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लोकसभा चुनाव 2019: राहुल गांधी नहीं, मायावती बनाम मोदी होने वाला है!
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News18 Uttar Pradesh
Updated: July 2, 2018, 1:42 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: राहुल गांधी नहीं, मायावती बनाम मोदी होने वाला है!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)

मायावती चाहती हैं कि 2019 का लोकसभा चुनाव 'मोदी बनाम माया' का रूप ले ले. इससे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री की रह चुकी मायावती के राष्ट्रीय कद पर भी मुहर लगेगी.

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मनमोहन राय

काफी दिनों से खामोश चल रहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती एकदम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुखर होती दिख रही हैं. वह लगातार मोदी सरकार और उनकी नीतियों पर हमले कर रही हैं. अभी तक बसपा सुप्रीमो मायावती ज्यादातर उत्तर प्रदेश के ही मुद्दे उठाती थीं. अब उनके बयान और प्रेस वक्तव्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी आने लगे हैं. जैसे कल ही उन्होंने अमेरिका में भारतीय वीजा और पासपोर्ट को लेकर खड़ी हो रही दिक्कत का मुद्दा उठाया और मोदी सरकार पर इसे अनदेखा करने का आरोप लगाया.

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उसके ठीक पहले उन्होंने भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठाया. उन्होंने इस सर्जिकल स्ट्राइक पर वीडियो जारी करने को पॉलिटिकल स्टंट करार दिया. इसके अलावा मायावती पीएम मोदी की मगहर रैली, स्विस बैंक में भारतीयों के धन में वृद्धि समेत मोदी सरकार के तमाम मुद्दों पर हमलावर हैं. इसके पीछे कहीं न कहीं उनकी मोदी के खिलाफ खुद को सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी पेश करने की रणनीति भी हो सकती है.

दरअसल मायावती चाहती हैं कि 2019 का लोकसभा चुनाव 'मोदी बनाम माया' का रूप ले ले. इससे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती के राष्ट्रीय कद पर भी मुहर लगेगी. वहीं वर्तमान राजनीतिक हालातों में एंटी मोदी फोर्सेस का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरने की रणनीति को भी धार मिलेगी.

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इस रणनीति के पीछे कुछ ठोस वजहें भी हैं. उत्तर प्रदेश में सपा प्रमुख अखिलेश यादव मायावती को गठबंधन में 'बड़े पार्टनर' का दर्जा देने को तैयार दिखते हैं. उन्होंने खुद कई बार संकेत दिए हैं कि यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से गठबंधन होने पर ज्यादा सीटें वह बसपा को देने को तैयार हैं. कुछ अन्य क्षेत्रीय पार्टियां भी मायावती से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय कदम बढ़ाने की पैरवी कर चुके हैं.कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के दौरान मंच पर बसपा सुप्रीमो मायावती को विशेष दर्जा मिलता दिखा. सोनिया गांधी के साथ उनके गले मिलने की तस्वीर चर्चा का केंद्र बनी. मायावती की बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश से बाहर भी लगातार विस्तार कर रही है. कर्नाटक में उनका इकलौता विधायक मंत्री भी बन चुका है. इससे पहले मध्यप्रदेश, उत्तराखंड व अन्य राज्यों में भी उनकी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं.

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अब 2019 के चुनाव में मायावती जहां यूपी में सपा और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाने को तैयार दिखती हैं. वहीं दूसरी तरफ उनकी यूपी के बाहर कांग्रेस के साथ तालमेल कर महागठबंधन में ज्यादा सीटें हासिल करने की कवायद दिख रही है. दरअसल इस रणनीति के पीछे अहम आधार उनका दलित वोट बैंक है.

बता दें उत्तर प्रदेश में दलित वोटर करीब 19 प्रतिशत माना जाता है. मायावती का ये परंपरागत वोटर रहा है. उपचुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि ये वोटर एक बार फिर मायावती की ताकत बन गया है. उनके साथ खड़ा है. वहीं देश के दूसरे राज्यों में भी दलित आबादी कई सीटों पर अहम रोल अदा करती है, जिनका चेहरा मायावती बनना चाहती हैं.

शायद यही कारण है कि कुछ ही महीनों बाद होने वाले मध्यप्रदेश चुनाव में वहां के प्रमुख कांग्रेसी नेताओं ने बसपा के साथ गठबंधन की वकालत की है. ऐसे में साफ है कि बसपा यूपी में एंटी बीजेपी महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टनर और अन्य प्रदेशों में भी अहम रोल अदा करने जा रही है.

अगर ये रणनीति सही बैठी और चुनाव में बसपा ने अच्छा प्रदर्शन कर दिया तो जाहिर तौर पर गठबंधन की तरफ से मायावती प्रधानमंत्री पद की प्रबल दावेदार बन सकती हैं. हालांकि ये इस बात पर निर्भर है कि एंटी बीजेपी पार्टियां 2019 लोकसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति तक पहुंच पाती हैं या नहीं और बसपा के पास इन घटक दलों के बीच सबसे ज्यादा सांसद हैं या नहीं.

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First published: July 2, 2018, 11:26 AM IST
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