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जानिए कौन हैं जूतम-पैजार करने वाले बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल
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Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: March 7, 2019, 9:45 AM IST
जानिए कौन हैं जूतम-पैजार करने वाले बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल
संतकबीर नगर में भिड़े बीजेपी संसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल

संतकबीर नगर: चलिए जानते हैं बीजेपी के ये दो माननीय कौन हैं, जिन्होंने शिलापट पर नाम न होने की वजह से जूतम-पैजार की.

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यूपी के संतकबीर नगर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार शाम को जो कुछ भी हुआ उससे सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की सोशल मीडिया पर जमकर छीछालेदर हुई. किसी ने लिखा कि यह बीजेपी की आन्तरिक सर्जिकल स्ट्राइक थी, तो किसी ने लिखा मोदी के संसद ने योगी के विधायक को पीट दिया. इतना ही नहीं विपक्ष को भी बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया.

दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में सामने आई इस अंतर्विरोध से पार्टी के मंसूबों को पर पानी फिर सकता है. क्योंकि पार्टी सूत्रों की मानें तो करीब दो दर्जन लोकसभा क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों में जबरदस्त तनातनी है. जिसका खामियाजा पार्टी को चुनावों में भुगतना पड़ सकता है.

चलिए जानते हैं बीजेपी के ये दो माननीय कौन हैं, जिन्होंने शिलापट पर नाम न होने की वजह से जूतम-पैजार की. प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन के सामने ही सांसद शरद त्रिपाठी ने मेहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल को एक के बाद एक आठ जूते मारे. इसके बाद विधायक ने भी थप्पड़ जड़े. मामला यहीं शांत नहीं हुआ मारपीट के बाद जमकर गली-गलौज का दौर भी चला.

दरअसल, सांसद शरद त्रिपाठी यूपी बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के बेटे हैं. 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे. 2014 में पहली बार मोदी लहर में सांसद बने हैं. उधर विधायक राकेश सिंह बघेल भी 2017 में ही पहली बार विधायक बने हैं.

राकेश सिंह बघेल को संघ का पुराना कार्यकर्ता बताया जाता हैं. मगर संघ जिस अनुशासन की बात करता है, उसके इस मीटिंग में जमकर कपड़े उतारे गए. एक और बात जो सुनने में आ रही है वो ये कि सांसद के पिता जी राजनाथ सिंह के करीबी हैं और विधायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के.

दरअसल दोनों के ही बीच का विवाद नया नहीं है. पहले भी राज्य सरकार और सांसद निधि से होने वाले  विकास कार्यों को लेकर दोनों के बीच तनातनी सामने आती रही है. राज्य सरकार से बनी सड़कों पर सांसद का नाम नहीं होता था तो सांसद निधि से हुए कार्यों में विधायक का नाम नहीं लिखा जाता था.

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First published: March 7, 2019, 9:31 AM IST
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