यूपी चुनाव में सत्ता की रेस पहले ही छोड़कर भागी कांग्रेस!
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यूपी चुनाव में सत्ता की रेस पहले ही छोड़कर भागी कांग्रेस!
स्थिति ये है कि चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं और नेताओं से पटा रहने वाला उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी दफ्तर सुनसान पड़ा है. न तो नेता दिख रहे हैं, न ही एक भी बैनर पोस्टर.

स्थिति ये है कि चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं और नेताओं से पटा रहने वाला उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी दफ्तर सुनसान पड़ा है. न तो नेता दिख रहे हैं, न ही एक भी बैनर पोस्टर.

  • Pradesh18
  • Last Updated: January 15, 2017, 4:29 PM IST
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरे जोर-शोर के साथ मैदान में उतरी कांग्रेस चुनावी गठबंधन के फेर में ऐसी उलझी की कि उसका असर पूरे संगठन पर दिखाई देने लगा है.

स्थिति ये है कि चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं और नेताओं से पटा रहने वाला उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी दफ्तर सुनसान पड़ा है. न तो नेता दिख रहे हैं, न ही एक भी बैनर पोस्टर, पूरा नजारा कांग्रेस के मैदान छोड़कर भागने सरीखा ही दिख रहा है.

उत्तर प्रदेश में 17 जनवरी को पहले चरण के नॉमिनेशन दाखिल करने की तारीख है और दो दिन पहले रविवार को कांग्रेस दफ्तर का जो हाल है, उसे देखकर लग ही नहीं रहा है, ये वही कांग्रेस है जिसके नेता यूपी में सरकार बनाने की दावा करते फिर रहे हैं.



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उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का जो दफ्तर होर्डिंगों, नारों आदि से पटा होता था, वहां सब सन्नाटा पसरा है. न कहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ है, न ही कहीं चुनाव को लेकर चर्चा चल रही है.

कांग्रेस कमेटी कार्यालय की बाउंड्री पर वॉलराइटिंग कर 27 साल यूपी बेहाल के नारे को लिखा गया है. पेंट से लिखे गए इस नारे को चूने से छिपाने की कोशिश की गई है.

उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है. वैसे कांग्रेस की हालत कई सालों से पतली है और पार्टी बहुत विशेष प्रदर्शन सालों से नहीं कर सकी है लेकिन फिर भी कांग्रेस दफ्तर हमेशा से ही गुलजार रहता था.

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चुनावों को लेकर तैयारियां जब शुरू हुईं, तब कांग्रेस मुख्यालय की ऐसी स्थिति नहीं थी. कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ यहां चौबीसों घंटे देखी जा सकती थी. 27 साल यूपी बेहाल के नारे के साथ कांग्रेस ने प्रदेश भर में रथयात्रा निकाली और फिर किसानों के लिए रैली और खाट सभा का आयोजन किया तो भी कार्यालय की रौनक देखते ही बनती थी.

लेकिन जैसे-जैसे कांग्रेस ने रणनीति बदली, दफ्तर में लगने वाली भीड़ पर भी वही असर देखने को मिलने लगा. सपा के साथ गठबंधन होने की खबरें आने लगीं, तो इस भीड़ में असमंजस में घिरे नेताओं की तादाद बढ़ने लगी. ये वे नेता थे, जो टिकट की आस में लगे थे.

उन्हें डर सताने लगा कि गठबंधन के चलते कहीं उनकी दावेदारी गुम न हो जाए. बीच में गठबंधन की बात को लेकर सुगबुगाहट कम हुई तो दफ्तर में उत्साहित कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ टिकट की आस में बढ़ने लगी.

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खुद प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर दिन रात प्रत्याशियों की नामों पर माथापच्ची करते नजर आए. लेकिन अब एक बार फिर गठबंधन की बात तेजी से हवा में तैर रही है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस दफ्तर पूरी तरह से सुनसान ही नजर आ रहा है.

दिलचस्प बात ये है कि 27 साल यूपी बेहाल वाला पोस्टर पार्टी दफ्तर से गायब हो चुका है. आपको पूरा दफ्तर ​देखकर ऐसा लगेगा कि मानो इस बार कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरने ही नहीं जा रही है.
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