कोरोना के भीषण प्रकोप के बीच UP में चल रहे टीकाकरण अभियान को जबरदस्त झटका, जानिए क्यों?

उत्तर प्रदेश में वैक्सीनेशन की रफ्तार बेहद सुस्त हो गई है.  (सांकेतिक फोटो)

उत्तर प्रदेश में वैक्सीनेशन की रफ्तार बेहद सुस्त हो गई है. (सांकेतिक फोटो)

Lucknow News: स्वास्थ्य विभाग में फैमिली वेलफेयर के महानिदेशक डॉ राकेश दुबे ने बताया कि कोरोना के केसेस बढ़ने के कारण लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं. यह एक बड़ी वजह है कि टीकाकरण की संख्या कम हो गई है. यह भी संभव है कि...

  • Share this:
लखनऊ. विशेषज्ञों ने कोरोना (COVID-19) के खिलाफ सबसे मजबूत लड़ाई टीकाकरण (Vaccination) को बताया है. पहले 60 साल से ऊपर के व्यक्तियों को और उसके बाद फिर 45 साल से ऊपर के व्यक्तियों को टीके दिए जाने की शुरुआत की गई. तमाम आशंकाओं के बीच बड़ी संख्या में लोगों ने टीके लेने शुरू किए थे. कुछ दिनों पहले स्थिति यह थी कि रोज पूरे प्रदेश में लगभग 3 लाख टीके दिए जाते थे. एक-दो दिन तो यह संख्या 5 लाख तक भी गई थी लेकिन अब स्थिति विकट हो गई है. टीकाकरण की रफ्तार बहुत सुस्त हो गई है. जहां पहले 3 लाख लोग प्रतिदिन टीके ले रहे थे, अब यह संख्या आधे से भी कम रह गई है. कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच घटता टीकाकरण बेहद चिंतनीय है. कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इसे जबरदस्त झटका माना जा रहा है.

दिनों-दिन टीकाकरण की संख्या गिरती ही जा रही है. आंकड़ों पर एक नजर डालें. 20 अप्रैल तक प्रदेश में एक करोड़ 11 लाख 46 हजार टीके लग गए थे. 23 अप्रैल तक यह आंकड़ा महज 1 करोड़ 16 लाख 23 हजार ही पहुंच पाया. यानी 3 दिनों में सिर्फ 4 लाख लोगों का ही टीकाकरण किया जा सका. इतने टीके पहले 1 दिन में दिए जाते थे.

मेट्रो शहरों में हालत सबसे ज्यादा खराब

प्रदेश के मेट्रो शहरों में, जहां कोरोना की महामारी भयंकर रूप ले चुकी है. वहां टीकाकरण की रफ्तार और सुस्त हो गई है. आंकड़े बताते हैं कि 20 अप्रैल से 30 अप्रैल तक आगरा में सिर्फ 12 हजार, नोएडा में 13 हजार, लखनऊ में 27 हजार, प्रयागराज में 10 हजार और बनारस में 15 हजार ही टीके दिए जा सके. इन टीको में पहली और दूसरी दोनों डोज़ शामिल है.
क्या कहते हैं जिम्मेदार

टीकाकरण की घटती दर पर न्यूज़ 18 ने विस्तार से उस अधिकारी से बात की जो इस पूरे अभियान को प्रदेश में संचालित कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग में फैमिली वेलफेयर के महानिदेशक डॉ राकेश दुबे ने बताया कि कोरोना के केसेस बढ़ने के कारण लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं. यह एक बड़ी वजह है कि टीकाकरण की संख्या कम हो गई है. यह भी संभव है कि टीका लगवाने के इच्छुक ज्यादातर लोगों ने टीके लगवा लिए हैं. जो नहीं लगवाना चाहते हैं उनके साथ कोई जोर जबरदस्ती तो हो नहीं सकती. उन्होंने कहा कि अब एक मई से यह रफ्तार फिर से बढ़ेगी क्योंकि तब 18 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण हो सकेगा.

टीकाकरण पर बीमारी का नहीं दिख रहा घातक असर



बता दें कि जिन लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन पर इस बीमारी का बहुत घातक असर देखने को नहीं मिला है. कोरोना की दूसरी लहर में अभी तक ऐसे किसी भी व्यक्ति के बेहद गंभीर बीमार होने या मृत्यु होने की खबर प्रदेश से नहीं आई है जिसने टीके की डोज़ ले ली हो. इसीलिए पूरी दुनिया भर के वैज्ञानिक जल्द से जल्द टीकाकरण की सलाह दे रहे हैं. टीके से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है जिससे बीमारी से लड़ने में शरीर को ताकत मिलती है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज