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वाशिंगटन में अमेरिकी सैनिकों संग युद्धाभ्यास करेगी भारतीय सेना

रिक्रूटमेंट रैली में जो कैंडिडेट सिलेक्ट होंगे, उन्हें कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा. ये एग्जाम हिसार मिलिट्री स्टेशन में 28 अक्टूबर को होगा.

रिक्रूटमेंट रैली में जो कैंडिडेट सिलेक्ट होंगे, उन्हें कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा. ये एग्जाम हिसार मिलिट्री स्टेशन में 28 अक्टूबर को होगा.

अमेरिका की धरती पर भारतीय सेना अमरिकी सैनिकों के साथ 14 सितंबर से संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास करेगी. 14 से 27 सितंबर तक वाशिंगटन स्थित ज्वाइंट बेस लेविस मैकोर्ड में आयोजित यह भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2017 दोनों देशों के बीच आयोजित होने वाला 13वां संयुक्त युद्धाभ्यास है.

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अमेरिका की धरती पर भारतीय सेना अमरिकी सैनिकों के साथ 14 सितंबर से संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास करेगी. 14 से 27 सितंबर तक वाशिंगटन स्थित ज्वाइंट बेस लेविस मैकोर्ड में आयोजित यह भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2017 दोनों देशों के बीच आयोजित होने वाला 13वां संयुक्त युद्धाभ्यास है.

इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त रूप से ब्रिगेड स्तर पर युद्धाभ्यास का मौका मिलेगा. साथ ही दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियां एक दूसरे के संगठनात्मक सैन्य ढांचों सहित युद्ध कौशल प्रणाली के बारे में रूबरू होंगी और ऑपरेशनल कार्रवाई से जुड़े अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेंगी.

मध्य कमान की पीआरओ गार्गी मलिक सिन्हा ने बताया कि युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की ओर से आधुनिकतम सर्विलांस, ट्रेकिंग, आधुनिकतम हथियारों, विस्फोटकों, आईईडी खोजी उपकरणों एवं सूचना संचार उपकरणों का उपयोग एवं प्रदर्शन किया जाएगा. दोनों देशों के सैनिक किसी भी परिवेश में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त रूप से ऑपरेशन कार्रवाई को अंजाम देने के उद्देश्य से युद्धाभ्यास करेंगे.



उन्होंने बताया कि संयुक्त युद्धाभ्यास के अंतिम चरण में दोनों देशों के सैनिकों द्वारा संयुक्त राष्ट्र की मैंडेट के अनुसार ऑपरेशनल कार्रवाई की जाएगी. इस दौरान द्विपक्षीय लाभों के मद्देनजर दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञों द्वारा शैक्षणिक एवं सैन्य चर्चा भी आयोजित की जाएगी.
सिन्हा ने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच युद्धाभ्यास एक सफल कदम है, जिससे पिछले कुछ दशकों में भारत-अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग मजबूत हुआ है. आने वाले वर्षों में इस युद्धाभ्यास के स्तर को और भी अधिक बढ़ाया जाएगा.
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