभा में पास होने के बाद राज्यसभा में अटका हुआ है, लेकिन इसका खौफ अभी से दिखने लगा है. महिला शरई अदालतों की मानें तो तीन तलाक के मामले अब शून्य हो गए हैं. शरई अदालतों में अब न के बराबर तीन तलाक के मामले आ रहे हैं. ऐसा पहली बार है कि तलाक के मसले अचानक शरई अदालतों से गायब हो गए हैं.

शरई अदालतों में कुल मसलों में 60 से 70 फीसदी तलाक के होते थे

बता दें कि तीन तलाक के मामले दारुल कजाओं, शरई अदालतों और मुफ्तियों की दारुल इफ्ता कमेटियों में सबसे ज्यादा आते थे. शरई अदालतों में आने वाले कुल मसलों में 60 से 70 फीसदी तलाक से सम्बंधित होते रहे हैं. आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी हाजी मो. सलीस ने बताया कि मुस्लिम अब जागरूक हो गए हैं. शरई अदालतों में जाने के बजाय वे आपस में बैठकर अपने मसले खुद सुलझा रहे हैं. दारुल कजाओं से जुड़े उलेमा का कहना है कि तीन तलाक के मसले आना लगभग बंद हो गए हैं.

अदालत में अधिकांश मसले तीन तलाक से संबंधित आते थे

बता दें कि ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल और ऑल इंडिया ख्वातीन बोर्ड के बैनर तले महिला शरई अदालत में अधिकांश मसले तीन तलाक से संबंधित आते थे. इनमें कुछ मसले तो शादी होने के साल भर के अंदर के होते थे. पति ने पत्नी को धमकी देकर छोड़ दिया. कुछ मसलों में बच्चों को छीनकर बहू को ससुराल पक्ष ने घर से भगा दिया. मालूम हो कि दारुल कजाओं और मुफ्तियों की दारुल इफ्ताओं में हर साल औसत सवा सौ मसले तलाक से सम्बंधित आते थे. इनमें अधिकांश में तलाक हो जाता था. 10 फीसदी में ही समझौते होते थे.

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First published: July 9, 2019, 9:29 PM IST
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