साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ही जितिन प्रसाद का कांग्रेस से हो चुका था मोहभंग!

Jitin Prasad Joins BJP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे के रूप में अहम भूमिका निभाने वाले जीतेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद का राहुल गांधी का साथ छोड़ना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय जरूर है.

Jitin Prasad Joins BJP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे के रूप में अहम भूमिका निभाने वाले जीतेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद का राहुल गांधी का साथ छोड़ना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय जरूर है.

Jitin Prasad Joins BJP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे के रूप में अहम भूमिका निभाने वाले जीतेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद का राहुल गांधी का साथ छोड़ना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय जरूर है.

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लखनऊ. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के 3 करीबी साथियों में से एक रहे जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) ने कांग्रेस (Congress) का हाथ छोड़कर बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया है. करीब 3 पीढ़ियों से खांटी कांग्रेसी रहे प्रसाद परिवार का आखिरकार नाता टूट गया, लेकिन 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जितिन प्रसाद का कांग्रेस से अलग होना, कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. इसकी पटकथा वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद ही लिखनी शुरू हो गई थी. उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे के रूप में अहम भूमिका निभाने वाले जीतेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद का राहुल गांधी का साथ छोड़ना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय जरूर है.

दरअसल, दो बार के लोकसभा सांसद और मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री का पदभार संभालने वाले जितिन प्रसाद के सियासी सफर को देखें तो प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने के बाद से ही वे हाशिये पर रहे. साल 2014 में केन्द्र से कांग्रेस सरकार की विदाई के साथ ही जितिन के भी दुर्दिन शुरू हो गये. वर्ष 2014 का चुनाव वे धौरहरा से हार गये. इतनी बुरी हार हुई कि जितिन सीधे चौथी पोजिशन पर लुढ़क गये. लोकसभा में मिली करारी हार के बाद जितिन ने 2017 का यूपी विधानसभा का चुनाव तिलहर से लड़ा. यहां भी वे मात खा गये. इस हार ने तो जितिन को रुला दिया. तिलहर मुस्लिम और ब्राह्मण बाहुल्य सीट है. यहां भी वे जीत नहीं पाये. फिर 2019 में भी जितिन धौरहरा से लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन फिर हार गये. इस तरह 2004 और 2009 में लगातार दो बार सांसदी जीतने के बाद जितिन तीन बार लगातार हारे. लगातार मिलती हार के कारण पार्टी में साख भी गिरती गयी.

कांग्रेस पर किया तीखा प्रहार 

बुधवार को बीजेपी ज्वाइन करने के बाद जितिन प्रसाद ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि किसे छोड़ रहा हूं. महत्वपूर्ण ये है कि कहां जा रहा हूं. आज जो देश की परिस्थिति है, उसमें अगर कोई लड़ सकता है तो वह बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है. सभी पार्टियां किसी व्यक्ति विशेष या क्षेत्रीय पार्टी हैं. बीजेपी ही राष्ट्रीय पार्टी है जो सही मायनों में देश की समस्याओं से लड़ रही है. जितिन प्रसाद का यह बयान काफी अहम है. जिस तरह से कोरोना काल में केंद्र और प्रदेश की सरकार पर विपक्ष हमलावर था, उससे कहीं न कहीं बीजेपी को संजीवनी मिलेगी.
यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों की अहम भूमिका

जानकार बताते हैं कि यूपी की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता हमेशा से ही अहम भूमिका निभाते रहे हैं. ऐसे में जितिन प्रसाद का बीजेपी में शामिल होना अहम है. कहा जा रहा है कि उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी. हालांकि, कांग्रेस जितिन प्रसाद के जाने को बड़ी बात नहीं मान रही. कांग्रेस प्रवक्ता विवेक बंसल कहते हैं कि जो अपने बलबूते एक चुनाव नहीं जीत सकते उनके जाने का कोई मतलब नहीं. कांग्रेस सत्ता में नहीं है तो ऐसा उन्होंने किया.

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