ब्रजेश सिंह व मुख़्तार अंसारी के गैंगवार में इस तरह हुई थी BJP विधायक कृष्णानंद राय की हत्या

दरअसल, कृष्णानंद राय की हत्या के पीछे मुख़्तार अंसारी और माफिया डॉन ब्रजेश सिंह के बीच गैंगवार को माना जाता है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 3, 2019, 4:26 PM IST
ब्रजेश सिंह व मुख़्तार अंसारी के गैंगवार में इस तरह हुई थी BJP विधायक कृष्णानंद राय की हत्या
बीजेपी विधायक स्वर्गीय कृष्णानंद राय की फाइल फोटो
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Updated: July 3, 2019, 4:26 PM IST
पूर्वांचल में गैंगवार का इतिहास कई दशकों पुराना है, जिसमें कई जानें गईं. इस गैंगवार में पहली बार एके-47 भी गरजी, जिसमें गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी. नवम्बर 2005 में हुए इस हत्याकांड में बुधवार को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने मुख़्तार अंसारी, उनके भाई और बसपा सांसद अफजाल अंसारी व अन्य को बरी कर दिया. वहीं मामले में एक और मुख्य आरोपी माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या हो चुकी है.

दरअसल, कृष्णानंद राय की हत्या के पीछे मुख़्तार अंसारी और माफिया डॉन ब्रजेश सिंह के बीच गैंगवार को माना जाता है. 1996 में मुख़्तार अंसारी माफिया डॉन से विधायक बन गए. उसके बाद से ही मुख़्तार ने ब्रजेश सिंह की सत्ता को हिलाना शुरू कर दिया. मुख्तार का दबदबा पुलिस और राजनीति में भी था. लिहाजा पुलिस ब्रजेश को परेशान करने लगी. साथ ही इनके नजदीकी लोगों पर हमला भी होने लगा. इसके बाद ब्रजेश ने मुख्तार को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया.

मुख़्तार को मारने की हुई कोशिश

जुलाई 2001 में गाजीपुर के उसरी चट्टी में मुख्तार अंसारी अपने काफिले के साथ जा रहा था. उसी वक्त हमलावरों ने मुख़्तार के काफिले पर हमला कर दिया. इस हमले में मुख्तार बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके तीन लोग मारे गए. मुख़्तार ने भी दो हमलावरों को मार गिराया. इस हमले में ब्रजेश सिंह के घायल होने की बात सामने आई. खबर यहां तक आई कि ब्रजेश की मौत हो गई. इस घटना के बाद मुख़्तार का पूर्वांचल में एक छत्र राज्य हो गया.

Mukhtar Ansari
माफिया डॉन मुख़्तार अंसारी


कृष्णानंद राय ने की थी ब्रजेश की राजनीतिक मदद

हमले में मुख़्तार के बच निकलने के बाद ब्रजेश को मालूम हो चुका था कि मुकाबला बिना राजनीतिक मदद के संभव नहीं है. कहा जाता हैं कि बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय ने ब्रजेश को ये मदद दी. लेकिन फिर भी मुख्तार पीछा नहीं छोड़ रहा था. उस वक्त मुख्तार अंसारी जेल में बंद था. तभी एक खतरनाक घटना को अंजाम दिया गया. 2005 में गाजीपुर-बक्सर के बॉर्डर पर विधायक कृष्णानंद राय को उनके 6 अन्य साथियों के साथ सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. कहा जाता है कि हमलावरों ने छह एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं. मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गईं.
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माफिया डॉन ब्रजेश सिंह


महत्वपूर्ण गवाह की हुई थी संदिग्ध मौत

कृष्णानंद राय हमले का एक महत्वपूर्ण गवाह शशिकांत राय 2006 में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाया गया था. उसने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला करने वालों में से अंसारी और बजरंगी के निशानेबाजों अंगद राय और गोरा राय को पहचान लिया था. राय हत्याकाण्ड में मुख्तार के शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी की बेहद खास भूमिका मानी जाती है. बताया जाता है कि कृष्णानंद राय की हत्या के बाद ब्रजेश सिंह गाजीपुर-मऊ क्षेत्र से भाग निकला था.

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First published: July 3, 2019, 4:08 PM IST
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