केशव मौर्य बोले- बुआ ने दे ही दिया बबुआ को धोखा, अब ‘हाथी’ नहीं करेगा ‘साइकिल’ की सवारी

केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर सपा और बसपा के गठबंधन पर तंज कसा है. उत्‍तर प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों ने लोकसभा चुनाव साथ मिल कर लड़ने का फैसला किया था.

News18Hindi
Updated: June 4, 2019, 10:11 AM IST
केशव मौर्य बोले- बुआ ने दे ही दिया बबुआ को धोखा, अब ‘हाथी’ नहीं करेगा ‘साइकिल’ की सवारी
अखिलेश यादव, मायावती और मुलायम सिंह यादव.
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Updated: June 4, 2019, 10:11 AM IST
लोकसभा चुनाव से पहले हुआ सपा-बसपा गठबंधन दरकता हुआ दिखाई दे रहा है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में सोमवार को बुलाई बैठक में गठबंधन के टूटने के संकेत दिए थे. इस पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने चुटकी ली है. उन्होंने लगातार दो ट्वीट किए. एक ट्वीट में केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा, 'अब ‘हाथी’ नहीं करेगा ‘साइकिल’ की सवारी, मायावती जी अकेले ही लड़ेंगी सभी सीटों पर उपचुनाव! आखिर में बुआ ने बबुआ को धोखा दे ही दिया. हाथी और साइकिल का कोई मेल ही नहीं था, ये तो सिर्फ मोदी जी का विरोध ही था.'

मौर्य ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'प्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने के लिए बुआ-बबुआ साथ-साथ आए थे, लेकिन जनता तो सारा सच पहले से ही जानती थी और उसने सोच समझकर ही वोट किया.' सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के सेंट्रल ऑफिस में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में मायावती गठबंधन से नाखुश नजर आईं. उन्होंने कहा कि गठबंधन से पार्टी को फायदा नहीं हुआ. यादव का वोट हमारी पार्टी को ट्रांसफर नहीं हुआ.

वोट ट्रांसफर को लेकर विवाद
सूत्रों की मानें, तो बीएसपी पदाधिकारियों से मिले फीडबैक के बाद मायावती ने बैठक में कहा कि गठबंधन का वोट चुनावों में ट्रांसफर नहीं हुआ. लिहाजा, आगामी उपचुनाव में बीएसपी अकेले ही लड़ेगी. बता दें कि लोकसभा चुनाव में बीएसपी के 10 प्रत्‍याशी संसद पहुंचे हैं. लोकसभा चुनाव में 10 विधायक चुनाव जीतकर संसद पहुंचने में कामयाब रहे. ऐसे में विधानसभा की इन सीटों पर छह महीने के अंदर उपचुनाव कराना अनिवार्य है.




वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में बीएसपी को संतोषजनक सीटें न मिलने और कुछ प्रदेशों में करारी हार को लेकर मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं की अखिल भारतीय स्तर पर मीटिंग बुलाई थी. यूपी के सभी बसपा सांसदों और जिलाध्यक्षों के साथ बैठक में मायावती ने कहा कि पार्टी सभी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव लड़ेगी और अब 50 फीसदी वोट का लक्ष्य लेकर राजनीति करनी है. मायावती ने ईवीएम में धांधली का भी आरोप लगाया.

आमतौर पर उपचुनाव नहीं लड़ती बसपा
जानकारों की मानें तो उपचुनाव लड़ने का फैसला चौंकाने वाला है, क्योंकि बसपा के इतिहास को देखें तो पार्टी उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारती है. वर्ष 2018 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था. इसी आधार पर लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन बना. हालांकि, चुनाव परिणाम मन माफिक नहीं आए. अब अगर मायावती अकेले उपचुनाव में उतरने का फैसला करती हैं तो गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठाना लाजमी है.

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