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इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस की अपील- अयोध्या पर फैसला हक़ में आए तो भी हिंदुओं को दान कर दें जमीन

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 11, 2019, 8:31 AM IST
इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस की अपील- अयोध्या पर फैसला हक़ में आए तो भी हिंदुओं को दान कर दें जमीन
मुस्लिम बुद्धजीवियों ने अयोध्या मामले पर की मध्यस्थता की पहल

इस बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी कि अयोध्या (Ayodhya) की विवादित जमीन हिंदुओं को सौंप दी जाए, इसके बदले में मस्जिद के लिए कहीं वैकल्पिक जमीन दी जाए.

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लखनऊ. एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या (Ayodhya) के राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) जमीन विवाद पर सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन (मियाद) 17 अक्टूबर तय की है, वहीं दूसरी और मामले में मध्यस्थता की कवायद भी शुरू है. लखनऊ (Lucknow) में मुस्लिम बुद्धजीवियों ने गुरुवार शाम को इस मसले पर बैठक किया. जिसमें इस प्रस्ताव पर सहमति बनी कि फैसला यदि मुस्लिमों के पक्ष में आया तो भी राम मंदिर (Ram Temple) के लिए 2.77 एकड़ जमीन हिंदुओं को गिफ्ट (तोहफा) कर दी जाए.

इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस के बैनर तले हुई मुस्लिम बुद्धजीवियों की बैठक में पूर्व जज, शिक्षाविद्, पूर्व नौकरशाह, वकील और पत्रकार शामिल हुए. इस बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी कि अयोध्या की विवादित जमीन हिंदुओं को सौंप दी जाए. बदले में मस्जिद के लिए कहीं वैकल्पिक जमीन दी जाए. इस प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड भेजने पर भी सहमति बनी.

फैसला पक्ष में आया तो भी नहीं बनेगी मस्जिद

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के पूर्व कुलपति रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आ भी जाए तो मस्जिद बनना मुमकिन नहीं है. लिहाजा बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं को देखते हुए जमीन उन्हें गिफ्ट कर दी जाए. इससे सौहार्द बना रहेगा. उन्होंने कहा कि इस बात पर सुन्नी सेंट्रल बोर्ड भी हमारे साथ है. हालांकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों ने इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया है.


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मध्यस्थता बेहतर रास्ता

पूर्व आईएएस अनीस अंसारी ने कहा कि हमने जो प्रस्ताव पास किया है, उसे सुन्नी वक्फ बोर्ड के मार्फत सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता समिति को भेजेंगे. हमारा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन मध्यस्थता बेहतर रास्ता है. उस पर विचार किया जाना चाहिए.

जिलानी बोले पुराने स्टैंड पर कायम

उधर मुस्लिम बुद्धजीवियों की मध्यस्थता की कोशिश का विरोध भी देखने को मिला. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा उसे ही माना जाएगा. इस मामले में पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी एक्शन कमेटी का स्टैंड आज भी वही है. इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस के पहल पर उन्होंने कहा कि वो खुद तय करें कि वो मुस्लिमों की नुमाईंदगी कर रहे हैं या फिर सरकार की. इस मामले में पक्षकार इक़बाल अंसारी ने भी कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट का ही फैसला मानेंगे.

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First published: October 11, 2019, 8:11 AM IST
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