World TB Day 2021: देश का हर 5वां मरीज UP से, जानें क्यों नहीं हो पा रहा नियंत्रण?

टीबी मरीजों को चिन्हित करने के लिए विशेष अभियान चला रही है सरकार

टीबी मरीजों को चिन्हित करने के लिए विशेष अभियान चला रही है सरकार

World TB Day: 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस है. यह बीमारी पूरी दुनिया में लम्बे समय से मौजूद है. टीबी या क्षय रोग वो संक्रामक बीमारी है जिससे पूरे विश्‍व में सबसे ज्यादा लोग मरते हैं.

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लखनऊ. देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्‍तर प्रदेश में टीबी (TB) के सबसे ज्यादा मरीज हैं. देश का हर पांचवां टीबी मरीज यूपी से होता है. और तो और साल दर साल टीबी से पीड़ित मरीजों (TB Patients) की संख्या में कमी नहीं, बल्कि बढ़ोतरी ही देखी जा रही है. अब सवाल उठता है कि केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक के प्रयासों के बावजूद बीमारी पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है? साल 2025 का वह लक्ष्य कैसे पूरा होगा जब टीबी को पूरी तरह खत्म कर देने की बात कही गई है?

इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है. विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के मरीजों की बढ़ती संख्या चिन्ताजनक नहीं, बल्कि संतोषजनक है. आखिर यह कैसे? आइए विस्तार से जानते हैं. 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस है. यह बीमारी पूरी दुनिया में लम्बे समय से मौजूद है. टीबी या क्षय रोग वो संक्रामक बीमारी है, जिससे दुनिया में सबसे ज्यादा लोग मरते हैं. टीबी मरीजों के मामले में यूपी देश में टॉप पर है. जाहिर है, यहां उसी अनुपात में हर साल मौतें भी हो रही होंगी.

पिछले पांच साल के आंकड़े

साल 2017 में पूरे देश में 17 लाख 34 हजार 905 टीबी मरीज मिले थे. इनमें से 17 फीसदी सिर्फ यूपी से थे. यानी 2 लाख 96 हजार 910. साल 2018 में यह संख्या बढ़ गई, तब देश में 21 लाख 1 हजार 82 मरीज मिले थे. इसके 20 फीसदी सिर्फ यूपी से थे. यूपी में 2018 में मरीजों की संख्या 4 लाख 11 हजार 6 थी. वर्ष 2019 में देश में चिन्हित मरीजों की संख्या 24 लाख 1 हजार 589 थी, जबकि यूपी में 4 लाख 87 हजार 653 मरीज मिले थे. साल 2020 में चिन्हित टीबी मरीजों की संख्या काफी गिर गई. पिछले साल देश में 18 लाख 11 हजार 105 मरीज मिले थे, जबकि यूपी में 3 लाख 68 हजार 112 मरीज मिले थे. यह संख्या इसलिए गिर गई, क्‍योंकि कोरोना के कारण नए टीबी मरीजों की खोज बहुत प्रभावित हुई थी. स्वास्थ्य विभाग इससे काफी चिन्तित रहा. इसीलिए लॉकडाउन खुलने के बाद से अभी तक कई विशेष खोजी अभियान चलाए गए हैं.
लगातार बढ़ रही संख्या

साल 2020 को छोड़ दें तो हर साल टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है. विशेषज्ञों के लिए यह चिंताजनक नहीं, बल्कि संतोषजनक स्थिति है. यह हैरानी वाली बात लग रही होगी, लेकिन यही सच है. राज्य क्षय रोग अधिकारी संतोष गुप्ता ने कहा कि टीबी ऐसी बीमारी है जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है. ऐसे में हमारा सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहता है कि ज्यादा से ज्यादा संक्रमित लोगों का पता चल सके, जिससे उनका इलाज किया जा सके और दूसरे लोगों में इसका फैलाव थम सके.

बीमारी की सूचना देना अनिवार्य



टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसकी सुचना देना अनिवार्य है. ऐसा न करना क़ानूनी रूप से भी जुर्म है. सूचना न देने पर 6 महीने से 2 साल तक के कारावास की सजा निर्धारित है. बहुत लोग अभी भी बीमारी को छुपाए हुए हैं. दवाओं की खरीद संबंधी आंकड़ें बताते हैं कि टीबी के मरीजों की संख्या ज्ञात मरीजों की संख्या से कहीं अधिक है. इसका मतलब यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में मरीज बिना सरकार को सूचना दिए चुपचाप इलाज करा रहे हैं.

टीबी मरीजों की खोज में प्राइवेट डॉक्टर्स बड़ी चुनौती

टीबी मरीज़ों की खोज में प्राइवेट अस्पताल और डॉक्टर्स एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं. हालांकि, सरकार द्वारा ऐसे मरीजों की खोज के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दिक्कतें काफी हैं. इस काम में प्राइवेट डॉक्टर्स, दवा विक्रेता और जांच केंद्रों से और अधिक सहयोग की जरूरत है. ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीजों की खोज ही इसके उन्मूलन को सफल बना सकती है. इसीलिए वे कहते हैं कि टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या चिन्ताजनक नहीं, बल्कि संतोषजनक है.

टीबी मरीजों को मिलती है ये सुविधा

बता दें कि सरकार ने मुफ्त में टीबी मरीजों की जांच और मुफ्त दवाई के साथ ही अच्छे भोजन के लिए 500 रुपये प्रतिमाह देने की व्यवस्था कर रखी है. यह सुविधा प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज करा रहे मरीज़ भी ले सकते हैं. बावजूद इसके टीबी मरीजों की खोज और इस बीमारी का प्रदेश और देश से उन्मूलन एक चुनौती बना हुआ है.
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