प्रो. माहरूख मिर्जा की बढ़ी मुश्किलें, कमेटी के कब्जे में सारे रिकॉर्ड, इन बिंदुओं पर होगी जांच

प्रो.माहरूख मिर्जा के खिलाफ जांच तेज.

प्रो.माहरूख मिर्जा के खिलाफ जांच तेज.

Prof. Mahrukh Mirza Case: KMC भाषा विश्विद्यालय के कुलपति का कहना है कि हमारे द्वारा जांच को अवधि तक प्रो. मिर्जा को किसी भी प्रकार का पद विश्विद्यालय में नहीं दिया जाएगा. साथ ही  कमेटी को सारे कागजात उपलब्ध कराए गए हैं. जांच में पूरी तरह सहयोग किया जा रहा है. 

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लखनऊ. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Urdu Arabic Farsi University ) के पूर्व कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं. बात चाहे फर्जी डिग्री लगाकर कुलपति के पद पर दावेदारी करना हो या कुलपति रहते हुए पद का गलत इस्तेमाल कर वित्तीय अनियमितता और शिक्षकों की नियुक्तियों में हेर फेर हो. पद से हटते ही उनकी कारगुजारियों की कलई खुलने लगी है. प्रो.माहरूख मिर्जा (Prof. Mahrukh Mirza) के खिलाफ अनियमितता और भ्रष्टाचार किए जाने पर हुई शिकायतों का संग्यान लेकर कुलाधिपति ने जांच कमिटी बनाई है. इस संबंध में कुलाधिपति ने पहले अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग की अध्यक्षता में, निदेशक उच्च शिक्षक और केजीएमयू के कुलसचिव को जांच कर एक महीने में कार्रवाई के निर्देश दिए थे.

बाद में इस जांच समिति में आंशिक संशोधन कर उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज एसके त्रिपाठी की अध्यक्षता में कुलपति शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्विद्यालय व कुलसचिव KGMU की कमेटी राजभवन द्वारा बनाई गई है. दरअसल उनके खिलाफ हुई शिकायतों के 26 बिंदुओं पर प्रो. मिर्जा के खिलाफ कमेटी द्वारा जांच की जाएगी. इनमें विवि में शिक्षकों के पदों पर नियुक्तियों में आरक्षण की अनदेखी, रिश्तेदारों और परिचितों की नियुक्ति किए जाने और विश्वविद्यालय की परिनियमावली व विश्विविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति के निर्धारित मानकों व दिशा निर्देशों की अवहेलना तक शामिल है.

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पहले पेश हो चुकी है एक जांच रिपोर्ट
पूर्व में भी न्यायाधीश एसके त्रिपाठी की जांच में ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय में प्रोफेसर के पद पर हुई उनकी नियुक्ति के विरुद्ध अपनी रिपोर्ट दे चुके है. साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर तक कि नियुक्ति पर शिया पीजी कॉलेज के प्रबंध तंत्र के प्रो मिर्ज़ा की बर्खास्तगी के प्रस्ताव पर तत्कालीन कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय एसके शुक्ला की मुहर लगा चुके है. ऐसे में प्रो. माहरुख मिर्जा की स्वयं की नियुक्ति से लेकर कुलपति कार्यकाल में शिकायतों में बताई गई अवैध रूप से की गई नियुक्ति ,भ्रष्टाचार व अन्य मामलों में उनके लिए मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही है.

