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क्या कोरोना की तीसरी लहर है मथुरा-फिरोजाबाद में बच्चों की मौत, जानिए Experts की राय

क्या कोरोना की तीसरी लहर है मथुरा-फिरोजाबाद में बच्चों की मौत, जानिए Experts की राय

UP: मथुरा और फिरोजाबाद में अब तक 50 मासूम बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है.

UP: मथुरा और फिरोजाबाद में अब तक 50 मासूम बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है.

UP News: यूपी सरकार के आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है.

लखनऊ. पिछले एक हफ्ते में ही उत्तर प्रदेश के दो जिलों मथुरा (Mathura) और फिरोजाबाद (Firozabad) में 50 मासूम बच्चों की मौत हो गयी है. ये सरकारी आंकड़ा है. बच्चों को पहले तेज बुखार हुआ फिर पेट में दर्द और दो से तीन दिनों में ही मौत होने लगी. अब सरकारी अमले ने दोनों जिलों में डेरा डाल दिया है. उम्मीद है हालात जल्द ठीक हो जायेंगे. लेकिन, इन दोनों जिलों में हो रही बच्चों की बीमारी क्या कोरोना की तीसरी लहर (COVID-19 Third Wave) की दस्तक है? ये सवाल हर किसी की जुबान पर तैर रहा है.

बहुत से लोगों ने इसे कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़ दिया है. बच्चों को हो रहे बुखार को रहस्यमयी बताया जा रहा है. लेकिन, सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है. बच्चों की बिगड़ती तबीयत और हो रही मौतों के पीछे कोई और जिम्मेदार है.

सरकारी आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है. मथुरा में बीमार हुए बच्चों के 184 सैम्पलों की जांच में डेंगू के 91, स्क्रबटाइफस के 29 और लैप्टो स्पोइरोसिस के 48 मामले पुष्ट हुए हैं. फिरोजोबाद में जांच के लिए सैम्पल भेजे गये हैं. नतीजे आने बाकी हैं.

फिरोजोबाद में कैम्प कर रहे वेक्टर बॉर्न डिजीजेज के ज्वाइण्ट डायरेक्टर डॉ. अवधेश यादव ने कहा कि एक भी बीमार बच्चा कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है. सभी की कोरोना जांच की गयी है. सभी डेंगू, मलेरिया और स्क्रबटाइफस के मरीज मिले हैं. कोरोना का बच्चों की बीमारी से दूर-दूर तक लेना नहीं है. इसे किसी भी सूरत में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. ऐसी अफवाह से समस्यायें और गंभीर हो जायेंगी.

तो फिर बच्चों की मौत क्यों हो रही है?

मथुरा और फिरोजोबाद में बुखार से सिर्फ बच्चों की ही मौत नहीं हुई है बल्कि बड़े भी मौत के शिकार हुए हैं. ये जरूर है कि बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है. लखनऊ से मथुरा और फिरोजाबाद गई डॉक्टरों की टीम ने कहा कि बीमारी का सही समय पर इलाज हो जाता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. गांव में झोलाछाप डाक्टरों ने बुखार उतारने के लिए दवाओं की ओवरडोज दे दी. साथ ही स्टेरायड भी दे दिया. इससे बुखार तो उतर गया लेकिन, तबीयत बिगड़ती चली गयी. तीन दिन के बाद बच्चे शॉक में चले गये. फिर एक-एक कर शरीर के अंग फेल होते गये और बच्चों की मौत होती गयी.

ऐसे में बच्चों को न तो कोई रहस्यमयी बीमारी या बुखार हुआ है और ना ही ये कोरोना की संभावित तीसरी लहर है. बल्कि ये इलाज में लापरवाही और गांव-गांव में चिकित्सीय सुविधा के अभाव का नतीजा है.

Tags: Corona third wave, Firozabad News, Lucknow news, Mathura news, UP news

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