इन बिन्दुओं पर होगी जांच

प्रो. मिर्जा पर 14 सितंबर 2020 में कार्यकाल खत्म होने से पूर्व अपने सगे संबंधियों, मित्रों के बच्चों का चयन आउट ऑफ वे जाकर और चयन प्रक्रिया से छेड़छाड़ कर किए जाने का आरोप है. मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को दरकिनार कर भारी उगाही कर नियुक्ति की शिकायत.
विवि के पदों पर जारी नोटिफिकेशन में रोस्टर के नियमों का उल्लंघन, दाखिल रिट में हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी कर नियुक्ति प्रक्रिया की गई.
सहायक आचर्य, सह आचार्य, और आचार्य पदों पर सीधी भर्ती के इंटरव्यू असंवैधानिक तरीके से निर्धारित की गई.
नियुक्ति से संबंधित शासनादेश नियमों की अवहेलना कर नोटिफिकेशन अरबी, अंग्रेजी, होम साइंस, फारसी विभाग के पदों को बढ़ा दिए जाने, हिंदी के पद घटा देने और शारीरिक शिक्षा विभाग के पद खत्म कर दिए जाने की शिकायत.
नियुक्ति में अपने चहेतों को लाभ दिलाने के लिए जल्दबाजी की गई. नोटिफिकेशन में जानबूझकर पदों को घटाए बढ़ाए गए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंटरव्यू कराए गए जिसके कारण दूर दराज के अभ्यर्थी वंचित रह गए.
असिस्टेंट प्रोफेसर उर्दू में इंटरव्यू में एक्सपर्ट पैनल के सदस्य द्वारा आपत्तिजनक प्रश्न पूछकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायत.
नियुक्ति में दोषपूर्ण आरक्षण प्रणाली, नोटिफिकेशन में चयन प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख न होना, दोषपूर्ण चयन प्रक्रिया की शिकायत.
 कंप्यूटर साइंस व इंजिनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर साक्षात्कार के लिए एआईसीसीटीई मानकों के अनुसार विषय एक्सपर्ट न बुलाए जाने, कम्युनिज्म के आधार पर भर्ती प्रक्रिया की शिकायत. साथ ही परीक्षाफल घोषित नहीं किया गया.
असिस्टेंट प्रफेसर के पद पर अभ्यर्थी के एससी के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की शिकायत.
अलग-अलग विभागों में अपने सगे संबंधों की मनमाने तरीके से नियुक्ति.
पूर्व में हुई कुलपति पद पर नियुक्ति के समय चयन समिति में नामित सदस्यों को कार्यपरिषद से पुन: कुलपति के चयन के लिए चयन समिति का सदस्य नामित करा लिए जाने पर.
राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान से अलग-अलग मदों में मिली धनराशि (20 करोड़) का मनमाने ढंग से दुरुपयोग. कंप्यूटर की खरीद मनचाही एजेंसी और सरकारी आदेश के उल्लंघन की शिकायत.
दीक्षांत समारोह में गोद लिए बच्चों से दुर्व्यवहार. खान पान के नाम पर धनराशि का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत.
अपनी पत्नी को गलत ढंग से पीएचडी के लिए इनरोल्ड किया जाने की शिकायत.
मूल नियोक्ता शिया पीजी कॉलेज को सूचित किए बिना कुलपति पद पर कार्यग्रहण. दोनों संस्थानों में लंबे वक्त तक वेतन आहरित करने की शिकायत.
बीटेक में सात गेस्ट लेक्चरर की नियुक्ति 25 हजार रुपये में की गई, जिनमें कार्य परिषद के बच्चों की नियुक्तियां हुईं. बीटेक प्रोग्राम में अध्यापन के लिए अतिथि प्रवक्ता होने के बाद भी 57 हजार नए संकाय सदस्यों की पांच साल के लिए नियुक्ति किए जाने की शिकायत.
शिक्षा शास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पद पर नियुक्ति के प्रकरण पर कोई प्रावधान नहीं किया गया.
कोरोनाकाल में समानता अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरव्यू किए गए, योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से अलग रखने का षड्यंत्र रचने की शिकायत.
छेड़छात्र और.मानसिक रूप से प्रताड़ना की मौखिक व लिखित शिकायत को दबाते हुए आरोपित शिक्षक की नियुक्ति नियमित किए जाने की शिकायत.
अभियांत्रिकी व प्रौद्योगिकी सेल्फफाइनेंस कोर्स कॉन्ट्रैक्ट पदों पर धांधली.
ओ लेवल की योग्यता न रखने वाले अभ्यर्थी को विश्वविद्यालय अधिनियम का उल्लंघन करते हुए प्रोन्नत किया गया. आपत्ति पर अविधिक रूप से अवमुक्त किया गया.
साक्षात्कार में विषय विशेषग्यों को जानकारी न दिए जाने से साक्षात्कार स्थगित करने की शिकायत. कुलपति ने नियम के अनुसार 15 दिन पहले विषय विशेषग्यों को सूचना नहीं दी. 
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